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बस पर गिरता गार्डर तो जाती कई जानें
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:53 AM IST
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बस पर गिरता गार्टर तो जाती कई जानें
साहिबाबाद। गार्टर गिरने के हादसा के दौरान उत्तराखंड रोडवेज की एक बस में सवार 50 से अधिक यात्री बाल-बाल बच गए। गार्टर बस के ठीक आगे गिरा। मेट्रो स्टेशन के पास फेसिंग लगाने से सड़क संकरी हो गई है। जिसके चलते चालक ने बस धीमी कर ली थी। वरना बस के ऊपर गिरने से बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे को देख लोगों की सांसे थम गईं। वहीं हादसे के बाद करीब पांच घंटे तक लोगों को जाम से जूझना पड़ा।
जानकारी के अनुसार रविवार रात जोडने के लिए प्लेटफार्म की तरफ 50 टन से अधिक वजन का लोहे का गार्टर रखा गया था। कर्मचारियों ने लापरवाही बरतते हुए नट-बोल्ट नहीं कसे। जिस वजह से वह गिरा। हादसे के बाद करीब 10 मिनट के लिए जीटी रोड पूरी तरह से बंद हो गया। इससे जाम लगना शुरू हो गया। सप्ताह का पहला दिन होने से वाहनों का अधिक दबाव था। इसके चलते थोड़ी ही देर में मेरठ तिराहे तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। यातायात पुलिस और सिविल डिफेंस के सदस्य जाम खुलवाने में लगे रहे, मगर दोपहर में वाहनों का दबाव कम होने पर जाम खुलना शुरू हुुआ। दोपहर 3 बजे के करीब जीटी रोड पर यातायात सामान्य हुआ।
शिक्षिका सीमा की हालत गंभीर
सीमा साहिबाबाद के एक स्कूल में शिक्षिका हैं और मुरादनगर स्थित घर से आटो से स्कूल आ रही थीं। मेट्रो का गार्डर ऑटो की छत को तोड़ता हुआ सीमा के बाएं पैर पर गिरा। इस दौरान उनका बायां पैर गार्डर से बुरी तरह कुचला गया। पैर की सर्जरी की गई है। घायल बाइक सवार गुलजार मोहननगर की फैक्ट्री में इंटरव्यू देकर लौट रहा था कि गार्टर की चपेट में आ गया। वहीं ऑटो चालक इंद्रजीत के पिता ब्रह्मपाल ने बताया कि उनका बेटा उनके घर में अकेला कमाने वाला है। अस्पताल में उसका हाल जानने डीएमआरसी का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
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निर्माण के दौरान की जा रही सुरक्षा की अनदेखी
साहिबाबाद। दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक डीएमआरसी ने निर्माण के दौरान सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं की है। रूट का 95 फीसदी पूरा कर लिया है। 569 गार्डर लगाए जा चुके हैं। ट्रैक बिछ चुका है। अभी सिग्नल और इलेक्ट्रिकल काम शुरू किया गया है। साथ ही स्टेशन भवनों के फिनिशिंग का काम चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि 2014 में शुरू किया गया निर्माण कार्य इस समय अंतिम चरण में है। इस दौरान सुरक्षा की व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए। मोहननगर में रोड के दोनों ओर स्टेशन भवन है। दोनों को जोड़ने के लिए पुल बनाए जाने की तैयारी चल रही है। यह काम ठीक रोड के ऊपर हो रहा है। नियम के अनुसार रोड के ऊपर हो रहे निर्माण को जाली से कवर करना चाहिए ताकि निर्माण सामग्री नीचे न गिरे।
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साहिबाबाद। गार्टर गिरने के हादसा के दौरान उत्तराखंड रोडवेज की एक बस में सवार 50 से अधिक यात्री बाल-बाल बच गए। गार्टर बस के ठीक आगे गिरा। मेट्रो स्टेशन के पास फेसिंग लगाने से सड़क संकरी हो गई है। जिसके चलते चालक ने बस धीमी कर ली थी। वरना बस के ऊपर गिरने से बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे को देख लोगों की सांसे थम गईं। वहीं हादसे के बाद करीब पांच घंटे तक लोगों को जाम से जूझना पड़ा।
जानकारी के अनुसार रविवार रात जोडने के लिए प्लेटफार्म की तरफ 50 टन से अधिक वजन का लोहे का गार्टर रखा गया था। कर्मचारियों ने लापरवाही बरतते हुए नट-बोल्ट नहीं कसे। जिस वजह से वह गिरा। हादसे के बाद करीब 10 मिनट के लिए जीटी रोड पूरी तरह से बंद हो गया। इससे जाम लगना शुरू हो गया। सप्ताह का पहला दिन होने से वाहनों का अधिक दबाव था। इसके चलते थोड़ी ही देर में मेरठ तिराहे तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। यातायात पुलिस और सिविल डिफेंस के सदस्य जाम खुलवाने में लगे रहे, मगर दोपहर में वाहनों का दबाव कम होने पर जाम खुलना शुरू हुुआ। दोपहर 3 बजे के करीब जीटी रोड पर यातायात सामान्य हुआ।
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शिक्षिका सीमा की हालत गंभीर
सीमा साहिबाबाद के एक स्कूल में शिक्षिका हैं और मुरादनगर स्थित घर से आटो से स्कूल आ रही थीं। मेट्रो का गार्डर ऑटो की छत को तोड़ता हुआ सीमा के बाएं पैर पर गिरा। इस दौरान उनका बायां पैर गार्डर से बुरी तरह कुचला गया। पैर की सर्जरी की गई है। घायल बाइक सवार गुलजार मोहननगर की फैक्ट्री में इंटरव्यू देकर लौट रहा था कि गार्टर की चपेट में आ गया। वहीं ऑटो चालक इंद्रजीत के पिता ब्रह्मपाल ने बताया कि उनका बेटा उनके घर में अकेला कमाने वाला है। अस्पताल में उसका हाल जानने डीएमआरसी का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
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निर्माण के दौरान की जा रही सुरक्षा की अनदेखी
साहिबाबाद। दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक डीएमआरसी ने निर्माण के दौरान सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं की है। रूट का 95 फीसदी पूरा कर लिया है। 569 गार्डर लगाए जा चुके हैं। ट्रैक बिछ चुका है। अभी सिग्नल और इलेक्ट्रिकल काम शुरू किया गया है। साथ ही स्टेशन भवनों के फिनिशिंग का काम चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि 2014 में शुरू किया गया निर्माण कार्य इस समय अंतिम चरण में है। इस दौरान सुरक्षा की व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए। मोहननगर में रोड के दोनों ओर स्टेशन भवन है। दोनों को जोड़ने के लिए पुल बनाए जाने की तैयारी चल रही है। यह काम ठीक रोड के ऊपर हो रहा है। नियम के अनुसार रोड के ऊपर हो रहे निर्माण को जाली से कवर करना चाहिए ताकि निर्माण सामग्री नीचे न गिरे।