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आवास विकास की संपतियों में भारी झमेला
Updated Sat, 22 Jul 2017 01:07 AM IST
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आवास विकास की संपत्तियों में भारी झमेला
आवास विकास परिषद की संपत्तियों में भारी झमेला सामने आ रहा है। कहीं पर आवासीय योजनाएं खड़ी होने के बाद भी संपत्ति राजस्व अभिलेखों में परिषद के नाम पर नहीं हैं तो कहीं पर कागजों में जमीन अधिग्रहीत हैं मगर उस पर कब्जा किसी दूसरी पार्टी का है।
पक्षी विहार से जुड़े विवाद और एंटी भूमाफिया टॉस्क फोर्स के गठन के बाद विभाग की घोर लापरवाही उजागर हुई है। दस्तावेजों से पता चलता है कि परिषद की अरबों रुपये की संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में किसी दूसरे पार्टी के नाम पर दर्ज हैं।
पसौंडा में पुष्प गार्डन का मामला सबसे बड़ा प्रमाण है। विभागीय दस्तावेजों में जमीन को 1997 में आवास विकास ने अधिग्रहीत किया है लेकिन इसी जमीन की पुष्प गार्डन के लोगों ने साल 2001 में अपने नाम पर रजिस्ट्री करा ली।
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जांच में पता चला कि आवास विकास ने उस वक्त बिल्डर को मुआवजा ही नहीं दिया। ऐसे में संपत्ति पर उसके दावे का पक्ष कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। पक्षी विहार को लेकर तमाम अधिकारी मान रहे हैं कि यह आवास विकास की सबसे बड़ी खामी है।
शासन की स्वीकृति के बाद जमीन का हस्तांतरण हुआ लेकिन बीते 15-16 वर्षों में विभाग राजस्व अभिलेखों में उसका हस्तांतरण नहीं करा पाया। तमाम योजनाओं में आवास बनाकर टैक्स वसूल रहा है लेकिन राजस्व अभिलेखों में आज भी संपत्तियां आविप के नाम पर नहीं है। पक्षी विहार की जांच के दौरान ऐसी तमाम योजनाओं के मामले जिला प्रशासन के सामने आए हैं।
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आवास विकास परिषद की संपत्तियों में भारी झमेला सामने आ रहा है। कहीं पर आवासीय योजनाएं खड़ी होने के बाद भी संपत्ति राजस्व अभिलेखों में परिषद के नाम पर नहीं हैं तो कहीं पर कागजों में जमीन अधिग्रहीत हैं मगर उस पर कब्जा किसी दूसरी पार्टी का है।
पक्षी विहार से जुड़े विवाद और एंटी भूमाफिया टॉस्क फोर्स के गठन के बाद विभाग की घोर लापरवाही उजागर हुई है। दस्तावेजों से पता चलता है कि परिषद की अरबों रुपये की संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में किसी दूसरे पार्टी के नाम पर दर्ज हैं।
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पसौंडा में पुष्प गार्डन का मामला सबसे बड़ा प्रमाण है। विभागीय दस्तावेजों में जमीन को 1997 में आवास विकास ने अधिग्रहीत किया है लेकिन इसी जमीन की पुष्प गार्डन के लोगों ने साल 2001 में अपने नाम पर रजिस्ट्री करा ली।
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जांच में पता चला कि आवास विकास ने उस वक्त बिल्डर को मुआवजा ही नहीं दिया। ऐसे में संपत्ति पर उसके दावे का पक्ष कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। पक्षी विहार को लेकर तमाम अधिकारी मान रहे हैं कि यह आवास विकास की सबसे बड़ी खामी है।
शासन की स्वीकृति के बाद जमीन का हस्तांतरण हुआ लेकिन बीते 15-16 वर्षों में विभाग राजस्व अभिलेखों में उसका हस्तांतरण नहीं करा पाया। तमाम योजनाओं में आवास बनाकर टैक्स वसूल रहा है लेकिन राजस्व अभिलेखों में आज भी संपत्तियां आविप के नाम पर नहीं है। पक्षी विहार की जांच के दौरान ऐसी तमाम योजनाओं के मामले जिला प्रशासन के सामने आए हैं।