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Ghaziabad News: सिम को ई-सिम में बदलने का झांसा दे खाते से साफ कर दिए 11.50 लाख
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गाजियाबाद। साइबर अपराधियों ने सिम कार्ड को ई-सिम में बदलने का झांसा देकर रामप्रस्थ सोसायटी के कमलदीप का बैंक खाता साफ कर दिया। शातिर ठगों ने लिंक भेजकर उनसे एप डाउनलोड कराया और आनलाइन फार्म भरवाकर उनसे बैंक खाते की जानकारी ले ली। इसके बाद एनी डेस्क की मदद से ओटीपी मालूम कर लिया। कमलदीप को इस ठगी का पता तब चला जब उनके ई-मेल पर 11.50 लाख रुपये खाते से निकल जाने की जानकारी आई।
साइबर थाने में केस दर्ज कराने आए कमलदीप सिंह ने बताया कि उन्हें जरा भी अहसास नहीं हुआ कि वह ठगी का शिकार बन रहे हैं। उनके पास 27 फरवरी को काॅल आई थी। काॅलर ने खुद के एयरटेल कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि आपका सिम कार्ड ई -सिम में बदला जाएगा।
उन्होंने पूछा कि इसके लिए क्या करना होगा। जवाब मिला, एक लिंक भेजा जा रहा है। इसे क्लिक करके फाॅर्म डाउनलोड कर लें। इस फाॅर्म को भरना है। कमलदीप का कहना है कि फाॅर्म पर एयरटेल कंपनी का लोगो लगा था, इसलिए उन्होंने भरोसा कर लिया और मांगी गई सभी जानकारी उसमें भर दीं। ये बैंक खाते और एटीएम कार्ड से संबंधित थीं। उनके मोबाइल को एनी डेस्क पर ले लिया गया। उनसे कहा गया कि 24 घंटे में सिम कार्ड अपडेट हो जाएगा।
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एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि कमलदीप के दो बैंक खातों से छह बार में 11.50 लाख की रकम निकाली गई। इस मामले में धोखाधड़ी से संपत्ति हड़पने की धारा 318(4) और गलत तरीके से संपत्ति ट्रांसफर करने की धारा 66डी में मुकदमा दर्ज कराया है। अपराधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सिम बंद होने का दिखाते हैं डर
पिछले छह महीने से साइबर अपराधी सिम कार्ड बंद होने का डर दिखाकर ठगी कर रहे हैं। लोगों को काॅल करके कहा जाता है कि आपका सिम 24 घंटे में बंद हो जाएगा। इसे अपडेट करा लीजिए।
इसके बाद सिम को अपडेट करके ई-सिम में बदलने के लिए काॅल की जाती है। अपराधी खुद को उसी कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं जिसका सिम कार्ड होता है। सिम अपडेट करने के लिए बैंक खाते की जानकारी मांगते हैं।
ये जानकारी लिंक डाउनलोड कराकर मांगी जाती है। लिंक भेजकर एनी डेस्क डाउनलोड करा दिया जाता है। इससे मोबाइल पर आने वाले ओटीपी अपराधियों को मिल जाते हैं। इनकी मदद से ही खाते से रकम ट्रांसफर की जाती है।
( जैसा एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया)
ऋण मंजूर कराकर निकाली थी रकम
सिम कार्ड अपटेड कराने के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल 14 नवंबर भी साइबर थाने में ऐसा ही केस दर्ज कराया गया था। यह ठगी पंचशील वेलिंगटन के रहने वाले हिमांशु कुमार के साथ हुई थी। लिंक भेजकर उनके खाते का नियंत्रण ठगों ने अपने हाथ में लिया। उनके खाते पर 25 लाख का आनलाइन ऋण मंजूर कराया। इसके बाद उसमें से 14.5 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लिए। उन्हें यह कहकर डराया गया था कि उनकी सिम दो दिन के अंदर बंद हो जाएगी।
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साइबर थाने में केस दर्ज कराने आए कमलदीप सिंह ने बताया कि उन्हें जरा भी अहसास नहीं हुआ कि वह ठगी का शिकार बन रहे हैं। उनके पास 27 फरवरी को काॅल आई थी। काॅलर ने खुद के एयरटेल कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि आपका सिम कार्ड ई -सिम में बदला जाएगा।
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उन्होंने पूछा कि इसके लिए क्या करना होगा। जवाब मिला, एक लिंक भेजा जा रहा है। इसे क्लिक करके फाॅर्म डाउनलोड कर लें। इस फाॅर्म को भरना है। कमलदीप का कहना है कि फाॅर्म पर एयरटेल कंपनी का लोगो लगा था, इसलिए उन्होंने भरोसा कर लिया और मांगी गई सभी जानकारी उसमें भर दीं। ये बैंक खाते और एटीएम कार्ड से संबंधित थीं। उनके मोबाइल को एनी डेस्क पर ले लिया गया। उनसे कहा गया कि 24 घंटे में सिम कार्ड अपडेट हो जाएगा।
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एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि कमलदीप के दो बैंक खातों से छह बार में 11.50 लाख की रकम निकाली गई। इस मामले में धोखाधड़ी से संपत्ति हड़पने की धारा 318(4) और गलत तरीके से संपत्ति ट्रांसफर करने की धारा 66डी में मुकदमा दर्ज कराया है। अपराधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सिम बंद होने का दिखाते हैं डर
पिछले छह महीने से साइबर अपराधी सिम कार्ड बंद होने का डर दिखाकर ठगी कर रहे हैं। लोगों को काॅल करके कहा जाता है कि आपका सिम 24 घंटे में बंद हो जाएगा। इसे अपडेट करा लीजिए।
इसके बाद सिम को अपडेट करके ई-सिम में बदलने के लिए काॅल की जाती है। अपराधी खुद को उसी कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं जिसका सिम कार्ड होता है। सिम अपडेट करने के लिए बैंक खाते की जानकारी मांगते हैं।
ये जानकारी लिंक डाउनलोड कराकर मांगी जाती है। लिंक भेजकर एनी डेस्क डाउनलोड करा दिया जाता है। इससे मोबाइल पर आने वाले ओटीपी अपराधियों को मिल जाते हैं। इनकी मदद से ही खाते से रकम ट्रांसफर की जाती है।
( जैसा एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया)
ऋण मंजूर कराकर निकाली थी रकम
सिम कार्ड अपटेड कराने के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल 14 नवंबर भी साइबर थाने में ऐसा ही केस दर्ज कराया गया था। यह ठगी पंचशील वेलिंगटन के रहने वाले हिमांशु कुमार के साथ हुई थी। लिंक भेजकर उनके खाते का नियंत्रण ठगों ने अपने हाथ में लिया। उनके खाते पर 25 लाख का आनलाइन ऋण मंजूर कराया। इसके बाद उसमें से 14.5 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लिए। उन्हें यह कहकर डराया गया था कि उनकी सिम दो दिन के अंदर बंद हो जाएगी।