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कौन से मुहूर्त में करें होलिका दहन
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शुभ मुहूर्त में होली का दहन मनोवांछित फल देता है
गढ़मुक्तेश्वर। होली का दहन शुभ मुहूर्त में करने वाले पापों से मुक्त होकर मनोवांछित फल पाते हैं, जबकि हरे भरे पेड़ काटकर होली पर डालने वालों से ईश्वर सदैव रुष्ट रहता है।
इस बार होली का दहन 20 मार्च अर्थात बुधवार की रात में होना है। भद्रकाली मंदिर के पुजारी रमाशंकर तिवारी और ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद सेनरा ने बताया कि इस बार फाल्गुनी पूर्णिमा का योग बुधवार की सुबह 10.44 बजे प्रारंभ होकर बृहस्पतिवार की सुबह 7.11 बजे तक रहेगा, जिसके बाद प्रतिपदा का आगमन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि होली का पूजन बुधवार की दोपहर 12.25 बजे प्रारंभ होगा, जबकि होली का दहन रात में 8.58 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि एक मार्च की रात में 7.39 बजे भद्राकाल समाप्त होने पर 7.40 से लेकर रात साढ़े 9 बजे तक होली का दहन करना सर्वोत्तम रहेगा। वहीं वास्तुविद संजय कुमार गोयल का कहना है धार्मिक आस्था की आड़ में किसी भी प्रकार का हुड़दंग करना सरासर गलत है। होली दहन वाले स्थान पर कोई भी हरा भरा पेड़ काटकर न डालें, क्योंकि ऐसा करने वालों पर कभी भी ईश्वर की कृपा नहीं हो पाती है।
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गढ़मुक्तेश्वर। होली का दहन शुभ मुहूर्त में करने वाले पापों से मुक्त होकर मनोवांछित फल पाते हैं, जबकि हरे भरे पेड़ काटकर होली पर डालने वालों से ईश्वर सदैव रुष्ट रहता है।
इस बार होली का दहन 20 मार्च अर्थात बुधवार की रात में होना है। भद्रकाली मंदिर के पुजारी रमाशंकर तिवारी और ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद सेनरा ने बताया कि इस बार फाल्गुनी पूर्णिमा का योग बुधवार की सुबह 10.44 बजे प्रारंभ होकर बृहस्पतिवार की सुबह 7.11 बजे तक रहेगा, जिसके बाद प्रतिपदा का आगमन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि होली का पूजन बुधवार की दोपहर 12.25 बजे प्रारंभ होगा, जबकि होली का दहन रात में 8.58 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि एक मार्च की रात में 7.39 बजे भद्राकाल समाप्त होने पर 7.40 से लेकर रात साढ़े 9 बजे तक होली का दहन करना सर्वोत्तम रहेगा। वहीं वास्तुविद संजय कुमार गोयल का कहना है धार्मिक आस्था की आड़ में किसी भी प्रकार का हुड़दंग करना सरासर गलत है। होली दहन वाले स्थान पर कोई भी हरा भरा पेड़ काटकर न डालें, क्योंकि ऐसा करने वालों पर कभी भी ईश्वर की कृपा नहीं हो पाती है।
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