गाजियाबाद के पुराना रेलवे स्टेशन के पास कोटगांव रेलवे फाटक पर मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया। बंद फाटक से गुजर रहे लोग अचानक दो ट्रेनों के बीच आ गए। ईएमयू की चपेट में आकर एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि महिला समेत सात लोग घायल हो गए। तीन को दिल्ली रेफर किया गया। उधर, दिल्ली रेलवे मंडल के अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं। हादसा सुबह करीब आठ बजे दोनों ओर के ट्रैक पर एक साथ ट्रेनों के आने के कारण हुआ। फाटक के पास दोनों ट्रैक के बीच की दूरी बेहद कम है। रेलवे ट्रैक को पार कर रहे लोग दिल्ली से अलीगढ़ रूट पर जा रही कालका एक्सप्रेस को देखकर रुक गए।
यूपीः फाटक पार कर रहे थे दर्जनों लोग, अचानक आ गईं दो ट्रेनें, फिर जो हुआ वो था दर्दनाक
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उधर, लोगों ने अचानक से दनकौर से शकूरबस्ती (दिल्ली) की ओर जाने वाली ईएमयू ट्रेन (64109) को आते देखा तो दोनों ट्रेन के बीच खड़े हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक स्कूटी सवार भी दोनों ट्रैक के बीच में रुक गया, जबकि वहां पर जगह कम थी। ऐसे में सबसे पहले स्कूटी सवार ईएमयू की चपेट में आया। स्कूटी के घिसटने पर ट्रैक के पास खड़े अन्य लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और वे भी ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन गुजरने पर लोग घायलों की मदद को दौड़े तो देखा कि एक व्यक्ति की मौत हो चुकी थी। पुलिस के अनुसार, देर रात तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। जबकि बिहारीपुरा निवासी लकी भंडारी (17) के दोनों हाथ कट गए थे। लकी, मोहम्मद मेंहदी (52), कालू (21) को दिल्ली रेफर किया गया। अमित, सूर्यकांत त्यागी, निखिल सैनी और एक महिला को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
बक्सर के डीएम ने यहीं आकर की थी खुदकुशी, तब आया था चर्चा में
जिले का सबसे बड़ा एक्सीडेंटल प्वाइंट बन चुके कोट गांव फाटक के लिए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया हुआ है। यहां सबसे अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। बंद फाटक के बावजूद लोग अपनी जान खतरे में डालते हैं। रोजाना एक हजार से अधिक साइकिल और बाइक सवार लोग फाटक को अवैध रूप से पार करते हैं। करीब 35 साल पहले रेलवे प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने बढ़ते हुए रेल हादसों के चलते कोट गांव फाटक को हमेशा के लिए बंद कर दिया था। इसके चलते विजय नगर क्षेत्र की आवाजाही पर जरूर असर पड़ा था, लेकिन इससे हादसों में कमी आई। इसके बावजूद आज तक यहां से आवागमन जारी है। स्थानीय निवासी सुधीर सिंह का कहना है कि हर सप्ताह कोई न कोई व्यक्ति यहां रेल हादसे में अपनी जान दे देता है। इससे पहले यहां बक्सर के डीएम ने भी आकर सुसाइड किया था, जिसके बाद देशभर में कोटगांव फाटक को लेकर चर्चाएं हुईं। इस बीच सरकार ने तय किया कि कोटगांव फाटक पर आरओबी जल्द से जल्द बनाया जाए, ताकि और जानें न जाएं।
पड़ा रहा शव, ढाई घंटे सीमा विवाद में उलझी पुलिस-जीआरपी
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा सुबह आठ बजे हुआ था, जिसके बाद लोगों ने पुलिस और जीआरपी को सूचना दी थी। सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची थीं। जीआरपी का कहना था कि हादसा आउटर के बाहर हुआ है, तो यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है, स्थानीय पुलिस का है। जब मामला पुलिस का हुआ, तो कोतवाली और विजयनगर पुलिस सीमा विवाद में फंस गईं। हादसे के ढाई घंटे बाद विजयनगर पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
टेंपो से भेजा शव, नहीं मंगाई एंबुलेंस
लोगों का कहना है कि दर्दनाक हादसा होने के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायलों को पुलिस ने अपनी गाड़ी से जिला अस्पताल तक पहुंचाया। वहीं शव को एक टेंपो में पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जबकि शव को पोस्टमार्टम तक भेजने के लिए भी एंबुलेंस का प्रयोग करने का नियम है।