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पंचतत्व में विलीन हुए कवि विष्णु खरे, बड़ी संख्या में पहुंचे लेखक और पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

Thu, 20 Sep 2018 07:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 20 Sep 2018 07:31 PM IST
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Funeral of Hindi poet Vishnu Khare in Delhi
Vishnu khare - फोटो : Amar Ujala

हिन्दी के वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार विष्णु खरे का बृहस्पतिवार को राजधानी के निगमबोध घाट के सीएनजी शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। खरे का बुधवार को एक सरकारी अस्पताल में 78 वर्ष की आयु में मस्तिष्काघात के कारण निधन हो गया था। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे।

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राजधानी के निगमबोध घाट के सीएनजी शवदाह गृह में बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर उनका पुत्र अप्रतिम एवं परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे।
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वरिष्ठ कहानीकार महेश दर्पण ने बताया कि खरे ने लकड़ियों पर चिता जलाने के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में अपने जीवनकाल में कई बार चिंता जतायी थी। उनके परिजनों ने उनके विचारों का सम्मान करते हुए उनका अंतिम संस्कार सीएनजी शवदाह गृह में किया।
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खरे के अंतिम संस्कार के समय साहित्यकार अशोक वाजपेयी, सौमित्र मोहन, गिरधर राठी, प्रयाग शुक्ल, मंगलेश डबराल, विष्णु नागर, संजय चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी सहित बड़ी संख्या में लेखक, पत्रकार एवं विभिन्न गणमान्य लोग एकत्रित हुए थे। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

विष्णु खरे का जन्म मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में 1940 में हुआ था। अंग्रेजी से एमए करने के बाद बतौर हिंदी पत्रकार उन्होंने करिअर की शुरुआत की। उन्होंने हिंदी के कई समाचार पत्रों में काम किया। उन्हें नाइट ऑफ द व्हाइट रोज, हिंदी अकादमी सम्मान, रघुवीर सहाय सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान आदि से नवाजा गया था।


खरे की पहली कृति अंग्रेजी के चर्चित कवि टी एस इलियट की कविताओं का हिन्दी में अनुवाद , ‘मरु प्रदेश और अन्य कविताएं’ शीर्षक से आया था। खरे हिन्दी एवं अंग्रेजी के अलावा जर्मन भाषा के भी विद्वान थे और उन्होंने कई भारतीय कविताओं का जर्मन में अनुवाद किया था। 
खरे हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष भी थे।

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