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लॉटरी जीतने का झांसा देकर 90 लाख ठगे, पीड़ित से अलग-अलग खातों में डलवाए रुपये
Mon, 01 Apr 2019 05:25 AM IST
पूजा त्रिपाठी
शुजात आलम, अमर उजाला, दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 01 Apr 2019 05:25 AM IST
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फाइल फोटो
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एसएमएस या ईमेल से किसी भी प्रकार की लॉटरी जीतने का संदेश आए तो सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा न हो कि लालच के फेर में पड़ कर अपना सब कुछ गंवा बैठें। न्यू अशोक नगर स्थित वसुंधरा एंक्लेव इलाके के 75 वर्षीय बुजुर्ग सतीश कुमार पाहवा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।
उन्हें ईमेल से सैमसंग लॉटरी जीतने का मैसेज मिला और वह ठगों के झांसे में आकर 90 लाख रुपये गंवा बैठे। फिर भी जब उन्हें लॉटरी की रकम नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस के मुताबिक सतीश कुमार कैपिटल अपार्टमेंट में रहते हैं और सरकारी विभाग में ऊंचे पद से सेवानिवृत्त हैं। इनका बेटा अमेरिका में रहता है और एक बेटा दिल्ली में इनके साथ रहता है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 मार्च, 2017 को उन्हें एक ईमेल मिला। उसमें पांच लाख ब्रिटिश पाउंड (करीब 4.50 करोड़ रुपये) की इनामी राशि की लॉटरी जीतने का दावा किया गया। सतीश से कुछ जानकारी मांगी गई, जो उन्होंने ई-मेल करने वालों को दे दी।
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उन्हें ईमेल से सैमसंग लॉटरी जीतने का मैसेज मिला और वह ठगों के झांसे में आकर 90 लाख रुपये गंवा बैठे। फिर भी जब उन्हें लॉटरी की रकम नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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पुलिस के मुताबिक सतीश कुमार कैपिटल अपार्टमेंट में रहते हैं और सरकारी विभाग में ऊंचे पद से सेवानिवृत्त हैं। इनका बेटा अमेरिका में रहता है और एक बेटा दिल्ली में इनके साथ रहता है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 मार्च, 2017 को उन्हें एक ईमेल मिला। उसमें पांच लाख ब्रिटिश पाउंड (करीब 4.50 करोड़ रुपये) की इनामी राशि की लॉटरी जीतने का दावा किया गया। सतीश से कुछ जानकारी मांगी गई, जो उन्होंने ई-मेल करने वालों को दे दी।
ईमेल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से आने का दावा कर सतीश को किसी डॉ. एंड्रयू स्मिथ का नंबर देकर उनसे संपर्क करने को कहा गया। सतीश ने एंड्रयू से बातचीत की तो उसने ऑनलाइन आईडी बनवाकर उनसे 22,499 रुपयों की मांग की।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए रुपये
पीड़ित से अलग-अलग खातों में कभी दो लाख, कभी तीन लाख कभी दस-दस लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसी के गिरोह के किसी सदस्य ने शिवराज नाम से आरबीआई अधिकारी बनकर उनके खाते में रुपये आने की बात कर इनकम टैक्स व अन्य टैक्स के नाम पर मोटी रकम खातों में ट्रांसफर करवा ली। करीब 14 माह बाद सतीश को समझ आया कि उनके साथ ठगी हुई है।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए रुपये
पीड़ित से अलग-अलग खातों में कभी दो लाख, कभी तीन लाख कभी दस-दस लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसी के गिरोह के किसी सदस्य ने शिवराज नाम से आरबीआई अधिकारी बनकर उनके खाते में रुपये आने की बात कर इनकम टैक्स व अन्य टैक्स के नाम पर मोटी रकम खातों में ट्रांसफर करवा ली। करीब 14 माह बाद सतीश को समझ आया कि उनके साथ ठगी हुई है।