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Delhi: कई कंपनियों को पहुंचाया करोड़ों का फायदा, स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी के बाद तीन अन्य को भी भेजा नोटिस

Wed, 17 Apr 2024 07:54 AM IST
विजय पुंडीर धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 17 Apr 2024 07:54 AM IST
सार

सूत्रों ने बताया कि डॉ. नितिन कुमार, उर्मिला और एसके वर्मा एक ही परिवार की कई कंपनियों के पक्ष में निविदाओं के प्रबंधन में सबसे आगे थे। उपकरणों की खरीद के लिए कई बार निविदाओं को रद्द भी किया गया था।

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Fraud in the purchase of medical equipment during the Corona period
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

कोरोना काल के दौरान मेडिकल उपकरणों की खरीद मामले में करीब 225 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें एक ही परिवार की कई कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है। इस मामले में सतर्कता निदेशालय ने स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी डॉ. आरएन दास के बाद तीन अन्य लोगों को भी कारण बताओ नोटिस भेजा है। यह तीन लोग डॉ. नितिन कुमार, उर्मिला और एसके वर्मा मेडिकल उपकरण खरीद के लिए बनी तीन समितियों के सदस्य थे।

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निदेशालय ने सभी आरोपियों को नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर यह माना जाएगा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है और मामले को मौजूदा नियमों के अनुसार बिना किसी नोटिस के आगे बढ़ाया जाएगा।
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सूत्रों ने बताया कि डॉ. नितिन कुमार, उर्मिला और एसके वर्मा एक ही परिवार की कई कंपनियों के पक्ष में निविदाओं के प्रबंधन में सबसे आगे थे। उपकरणों की खरीद के लिए कई बार निविदाओं को रद्द भी किया गया था। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि बाद में आई निविदाओं को संदीप गुप्ता व उनके परिवार और चेतन मखीजा से संबंधित कंपनियों को दिया गया। जबकि बाकी कंपनियां निविदा से बाहर कर दी गईं।
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यह भी पता चला है कि फेक दवाओं के मामले में सीबीआई जांच के लिए भेजे गए मामले में संदीप गुप्ता के बेटे मुदित गुप्ता और भतीजे शुभम गुप्ता की कंपनी तिरुपति मेडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड भी है। नोटिस में कहा गया है कि संदीप गुप्ता के परिवार से जुड़ी कंपनियों ने 115 करोड़ रुपये और चेतन मखीजा के परिवार से जुड़ी कंपनियों ने 120 करोड़ रुपये कमाएं।


कोरोना संकट का उठाया फायदा 
नोटिस में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने एक ही परिवार की निजी कंपनियों को समृद्ध करने के लिए कोरोना संकट का इस्तेमाल किया और जानबूझकर कंपनियों के बीच गुटबंदी की अनुमति दी। मेडिकल उपकरण की खरीद के लिए बनी समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों ने उपकरणों के मूल्य, अनुभव के लिए ऐसे प्रमाणपत्रों के अभाव में कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) किट की खरीद का हवाला देते हुए नोटिस में दावा किया गया कि किट की दर 459.20 रुपये प्रति यूनिट बताई गई थी, जो शुरुआती यूनिट कीमत से 9.20 रुपये अधिक थी। नोटिस के अनुसार यह देखा गया है कि आरएटी किट की दर में हर महीने इतनी गिरावट आई कि छह महीने की अवधि के भीतर आरएटी किट 31.50 रुपये प्रति यूनिट की दर पर उपलब्ध थी।

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