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फाइलों में फर्जीवाड़ा: सस्पेंशन के डर से बाबू हुए प्रेजेंट
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 03 Aug 2014 01:25 PM IST
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गाजियाबाद में फर्जीवाड़े के शक में शुरू हुई 58 फाइलों की जांच में संदेह के घेरे में आए बाबू ने शनिवार को जीडीए में आमद दर्ज कराई। जीडीए पहुंचे बाबू ने अधिकारियों के सामने यह स्वीकार किया कि इनमें से अधिकतर फाइलों में हुए साइन उसके हैं।
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ऐसे में यदि फाइलों में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके लिए वह जिम्मेदार होगा। फिलहाल जीडीए अधिकारियों ने फाइलों की जांच तेज कर दी है। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित बाबू के खिलाफ कार्रवाई तय है।
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दरअसल शुक्रवार को अधिकारियों द्वारा बार-बार बुलाए जाने के बावजूद यह बाबू जीडीए नहीं पहुंचा था। इस पर जीडीए ओएसडी ने बाबू को पेश होने का नोटिस जारी करते हुए सस्पेंड करने की चेतावनी जारी की थी। इस बाबू के खिलाफ उत्तराखंड सीएम हरीश रावत के प्लॉट को अवैध तरीके से बेचने की कोशिश में एफआईआर भी दर्ज हुई है।
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जीडीए ओएसडी डीपी सिंह ने बताया कि संदेह के घेरे में आए बाबू ने शनिवार को आमद दर्ज करा दी है। बाबू ने फाइलों में अपने ही साइन होने की पुष्टि की है। सभी 58 फाइलों की जांच जारी है।
डुप्लीकेट फाइलों से खिलाड़ी बाबुओं की तलाश
जीडीए ने उन बाबुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है, जिनकी कस्टडी से फाइलें गायब हुई हैं।
तत्कालीन अधिकारियों की भी भूमिका की जांच की जाएगी और उनके खिलाफ भी एफआईआर होगी। फिलहाल जीडीए डुप्लीकेट फाइलों से काम चला रहा है। अधिकतर फाइलों की डुप्लीकेट कॉपियां तैयार की गई हैं।
दरअसल, जीडीए में संपत्तियों की फाइलें संबंधित जोन के बाबुओं के पास रहती हैं। चार्ज बदलने पर बाबू इन फाइलों को नवनियुक्त बाबू को सौंपते हैं। फाइलों को सौंपने के दौरान बाबू खेल कर जाते हैं। बाबू आंकड़ों में खेलकर विवादित या फर्जीवाड़े की फाइल ही गायब कर देते हैं।
पूछताछ में पता लगता है कि पूर्व में रहे बाबू ने यह गड़बड़ी की है। पूर्व में रहा बाबू किसी अन्य बाबू या अधिकारी का नाम लेता हैं। करीब 11 हजार फाइलें गायब चल रही हैं। अब अधिकारी यह जानकारी जुटाएंगे कि अंतिम बार यह फाइल किस बाबू के पास थी। उस पर एफआईआर होगी।