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मौत की आहट सुन निर्भया के दोषियों ने जेल में खाना-पीना किया कम, कड़े पहरे में काट रहे दिन

Fri, 13 Dec 2019 11:16 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Fri, 13 Dec 2019 11:16 PM IST
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Four convicts of Nirbhaya Case reduced food intake
- फोटो : Social Media

राजधानी दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया दुष्कर्म की घटना ने देश को हिला कर रख दिया था। इस मामले में आखिरकार इन चारों दोषियों को जल्द फांसी दी जा सकती है। इधर, जेल के सूत्रों का कहना है कि निर्भया दुष्कर्म मामले के चारों दोषियों ने खाना-पीना कम दिया है। साथ ही वे किसी तरह से अपने आप को जोखिम न पहुंचाएं, इसके लिए उनके देखरेख में कड़ी सुरक्षा की गई है।   

Four convicts of Nirbhaya Case reduced food intake
- फोटो : Social Media

खामोशी में दी जाएगी फांसी

सुबह की खामोशी में निर्भया के दोषियों को फांसी दी जाएगी। जेल मैनुअल के मुताबिक सुबह सूर्योदय के बाद ही फांसी देने का रिवाज है। आमतौर पर गर्मियों में सुबह छह बजे और सर्दियों में सात बजे फांसी दी जाती है।   

Four convicts of Nirbhaya Case reduced food intake
- फोटो : सोशल मीडिया

फांसी से पहले नहलाया जाता है

फांसी घर लाने से पहले दोषी को सुबह पांच बजे ही नहलाया जाता है। उसके बाद उसे नए कपड़े पहनाए जाते हैं। फिर उसे चाय पीने के लिए दिया जाता है। साथ ही उनसे नाश्ता के बारे में पूछा जाता है। अगर कोई नाश्ता करना चाहता है तो उसे नाश्ता दिया जाता है। उसके बाद मजिस्ट्रेट दोषी से उनकी आखिरी इच्छा के बारे में पूछते हैं।  

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Four convicts of Nirbhaya Case reduced food intake
Nirbhaya - फोटो : अमर उजाला

इतने लोगों के सामने दी जाती है फांसी 

फांसी देने के समय फांसी घर में एकदम खामोशी होती है। जेल मैन्यूअल के अनुसार इस दौरान एक डाक्टर, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, जेलर, डिप्टी जेलर और करीब 12 पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं। यहां सारी कार्रवाई इशारों में होती है। ब्लैक वारंट में तय समय पर दोषी को वहां लाकर जल्लाद उसके गर्दन में फंदा डाल देता है।  

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Four convicts of Nirbhaya Case reduced food intake
nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया

पहले रूमाल गिरेगा फिर लिवर खिंचेगा 

फिर जेलर के रूमाल गिराकर इशारा करने पर जल्लाद या फिर जेल का कर्मचारी लिवर को खींच देता है। लिवर खींचते ही तख्त खुल जाता है और फंदे पर लटका दोषी नीचे चला जाता है। कुछ देर बाद डाक्टर वहां पहुंचकर उसकी जांच करता है। धड़कन बंद होने की पुष्टि होने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। उसके बाद उसे फंदा से नीचे उतार लिया जाता है। इस दौरान जेल में कोई काम नहीं होता है। फांसी लगने के बाद ही जेल के दरवाजे को खोला जाता है।  

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