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नोएडा: पूर्व डीएसपी भदौरिया पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज

Mon, 20 May 2019 09:00 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: vivek shukla Updated Mon, 20 May 2019 09:00 AM IST
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Former DSP filed case over income in noida
पूर्व डीएसपी भदौरिया की कोठी - फोटो : अमर उजाला

नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे सेवानिवृत्त डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया के खिलाफ थाना सेक्टर-49 में आय के अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर की गई है। एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर अरविंद कुमार की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

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इसमें आय से 1178 फीसदी अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, मूलरूप से इटावा निवासी भदौरिया ने 30 मई 1981 को यूपी पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर ज्वाइनिंग की थी। साल 2003 तक वह दूसरे जिलों में तैनात रहे और 2003 में ही नोएडा प्राधिकरण में तैनाती प्राप्त कर ली।
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बताया जाता है कि तत्कालीन सरकार के दिग्गज नेता के संरक्षण में भदौरिया की 2003 से संपत्ति में अचानक बढ़ोतरी होती चली गई और फिर इन्हीं कारणों से चर्चा में आ गए। आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो को मिली जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई।
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1 जनवरी 2003 से 29 मई 2017 तक भदौरिया की शुद्ध आय वेतन, भर्ती, एरियर की मिलाकर 8,32,324 रुपये थी, लेकिन इस बीच भदौरिया ने प्लॉट खरीदने आदि पर 10,63,76,352 रुपये खर्च किए। इससे सीधे 9,80,53,328 रुपये की संपत्ति अधिक पाई गई, जो उनकी आय से 1178 फीसदी अधिक निकली।

उनके खिलाफ कई बेनामी संपत्ति होने की भी आशंका ब्यूरो ने व्यक्त की है। जांच के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर सवाल किए गए, लेकिन भदौरिया जवाब नहीं दे पाए। आला अधिकारियों के निर्देश पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कराने का निर्णय लिया गया। भ्रष्टाचार की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जिलेभर में उनको लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

उनके आलीशान मकान से लेकर प्राधिकरण में तैनाती के दौरान धाक को लेकर भी लोग आपस में बात करते दिखे। उन्होंने प्राधिकरण से रिटायर होने से चंद माह पहले ही वीआरएस के लिए अर्जी दी और आला अधिकारियों ने उसे अविलंब ही स्वीकृत कर दिया। उन दिनों सपा सरकार थी और उसी के कारण वीआरएस की प्रक्रिया भी पूरी हो सकी।

मेरे खिलाफ झूठी शिकायत पुलिस महानिदेशक से की गई थी। जांच में भ्रष्टाचार निवारण संगठन को मेरे खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला था तो मेरे आवास का मूल्यांकन मौजूदा रेट पर किया गया जो गलत है। मैं इस संबंध में न्यायालय की शरण लूंगा।- हर्षवर्धन सिंह भदौरिया
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