{"_id":"69d998bfd9968052eb0e7cb6","slug":"forest-fire-new-sops-implemented-to-combat-wildfires-monitoring-to-be-conducted-2026-04-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Forest Fire: वनाग्नि से निपटने के लिए नई एसओपी लागू, होगी निगरानी; अब आग लगने से पहले की तैयारी पर समान जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Forest Fire: वनाग्नि से निपटने के लिए नई एसओपी लागू, होगी निगरानी; अब आग लगने से पहले की तैयारी पर समान जोर
Sat, 11 Apr 2026 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 11 Apr 2026 06:11 AM IST
सार
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वनाग्नि को रोकने और उस पर तेजी से काबू पाने के लिए नई रणनीति लागू की है। नई व्यवस्था में आग लगने से पहले तैयारी, आग के दौरान त्वरित कार्रवाई और बाद में पुनर्वास तीनों पर बराबर जोर दिया गया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
देश के जंगल हर साल गर्मियों में आग की चपेट में आकर जान-माल का भारी नुकसान झेलते हैं लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वनाग्नि को रोकने और उस पर तेजी से काबू पाने के लिए नई रणनीति लागू की है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) अतिरिक्त हलफनामा दायर कर नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) सौंपी गई है। नई व्यवस्था में आग लगने से पहले तैयारी, आग के दौरान त्वरित कार्रवाई और बाद में पुनर्वास तीनों पर बराबर जोर दिया गया है।
विज्ञापन
इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) के सिल्विकल्चर एंड फॉरेस्ट मैनेजमेंट डिवीजन ने एसओपी तैयार की है। इसमें उष्णकटिबंधीय अर्ध-सदाबहार वन और उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन के बारे में बताया गया है। मंत्रालय ने ट्रॉपिकल सेमी-एवरग्रीन जंगलों में आग रोकने, बुझाने और बाद में सुधार के लिए एसओपी जारी की है। इसका सबसे अहम हिस्सा प्री-फायर सीजन की तैयारी है।
विज्ञापन
यानी आग लगने से पहले ही उसे रोकने की पूरी रणनीति तैयार की जाएगी। इसके तहत हर जंगल क्षेत्र में आग-प्रवण इलाकों की पहचान की जाएगी और उनका नक्शा तैयार होगा। इसके अलावा, जंगलों में 3 से 12 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाई जाएगी, ताकि आग फैलने से रोकी जा सके। साथ ही, सूखी पत्तियों और टहनियों को पहले ही नियंत्रित तरीके से जलाकर खत्म किया जाएगा, जिससे आग को फैलने के लिए ईंधन न मिले।
पानी की उपलब्धता होगी सुनिश्चित
नई एसओपी के अनुसार, पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए छोटे बांध, गड्ढे और जल संरचनाएं बनाई जाएंगी। लैंटाना जैसी झाड़ियों को हटाया जाएगा, जो आग को तेजी से फैलाती हैं। यह नई एसओपी देश के उन जंगलों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, जो हमेशा हरे-भरे रहते हैं, लेकिन गर्मी और सूखे मौसम में आग की चपेट में आ जाते हैं।
देश के कुल जंगलों का करीब 13.79 फीसदी हिस्सा ऐसे ही ट्रॉपिकल सेमी-एवरग्रीन जंगलों का है, जो उत्तर-पूर्व, पश्चिमी घाट और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में फैले हुए हैं। देश में हर साल बड़ी संख्या में जंगल आग की चपेट में आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 36 फीसदी से ज्यादा जंगल किसी न किसी स्तर पर आग से प्रभावित होते हैं। इनमें से कुछ इलाके बेहद संवेदनशील हैं।