नोटबंदी का साइड इफेक्ट: विदेशी छात्र नहीं दे पा रहे कॉलेज की फीस
विदेशी मुद्रा बदलने के नाम पर विदेशी छात्रा को ठगा
- जिले में पढ़ने वाले विदेशी छात्र परेशान, नहीं दे पा रहे कॉलेज की फीस
- टीचर और भारतीय छात्रों ने विदेशी छात्रों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
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विस्तार
पुराने नोट बदलने के लिए लोग ठगी करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। यहां तक की भारत में विदेशों से पढ़ने आई छात्राओं को भी नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसी ही एक घटना सामने आई है। जिसमें कैमरून से ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में पढ़ने आई एलीन से जगत फार्म हाउस में कुछ लड़कों ने विदेशी मुद्रा लेकर पुराने नोट थमा दिए ।
जिस वजह से वो परीक्षा की फीस तक नहीं दे पाई। यूनिवर्सिटी प्रबंधक को एलीन के साथ हुई घटना का पता चला तो उन्होंने बिना परीक्षा फीस दिए फार्म भरवाया। हालांकि ऐसे भी भारतीय छात्र हैं जो इस दौरान विदेश से भारत में पढ़ने आए छात्रों की मदद कर रहे हैं।
एलीन ने बताया कि वो जगत फॉर्म में विदेशी मुद्रा बदलवाने के लिए गई थी। उस दौरान कुछ लड़कों ने पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट दे दिए। एलीन ने बताया कि मुझे इन नोटों के बंद होने की जानकारी नहीं दी। इस तरह का धोखा मेरे साथ पहली बार हुआ है।
यूनिवर्सिटी में आने के बाद पता चला कि ये नोट नहीं चल रहे हैं। इस वजह से मैं परीक्षा फीस भी नहीं दे पाई। अब हालत ये हो गई है कि मन मुताबिक खाना - पी भी नहीं पा रहे हैं। बड़ी मुश्किल में जीवन चल रहा है।
भारतीय दोस्तों ने बढ़ाया हाथा
मैक्सिको की छात्रा स्टीवा ने बताया कि मैं मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलवाने के लिए बैंक गई थी। लेकिन बैंक ने भी मुद्रा बदलने से इनकार कर दिया है। कॉलेज का एटीएम भी फेल हो गया है। बड़ी मुश्किल से जीवन जल रहा है। मार्केट में जाकर भी विदेशी मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलवाने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो पाया। अब तो बहुत परेशानी होने लगी है। हालांकि मेरे भारतीय दोस्त मेरी बहुत मदद कर रहे हैं।
टीचर्स से लेने पड़े उधार
भूटान की छात्रा कर्मा यांगूम ने बताया कि पुराने नोट बंद होने की वजह से रोजाना के काम नहीं हो पा रहे हैं। बैंक में पैसे होने के बावजूद भी मैं अपना खर्च नहीं चला पा रही हूं। हालत ये हो गई है कि मुझे अपने टीचर से खर्च के लिए पैसे लेने पड़े हैं। कुछ दोस्तों ने भी मेरी मदद दी है। अगर टीचर और दोस्त न होते तो शायद मेरे लिए इस समय यहां रहना मुश्किल हो जाता।
कैसे लाऊं लैब का सामान
मणिपुर की सुजाता शारदा यूनिवर्सिटी में डेंटल की छात्रा है। सुजाता ने बताया कि इन प्रैक्टीकल चल रहे हैं। इसके लिए सामान की जरूरत है। लेकिन मैं सामान ही नहीं खरीद पा रही हूं। रोजाना के काम में भी मुश्किल आ रही है। अब घर जाने पर विचार कर रही हूं। जब तक पैसे की किल्लत दूर नहीं हो जाती तब तक घर रहूंगी।