4 लाख में नाबालिग को खरीद, बना लिया बहू
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एक गांव के एक परिवार ने सोमवार देर रात बिचौलिए को चार लाख रुपये देकर सिकंद्राबाद क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की से अपने लड़के की शादी कराकर उसे बहू बना लिया। पुलिस ने मामले से अनभिज्ञता जाहिर की है।
जानकारी के मुताबिक, दनकौर के एक गांव में किराने की दुकान करने वाले एक 25 वर्षीय युवक की शादी परिजनों ने गांव के ही एक बिचौलिए की मदद से सिकंद्राबाद क्षेत्र में तय की थी।
बिचौलिए ने परिजनों से चार लाख रुपये शादी कराने के एवज में लिए थे। जिस लड़की से शादी तय की गई थी, उसकी उम्र करीब 12 वर्ष है।
सिकंद्राबाद क्षेत्र की लड़की बनी बहू
तीन दिन पहले गांव में युवक की सगाई के समय लड़की के भाई ने दोनों की उम्र को देखकर शादी से इनकार कर दिया। वह पुलिस को इस मामले की सूचना देने की धमकी देकर वहां से चला गया था।
बताया जाता है कि बारात मंगलवार को जानी थी, लेकिन युवक के परिजनों और बिचौलिए ने पुलिस के भय से लड़की के परिजनों को विश्वास में लेकर सोमवार देर रात ही दनकौर बुला लिया।
रात को ही गांव के नजदीक एक मंदिर पर मौजूद पुजारी की मदद से उसकी शादी कर दी गई। वर पक्ष शादी की सारी रस्में कराने के बाद नाबालिग को मंगलवार सुबह अपने घर की बहू बनाकर घर ले आया।
‘शादी नहीं करनी, अभी मुझे पढ़ना है’
परिजनों ने पुलिस से लेकर किसी ग्रामीण को भी इसकी भनक तक नही लगने दी। दनकौर एसओ प्रवीण यादव का कहना है कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि नाबालिग लड़की से शादी करने का कोई मामला सामने आता है तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरे मामले में 14 साल की सरिता शादी नहीं करना चाहती।
अभी शादी नहीं केवल पढ़ाई करना चाहती है 14 वर्ष की सरिता (बदला हुआ नाम)। वह पांचवीं कक्षा तक पढ़ी है और परिजन उसकी शादी कराने जा रहे थे। लुक्सर गांव में मंगलवार को चाइल्डलाइन संस्था ने इकोटेक-1 पुलिस की सहायता से मौके पर पहुंचकर नाबालिग की शादी रुकवा दी।
मंगलवार सुबह चाइल्डलाइन संस्था की सदस्य सीमा सिंह को जानकारी मिली कि लुक्सर गांव में दो बहनों की शादी है, जिसमें से एक 14 वर्षीय नाबालिग है। परिजन 18 वर्षीय बड़ी बहन के साथ ही एक ही मंडप में 14 वर्षीय किशोरी की भी शादी करा रहे थे।
गांव पहुंचकर पता चला किशोरी नाबालिग है
गांव पहुंचकर जानकारी की तो एक किशोरी के नाबालिग होने का पता चला। गांव मुरादगढ़ी, रबूपुरा से दो अलग-अलग घरों से दोनों बहनों की शादी के लिए बारात आई थी।
शुरुआत में कुछ विरोध के बाद समझाने पर परिजन छोटी बेटी सरिता की शादी न कराने के लिए मान गए। वहीं, बड़ी बेटी (18 वर्ष) की शादी करा दी गई। लड़कियों के पिता हैं पर माता गुजर चुकी हैं।
नाबालिग किशोरी से बातचीत पर उसने बताया कि वह इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहती है। वह पढ़ना चाहती है और अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। उसकी भी कुछ ख्वाहिशें हैं, जिसे वह पूरा करना चाहती है।