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सूरत-ए-हालः बाढ़ पीड़ितों को दो वक्त का खाना तक नहीं मिल रहा
Wed, 28 Aug 2019 05:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 28 Aug 2019 05:26 AM IST
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flood victims
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले एक सप्ताह से यमुना में जलस्तर बढ़ने के कारण खादर इलाके के बाढ़ पीड़ित अपना जीवन-बसर सरकारी टेंट में कर रहे हैं। दिल्ली सरकार की तरफ से उनके लिए टेंट लगाए गए हैं, लेकिन इस टेंट में रहने वाले लोग अपनी बस्ती की झुग्गी झोपड़ी से भी बदतर स्थिति में हैं। आईटीओ के किनारे सरकार की तरफ से लगाए गए टेंटों में जाकर अमर उजाला ने पड़ताल की, तो कई समस्याएं सामने आईं।
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यमुना में बढ़ते जलस्तर को ध्यान में रख खादर इलाकों में टेंट का इंतजाम सरकार की तरफ से किया गया है। छोटे से टेंट में परिवार खाट पर दिन गुजार रहे हैं। सड़क पर टेंट के कारण गर्मी से भी बेहाल हैं। अपने घर-बार को छोड़कर टेंट में गुजारा कर रहे लोगों की परेशानियां भी कम नहीं हैं।
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मूलचंद बस्ती के एक परिवार का कहना था कि टेंट का इंतजाम तो कर दिया गया है, लेकिन खाने की कोई व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं की गई है। मंगलवार को दोपहर ढाई बजे तक टेंट में खाना नहीं पहुंचा था। सीता देवी ने बताया कि सोमवार को भी पूरे दिन में सिर्फ एक वक्त का खाना आया। खाने में भी महज चार रोटियां व दाल दी जा रही है।
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खुले में शौच जाना मजबूरी
टेंट के समीप मोबाइल शौचालय की व्यवस्था सरकार की तरफ से की गई है, लेकिन गंदगी इतनी है कि इसकी जगह बाढ़ पीड़ित खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। मूलचंद बस्ती की महिला सीता देवी ने बताया कि शौचालय में बदबू व गंदगी इतनी है कि कोई जाने को तैयार नहीं है।
दवाओं की कोई व्यवस्था नहीं
बाढ़ आने के बाद बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। इतना ही नहीं सांप-बिच्छू निकलने से भी खतरा है, लेकिन अस्थायी टेंट में रहने वालों के लिए दवाइयों की कोई व्यवस्था नहीं है। टेंट में गुजारा कर रहे मुकेश ने बताया कि बीमारियां फैलने का खतरा है, लेकिन सरकार की तरफ से किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह बीत गया, लेकिन न तो विधायक और न ही पार्षद बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे। सिर्फ टेंट लगा देना ही समस्या का समाधान नहीं है। हमारा रोजगार भी छिन गया है।
बुलडोजर चलने का डर सता रहा
बाढ़ पीड़ितों को अब यह भय सताने लगा है कि कही उनकी झुग्गियों पर सरकार बुलडोजर न चला दे। उनका कहना था कि जैसे ही पानी का स्तर कम होगा, उनसे यह कहा जाएगा कि कहीं और झुग्गी बसा लें, क्योंकि बार-बार यमुना में जलस्तर बढ़ने से परेशानी होगी। ऐसे में हमारा रोजगार भी खत्म हो जाएगा।
सब्जियों की खेती है जीवन-यापन का आधार
टेंट में रहने वाले बेला गांव व मूलचंद बस्ती पार्ट-1 के लोगों का जीवन-यापन खेती से ही चलता है। उनका कहना था कि अभी तो फसलें बर्बाद हो गईं, इसका मुआवजा भी नहीं मिलेगा। बाढ़ का पानी कम होने के साथ एक बार फिर सब्जियां की खेती की जाएगी।