शरणार्थियों का उजड़ा आशियाना: पीड़ितों की दास्तां- 2014 में पाकिस्तान से आए थे, बड़ी मेहनत से बनाया था घर
मोनेस्ट्री मार्केट में दुकानदार खुद ही पानी निकासी का कार्य कर रहे हैं। मुख्य गेट के पास लगाई मिट्टी की बोरियां हटाई जा रही हैं। दुकानदार रोहित ने बताया कि यहां कोई प्रशासन का अधिकारी नहीं आया है। कुछ नेता आए, लेकिन वह भी देखकर चले गए।
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दिल्ली में बाढ़ से मजनू का टीला के पास रहने वाले हिंदू शरणार्थियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे अधिक नुकसान नदी से सटे घरों में रहने वाले शरणार्थियों को उठाना पड़ रहा है। यहां करीब 20 घर बाढ़ में बह गए हैं जबकि 30 घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। इससे कई लोग सड़क किनारे शरण लेकर गुजारा कर रहे हैं। शरणार्थियों का कहना है कि यहां कोई खाना तक नहीं पहुंचा रहा है।
राजा राम ने बताया कि उन्होंने पांच माह पहले ही घर बनाया था, लेकिन बाढ़ ने पलभर में सब कुछ नष्ट कर दिया। वर्ष 2014 में पाकिस्तान के सिंध से यहां आए थे। बड़ी मेहनत से घर बनाया था। घर की दरारें दिखाते हुए शरणार्थी महादेव अडवानी ने बताया कि पूरा घर फिर से बनाना होगा। बाढ़ ने कुछ भी नहीं रहने लायक नहीं छोड़ा।
खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि, पास के स्कूल में एक राहत शिविर है, लेकिन वहां रहने की व्यवस्था नहीं है। शरणार्थी सीमा ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे हैं, यहां कोई रहने की जगह नहीं है। रात में मच्छर काटते हैं, लेकिन रहने की मजबूरी है। खाने-पीने की सबसे अधिक समस्या है।
दुकानदारों ने संभाला मोर्चा
मोनेस्ट्री मार्केट में दुकानदार खुद ही पानी निकासी का कार्य कर रहे हैं। मुख्य गेट के पास लगाई मिट्टी की बोरियां हटाई जा रही हैं। दुकानदार रोहित ने बताया कि यहां कोई प्रशासन का अधिकारी नहीं आया है। कुछ नेता आए, लेकिन वह भी देखकर चले गए।