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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Flood-damaged farmlands to be made cultivable; states directed to frame strict regulations.

Delhi NCR News: बाढ़ से खराब हुए खेत खेती लायक बनेंगे, राज्यों को सख्त नियम बनाने के निर्देश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 09:05 PM IST
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देशभर में पहली बार बनेगा एक जैसा सिस्टम, रेत माफियाओं पर रहेगी कड़ी नजर
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नितिन राजपूत
नई दिल्ली। बाढ़ के बाद खेतों में जमा होने वाली बालू (रेत) को हटाने की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और नियमबद्ध होगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे कृषि भूमि से बाढ़ में आई बालू हटाने के लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाएं। अधिकरण ने कहा कि किसानों की जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया की आड़ में रेत खनन किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने यह आदेश कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया।

सुनवाई में यह मुद्दा सामने आया कि कई जगहों पर बाढ़ के बाद खेतों से बालू हटाने की अनुमति का दुरुपयोग कर व्यावसायिक स्तर पर अवैध खनन किया जा रहा है। इससे न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि कृषि भूमि की उपजाऊ मिट्टी भी नष्ट हो जाती है और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। पीठ ने कहा कि राज्यों द्वारा बनाई जाने वाली व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों की जमीन को जल्द से जल्द खेती योग्य बनाना होना चाहिए। साथ ही, अनुमति केवल खेतों पर जमा हुई बालू हटाने तक सीमित रहेगी। यही नहीं, प्राकृतिक जमीन के स्तर या उपजाऊ मिट्टी के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की अनुमति नहीं होगी। यदि निर्धारित सीमा से अधिक खुदाई की जाती है या व्यावसायिक उद्देश्य से रेत निकाली जाती है, तो उसे अवैध खनन माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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ड्रोन, जीपीएस, सीसीटीवी और एआई से होगी निगरानी
एनजीटी की पीठ ने राज्यों को निर्देश दिया कि बालू हटाने से पहले वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए। इसके लिए डीजीपीएस सर्वे, ड्रोन मैपिंग, जीआईएस और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खेत में कितनी मात्रा में बालू जमा है और कितनी हटाई जानी चाहिए। इसके अलावा रेत के परिवहन और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी, ई-चालान और आरएफआईडी जैसी डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने को भी कहा गया है।
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जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स करेगी प्रक्रिया की निगरानी
पीठ ने कहा कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स करेगी। जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर की अध्यक्षता वाली इस समिति में पुलिस, वन विभाग, परिवहन विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग और खनन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। यह टास्क फोर्स यह सुनिश्चित करेगी कि बालू हटाने की अनुमति का कहीं दुरुपयोग न हो और अवैध खनन पर तत्काल कार्रवाई की जाए। एनजीटी ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित खेतों, बालू की मात्रा, जारी की गई अनुमति, रेत के परिवहन और कार्रवाई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में रखा जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।

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पर्यावरण मंत्रालय लेगा इसरो की मदद
पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय को इसरो के साथ मिलकर उपग्रह चित्रों और एआई आधारित तकनीक के उपयोग की संभावनाएं तलाशने और इस पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इन तकनीकों के जरिए बाढ़ के बाद खेतों में जमा बालू की पहचान, उसकी मात्रा का आकलन और हटाने की पूरी प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी। अधिकरण ने कहा कि जहां जरूरत हो वहां किसानों को राहत मिलनी चाहिए, लेकिन राहत के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होगी।
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