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2014 में NCR की पांच रहस्यमयी घटनाएं जिनसे नहीं उठेगा पर्दा

Tue, 23 Dec 2014 06:03 PM IST
Updated Tue, 23 Dec 2014 06:03 PM IST
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Five mysterious cases of delhi ncr in 2014 who left unrevealed.

दिल्ली स्थित इंडिया गेट से एक तीन साल की बच्ची के गायब होने और वापस मिलने की घटना भी बड़ी रहस्यमयी रही। इस मामले में आजतक यह पता नहीं चल सका कि लापता बच्ची को कहां गई थी और उसे कौन ले गया था। यहां तक कि इस केस में यह भी साफ नहीं हो सका है कि उस बच्ची को कौन वापस छोड़ गया।

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28 सितंबर को अपने मां-बाप के संग तीन साल की जाह्नवी इंडिया गेट घूमने गई थी। घूमते-घूमते कब जाह्नवी अपने मां-बाप से अलग होकर गायब हो गई पता ही नहीं चला। जाह्नवी के खो जाने पर उसके माता-पिता उसे ढूंढने में लग गए पर उसका कोई पता नहीं चला।
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इसके बाद पूरी दिल्ली में जगह-जगह जाह्नवी के नाम के पोस्टर लगाए गए, पैम्फलेट बांटे गए। यहीं नहीं जाह्नवी के वापस मिलने में सोशल मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका मानी जाती है। पूरे एक हफ्ते तक पुलिस ने जाह्नवी को ढूंढने का जीतोड़ प्रयास किया, पर जाह्नवी का कुछ पता नहीं चला।
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फिर जाह्नवी के घरवालों का आक्रोश देखते हुए पुलिस कमिश्नर बस्सी ने जाह्नवी का पता बताने वाले पर 50 हजार का इनाम रखा। 50 हजार इनाम दिए जाने की पुलिस की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही जाह्नवी को जनकपुरी से बरामद किया गया। जब वह मिली तो उसके बाल मुंडे हुए थे और उसके गले में तख्ती थी जिसपर लिखा था मेरा नाम जाह्नवी है।

पूरे एक हफ्ते बाद जाह्नवी घर तो आ गई पर यह बात आज तक पता नहीं चली कि आखिर उसे कौन और किस मकसद से अपने साथ ले गया था और ऐसी क्या वजह थी कि वह जाह्नवी को अकेला छोड़ गया।

पूरी फ‌िल्मी कहानी थी चंद्रमोहन की मौत और ‌वापसी

Five mysterious cases of delhi ncr in 2014 who left unrevealed.

एक आरटीआई कार्यकर्ता की मौत और कुछ महीने बाद उसके जिंदा होने का मामला अपने आप बहुत ही रहस्यमयी रहा। आरटीआई कार्यकर्ता की चंद्रमोहन शर्मा की मौत, फिर उसके बेंगलुरू में जिंदा होने की खबरें और उसके बाद उसके दूसरी शादी का पता लगना पूरी तरह एक फिल्मी पटकथा लगती है।

चंद्रमोहन ने अपने मौत की साजिश खुद ही रची थी। उसने एक मई को अपनी झूठी मौत की वारदात को अंजाम द‌िया था। वारदात से दो दिन पहले चंद्रमोहन ने अंसल प्लाजा के पास एक विक्षिप्त व्यक्ति को देखा था। उसे देखते ही उसने पूरी साजिश की प्लानिंग कर ली। उसने 30 अप्रैल को तुगलपुर स्थित पेट्रोल पंप से 3 लीटर पेट्रोल लेकर गाड़ी में रख लिया।

1 मई को कंपनी के फोन से साले विदेश को फोन कर ग्रेटर नोएडा के परी चौक बुलाया। उसका साला उस विक्षिप्त व्यक्ति को लेकर आया और दोनों ने उस व्यक्ति को गाड़ी की अगली सीट पर बैठाकर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। फिर वहां से चंद्रमोहन दिल्ली को निकला, जहां से उसने बेंगलुरू के लिए ट्रेन पकड़ ली।

यह सब उसने अपनी प्रेमिका को पाने के लिए किया था और बेंगलुरु में आर्थिक तंगी के कारण उसका प्रेमिका से भी मोहभंग होने लगा। इसी कारण प्रेमिका के घर फोन करके उसे वापस ले जाने को कहने लगा। यही वो फोन कॉल्स थे जो चंद्रमोहन तक पहुंचने का जरिया बने और पुलिस ने बेंगलुरू पहुंचकर उसे और उसकी प्रेमिका को गिरफ्तार किया।

भूत भी पहुंचे कोर्ट, वीड‌ियो हुआ वायरल

Five mysterious cases of delhi ncr in 2014 who left unrevealed.

दिल्ली के कड़कड़डूमा जिला अदालत में साल 2014 में भूत की चर्चा आम रही। कोर्ट की लाइब्रेरी व साइबर लाइब्रेरी में कुछ अजीबो-गरीब हो रहा था। कभी रात में कोई चमकीली रोशनी नजर आती थी तो कभी रात को कंप्यूटर अपने आप शुरू हो जाते थे। कुछ लोग इसे भूत की करतूत बता रहे थे तो कुछ लोग महज इसे संयोग मान रहे थे।

जानकारी के मुताबिक कोर्ट परिसर में वकीलों की लाइब्रेरी में उड़नतश्तरी जैसी चमकीली रोशनी नजर आई। यह रोशनी एक ओर से आई और दूसरी ओर चली गई।

यह सब सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। इसके एक दिन साइबर लाइब्रेरी में लगे कई कंप्यूटर रात बारह बजे के करीब एक-एक कर स्टार्ट हो गये। एक सिस्टम पर इंटरनेट भी स्टार्ट हो गया। यह घटना भी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।

बार अधिकारियों ने यह जानकारी सामने आने के बाद घटना की जांच के लिये फिर से रिकार्डिंग करने की योजना बनाई। इस बार भी वहीं घटनायें सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। हालांकि यह पूरा मामला वकीलों के बीच कौतूहल का विषय बना रहा। इस रहस्मयी घटना का वीडियो भी बड़ा चर्चित रहा।

अनसुलझे हुए हैं केंद्रीय मंत्री के मौत के राज

Five mysterious cases of delhi ncr in 2014 who left unrevealed.

केंद्रीय मंत्री की मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम हुआ और अब उनके पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बीजेपी के दिग्गज नेता तो हादसे में चल बसे लेकिन उनकी मौत ने कई सवाल छोड़े हैं, ‌जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है। केंद्रीय मंत्री की मौत के बाद सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिर उनकी कार का एक्सीडेट कैसे हुआ?

दिल्ली के अरविंदो चौक‌ पर उनकी कार की टक्कर कैसे हुई? सूत्रों के अनुसार गोपीनाथ मुंडे की कार को टक्कर मारने वाले आरोपी ड्राइवर गुरविंदर ने पुलिस को बताया कि मुंडे के ड्राइवर ने रेड लाइट जंप की थी। यही नहीं, उसने बताया कि उसकी गाड़ी से पहले कोई और गाड़ी मुंडे की कार से टकराई थी और वह कार चालक मौके से भाग निकला।

जिस जगह हादसा हुआ है, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। दिल्ली पुलिस की एफएसएल को मौके पर बुलाया गया था। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग सकेगा कि किस गाड़ी ने लाइट जंप की थी। अगर सीसीटीवी कैमरे होते तो पता चल जाता क‌ि क‌िसने पहले टक्कर मारी थी।

अरविंदो मार्ग से अगर पृथ्वीराज रोड के लाइट सिग्नल को देखें तो वह दिखाई नहीं देता है। अरविंदो मार्ग से पृथ्वीराज रोड की तरफ वाला सिग्नल थोड़ा सा दाईं तरफ है। पृथ्वीराज रोड से आते हुए वाहन उस समय दिखाई देते हैं जब वह सिग्नल पर बीच में आ जाते हैं। शायद ड्राइवर ने सिग्नल न देखा हो।

जिस लाइट सिग्नल पर हादसा हुआ है, उससे सटा हुआ ट्रैफिक पुलिस का बूथ है। दुर्घटना के समय वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। कहा जाता है कि अगर वो होते तो पता चल जाता मुंडे की मौत का राज।

तेंदुओं की मौत के पीछे का नहीं खुला सच

Five mysterious cases of delhi ncr in 2014 who left unrevealed.

इस साल एक के बाद एक तेंदुओं की मौत ने पर्यावरणविदों और वन्य जीव प्रेमियों को विचलित कर दिया। अप्रैल माह में चार तेंदुओं के मौत मामले की रिपोर्ट कोर्ट में पेश भी नहीं की गई थी कि नवंबर में मानेसर के सहरावण गांव के पास सड़क दुर्घटना में एक और तेंदुए की मौत हो गई।

उसकी उम्र तकरीबन 12 वर्ष बताई जा रही है। इस तेंदुए को सड़क पार करते समय किसी अज्ञात वाहन ने इसके पिछले हिस्से पर टक्कर मारी थी। तेंदुओं के रहने वाले क्षेत्र में दिनों दिन अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। जितने भी तेंदुओं की मौत हुई है वह सोहना से मानेसर तक के इलाके में हुई है।

मानेसर के ऊपरी क्षेत्र में जहां तेंदुओं के रहने का ठिकाना था उसे आर्मी और अंसल ने छीन लिया। नौरंगपुर बांस गांव के आसपास के क्षेत्र में फार्म हाउस के कारण भी तेंदुए बेघर हो गए।

वन्यजीव विशेषज्ञ आरपी बलवान बताते हैं कि फार्म हाउस वाले पिंजड़ा लगा तेंदुओं का शिकार करते हैं। नूंह और मोहम्मदपुर क्षेत्र में भी तेंदुए काफी थे मगर वन्य जीव विभाग की लापरवाही के कारण वह भी विलुप्त होने के कगार पर हैं। लेकिन इनके विलुप्त होने का वास्तविक कारण एक रहस्य ही है।

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