एनसीआर में चिकनगुनिया से 11 लोगों की मौत, ये है इस बीमारी का इतिहास
राजधानी में बुखार के मरीजों और उसके चलते होने वाली मौतों की गिनती लगातार बढ़ रही है। दिल्ली सरकार ने सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
बुधवार को दिल्ली में चिकनगुनिया के चलते छह और मरीजों की मौत का मामला सामने आया है जिनमें से पांच का इलाज अपोलो अस्पताल में और एक का इलाज एम्स में चल रहा था। नोएडा से भी एक शख्स की मौत की खबर है।
अब तक दिल्ली में चिकनगुनिया से मरने वालों की संख्या 11 पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि यहां चिकनगुनिया से अभी तक कोई मौत नहीं हुई है।
नोएडा में हुई पहली मौत
चिकनगुनिया से मरने वालों में तीन दिल्ली के , दो नोएडा और एक गाजियाबाद के रहने वाले थे। इनमें से तीन की उम्र 80 वर्ष से अधिक थी। पांच मरीजों का इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा था और उन्हें चिकनगुनिया के साथ दूसरी गंभीर बीमारियां भी थीं।
मुजफ्फरनगर के एक शख्स को मंगलवार को एम्स लाया गया था, बुधवार को उसकी मौत हो गई। उसे रक्त से संबंधित और भी कोई बीमारी थी। अपोलो अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पिछले तीन सप्ताह में यहां चिकनगुनिया से मरने वाले मरीज किडनी और हृदय रोग संबंधी अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे। चिकित्सकों का कहना है कि उनकी मौत की वजह सिर्फ चिकनगुनिया ही नहीं थी।
स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी एजेंसियों, सरकार व स्थानीय निकाय मिलकर बीमारियों की रोकथाम के लिए काम करें।
नोएडा में पहली मौत
नोएडा में बुखार से बुजुर्ग और एक छात्र की मौत हो गई। किशनलाल सिंह (63) का इलाज जेपी अस्पताल में चल रहा था। सेक्टर-76 निवासी हितेश ने बताया कि ससुर किशनलाल की तबीयत खराब होने पर उन्हें जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों ने चिकनगुनिया बताकर इलाज शुरू किया। उसके बाद तेज बुखार चढ़ गया जिससे अंगों ने काम करना बंद कर दिया। सोमवार को उनकी मौत हो गई। वहीं, शहर के नामी स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र की भी बुखार से मौत हो गई।
प्रिंसिपल ने बताया कि बच्चे को दो दिन पहले तेज बुखार आया था। उसके बाद ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ गया और अंगों ने काम करना बंद कर दिया। इधर, सीएमओ डॉक्टर विजय दीपक वर्मा ने बताया कि दोनों मरीजों की जानकारी नहीं आई है। अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट मांगी जाएगी, इसके बाद ही चिकनगुनिया की पुष्टि हो पाएगी।
चिकनगुनिया का इतिहास
चिकनगुनिया शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है वह जो झुका दे..., यह वायरस से होने वाला बुखार है। एडीज एजिप्टी नाम के मच्छर, जिसे पीले बुखार का मच्छर भी कहते हैं, इसके काटने से यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है।
लक्षण : मच्छर काटने के 2 से 7 दिनों के बाद चिकनगुनिया के लक्षण नजर आते हैं।
- शरीर पर चकते निकलना, जी मिचलाना, भूख कम लगना, कमजोरी आना, बुखार, खांसी, जुकाम, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द होना।
- व्यक्ति इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी कार्य करने में असमर्थ पाता है।
- कई बार जोड़ों का दर्द महीनों से लेकर साल भर तक रहता है। खासकर उम्रदराज लोगों को।
- आमतौर पर चिकनगुनिया बुखार जानलेवा नहीं कहा जाता, लेकिन उम्रदराज लोगों (60 वर्ष या उससे अधिक आयु) के लिए यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
(स्रोत : डब्ल्यूएचओ)