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रेफर हुए बच्चे को बैठाने के बाद नहीं चालू हुई एंबुलेंस, मौत

Thu, 13 Apr 2017 08:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 13 Apr 2017 08:46 PM IST
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 five month infant died due to hospital negligence in gurugram
infant dead body
जिला नागरिक अस्पताल में पर्याप्त इलाज नहीं मिलने के कारण एक बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में रेफर करने के बाद एंबुलेंस नहीं मिली। इसके कारण बच्चे की मौत हो गई। एंबुलेंस स्टाफ इससे अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। हालांकि, इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं की गई।
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जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 10.30 बजे झाड़सा में रह रहे मूल रूप से केरल निवासी जॉन अपने पांच माह के बेटे ऐबेल को सांस की तकलीफ के कारण इमरजेंसी में लेकर आए थे। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने जांच में पाया कि बच्चे को सांस लेने में अधिक तकलीफ है। सांस की नली में दूध फंस जाने के कारण सांस लेना संभव नहीं हो रहा था। जिसके कारण बच्चे की हालत खराब हो रही थी। देखने के तुरंत बाद दिल्ली सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। 
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पिता का आरोप है कि जब बेटे को लेकर एंबुलेंस कंट्रोल रूम में गए तो वहां एंबुलेंस 4247 एसएलआर (लाइफ स्पोर्ट एंबुलेंस) में मरीज को बैठाने के तकरीबन 20 मिनट तक एंबुलेंस ही नहीं स्टार्ट हो सकी। डीजल नहीं होने की बात कहकर जाने से मना कर दिया गया और दूसरे एंबुलेंस के आने का इंतजार करने को कहा गया।
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इसके बाद बच्चे की हालत और बिगड़ने लगी। इस बीच दोबारा अस्पताल के इमरजेंसी में आए तो वहां स्थिति खराब थी। सांस रुक गई थी। जान बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। ईसीजी रिपोर्ट में भी हृदय गति रुकने की रिपोर्ट मिली। इसके बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 


इमरजेंसी में मौजूद डॉ. कमलदीप का कहना है कि स्थिति बहुत खराब थी। बुधवार से बच्चे की सांस नली में दूध अटका हुआ था। एक दिन बाद आने के कारण बचा पाना संभव नहीं हुआ। वहीं, एंबुलेंस स्टाफ का कहना है कि देरी नहीं हुई। बल्कि रेफर के थोड़ी देर बाद ही बच्चे की मौत हो गई थी। डिप्टी सीएमओ नीलम थापर का कहना है कि बच्चे की हालत पहले से बेहद नाजुक बनी हुई थी। ऐन वक्त पर सेल्फ स्टार्ट सिस्टम में समस्या आने से दिक्कत हुई है। 


 
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