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Delhi: पुलिस के अधिकारियों की फोटो लगाकर करते थे सेक्सटॉर्शन, भोले-भाले लोगों से वसूली करने वाले पांच धरे

Mon, 27 Mar 2023 06:57 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 27 Mar 2023 06:57 PM IST
सार

शाहदरा जिला पुलिस उपायुक्त रोहित मीणा ने बताया कि 25 फरवरी को जगतपुरी निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति ने 13.70 लाख रुपये ठगी की शिकायत पुलिस को दी थी।

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Five arrested for extorting money from people by blackmail
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

शाहदरा जिला के साइबर थाना पुलिस ने सेक्सटॉर्शन कर भोले-भाले लोगों से वसूली करने वाले गैंग के पांच लोगों को पकड़ा है। इनमें दो नाबालिग लड़के भी शामिल हैं। आरोपी दिल्ली पुलिस अधिकारियों की फोटो व्हाट्सएप डीपी पर लगाने के अलावा ट्रू-कॉलर पर भी इस्तेमाल करते थे। इनके निशाने पर बुजुर्ग लोग ज्यादा रहते थे। गैंग देशभर के सैकड़ों लोगों से वसूली कर चुका है।

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पुलिस के मुताबिक, पिछले तीन-चार माह के दौरान आरोपियों ने 40 लाख से अधिक की वसूली की है। इनके बैंक खातों की डिटेल से इसका पता चला है। पुलिस ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, सात सिमकार्ड, कई अलग-अलग शहरों में मौजूद बैंक के कागजात, 24 पीड़ितों की अश्लील वीडियो व अन्य सामान बरामद किया है। शुरुआती जांच के बाद पता चला है। कई शिकायतें आरोपियों से लिंक भी हो गई हैं।
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शाहदरा जिला पुलिस उपायुक्त रोहित मीणा ने बताया कि 25 फरवरी को जगतपुरी निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति ने 13.70 लाख रुपये ठगी की शिकायत पुलिस को दी थी। पीड़ित ने बताया कि 18 फरवरी को उनके व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई। उसमें एक अनजान लड़की ने अश्लील हरकतें कर उसका वीडियो बुजुर्ग के साथ रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद पीड़ित से ब्लैकमेलिंग शुरू हो गई।
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आरोपियों ने पीड़ित को कॉल कर खुद को साइबर थाने का प्रभारी बताकर वसूली शुरू की। इसके बाद यू-ट्यूब के अधिकारी बनकर पीड़ित को ब्लैकमेल किया गया। पीड़ित से धीरे-धीरे रकम वसूलने के बाद आरोपियों ने अपने नंबर बंद कर लिये। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार, अवधेश व अन्यों की टीम ने मामले की जांच शुरू की।

टेक्निकल सर्विलांस, सीडीआर और बैंक खातों की पड़ताल के बाद पुलिस की टीम ने अलवर और भरतपुर, राजस्थान में छापेमारी कर पांच आरोपियों को दबोच लिया। इनमें दो नाबालिग भी शामिल थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भरतपुर निवासी राहुल खान (26) अलवर निवासी अरमान (21) और भरतपुर निवासी आजाद (41) व 16 और 17 साल के दो नाबालिगों के रूप में हुई है।

ऐसे दिया जाता था ठगी की वारदात को अंजाम
ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए आरोपी दूसरे राज्यों से सिमकार्ड का इंतजाम करवाने के अलावा फर्जी पतों पर खोले गए बैंक खातों का इंतजाम करते थे। नाबालिग लड़के व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर के जरिये लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इनको फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेजा जाता था। बाद में चैट शुरू करने के बाद वीडियो कॉल कर अश्लील वीडियो बना लिया जाता था। इसके बाद यह लोग पीड़ितों को डरा-धमका कानून का डर और सामाज में बदनाम करने की धमकी देकर उनसे वसूल करते थे।

पूर्व सीपी राकेश अस्थाना और मौजूदा स्पेशल सीपी एसएस यादव की फोटो का किया इस्तेमाल
आरोपियों ने लोगों को डराने और खुद को असली दिखाने के लिए अपने फर्जी व्हाट्सएप नंबरों की डीपी पर पूर्व दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना को अलावा मौजूदा स्पेशल सीपी एसएस यादव की फोटो भी लगाई हुई है। इसके अलावा दर्जनों पुलिस अधिकारी की फोटो का यह इस्तेमाल कर रहे थे। आरोपी खुद को साइबर थाना रोहिणी या द्वारका पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को गिरफ्तार करने का डर दिखाते थे।

देशभर के सैकड़ों लोगों को लगाया अब तक चूना
आरोपी पिछले काफी समय से देशभर के सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुके हैं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि इन लोगों ने दक्षिण भारत के अलावा मध्य प्रदेश, असम, दिल्ली, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों में लोगों को अपने जाल में फंसाया। फिलहाल इनके मोबाइल में 20 पीड़ितों की जानकारी मिली है, जिन्होंने इनको रुपये दिए। इसके अलावा 24 लोगों की अश्लील वीडियो भी मिली है। पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल की पांच शिकायतों को इनसे लिंक किया है। इसमें तीन यूपी, एक उत्तराखंड और एक गुजरात की है।

भरतपुर और उसके आसपास के गांवों में ज्यादातर युवा साइबर ठगी में शामिल
भरतपुर, अलवर और मेवात के आसपास के एरिया में साइबर ठगी बेहद आम है। यहां आसपास के गांवों के ज्यादात युवा साइबर ठगी में लिप्त है। कमाल की बात यह है कि ज्यादातर लोग बेहद कम पढ़े लिखे होने के बाद भी बहुत शातिर तरीके से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। वारदात को अंजाम यह अपने घर से ही दे रहे हैं। ठगी की वारदात के बाद आरोपी कहीं भागते नहीं बल्कि अपने गांव में ही रहते हैं। इनको न तो पुलिस और न ही प्रशासन का डर रहता है। पुलिस की टीम कभी इनको गिरफ्तार करने पहुंच भी जाती है तो गांव वालों को भारी विरोध झेलना पड़ता है।

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