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पहले कमल आजाद की मौत और अब पिता-पुत्र की हत्या, कहीं एक ही गैंग का तो नहीं हाथ
Tue, 24 Nov 2020 01:41 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शुजात आलम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शुजात आलम
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 24 Nov 2020 01:41 AM IST
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जुल्फिकार और उनका बेटा जाबांज
- फोटो : amar ujala
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जुल्फिकार और उसकी एनजीओ के लोग लगातार इलाके में सट्टे, नशे के धंधे, कबाड़ियों और भू-माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाते रहे थे। यहां तक इलाके में हो रही अवैध गतिविधियों के लिए वह पुलिस व निगम अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा करते रहते थे। अभी पिछले ही सप्ताह उनकी शिकायत के बाद सुंदर नगरी में एक बिल्डर की इमारत निगम ने गिरा दिया था। तभी से लगातार उनको धमकियां मिल रही थीं।
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इन सब के बीच जुल्फिकार की एनजीओ के महासचिव कमल आजाद का बुधवार को सुंदर नगरी में फुटपाथ पर अर्द्धनग्न हालत में शव मिला था। उनके शरीर पर चोटों के निशान थे। एनजीओ के अध्यक्ष जुल्फिकार ने उन लोगों पर ही उसकी हत्या का आरोप लगाया था जिन लोगों का नाम अब उसकी भी हत्या में आ रहा है। उतर-पूर्वी जिला पुलिस इस दृष्टिकोण से भी मामले की जांच कर रही है।
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जुल्फिकार के एक रिश्तेदार ने बताया कि हमेशा से ही उन्होंने अवैध धंधा करने वालों के खिलाफ आवाज उठाई थी। पहले जुल्फिकार का खुद का स्क्रेप का कारोबार था। उनको पता था कि सुंदर नगरी का कौन-कौन कबाड़ी चोरी की गाड़ियों को काटता है। इसको लेकर जब उन्होंने विरोध जताया तो सारे कबाड़ी उनके खिलाफ हो गए। वहीं कमल ने नशे का धंधा करने वाले कुछ लोगों की वीडियो बनाकर पुलिस के अधिकारियों व एलजी को भेज दी थी।
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इसके अलावा ऊंची-ऊंची अवैध इमारतें बनाने वाले बिल्डरों के खिलाफ भी उनकी लड़ाई जारी थी। यही वजह थी कि लोग उनके खून के प्यासे थे। खुद जुल्फिकार पर पांच से छह बार जानलेवा हमला हुआ। अपनी जान के खतरे को देखते हुए वह लगातार नंद नगरी थाने को लिखते भी रहे। जान का खतरा बढ़ा तो उनको एक सुरक्षाकर्मी दे दिया गया। लेकिन बाद में रात के समय उनकी सुरक्षा में कटौती कर दिन के लिए ही उनको एक पीएसओ दिया गया। परिजनों ने पुलिस पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
अक्तूबर 2015 में भाई ने ही कर दी थी जुल्फिकार की पत्नी और पिता की हत्या...
जुल्फिकार का विवादों से नाता पुराना रहा था। बाहर के अलावा घर में भी उसके दुश्मनों की कमी थी। अक्तूबर 2015 में जुल्फिकार के छोटे भाई शमशाद उर्फ मुन्ना ने प्रॉपर्टी विवाद में उसकी पहली पत्नी समीना बेगम और उसके पिता यूसुफ की बेरहमी से हत्या कर दी थी। वारदात के बाद मुन्ना गिरफ्तार हो गया था। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
कोविड के दौरान मुन्ना पैरोल पर जेल से बाहर आया था। फिलहाल वह अभी जेल वापस नहीं गया है। इतना सब होने के बाद भी जुल्फिकार अपने भाई मुन्ना को समझाता था कि वह सही रास्ते पर आ जाएं। पहली पत्नी के बाद जुल्फिकार ने नवंबर 2015 में मेरठ निवासी रेशमा नामक महिला से शादी कर ली थी।
पत्नी और बच्चों के सामने ही कर दी गई पिता-पुत्र की हत्या...
सुबह फज्र की आजान के बाद जुल्फिकार के छोटे बेटे कैफ और जैद पास की ही मस्जिद में नमाज पढ़ने चले गए। कुछ ही देर बाद पहले जांबाज मस्जिद पहुंच गया। उसके कुछ देर बाद जुल्फिकार भी नमाज पढ़ने घर से निकला। उसकी पत्नी ने बालकनी से उसे जाते हुए देखा। उसके चंद मिनटों बाद ही अचानक चीखने की आवाज आने लगी।
रेशमा को लगा पता नहीं क्या हो रहा है। अचानक गोलियां चलने की आवाज आई। जांबाज ने पिता को बचाने का प्रयास किया तो उस पर भी गोली चला दी गई। कैफ और जैद ने पिता और भाई को खून से लथपथ देखा तो वह सीधे घर पहुंचे और मां को हत्याकांड के बारे में बताया। परिजन फौरन मौके पर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वारदात के समय मस्जिद में मौजूद लोगों ने मस्जिद का दरवाजा बंद कर लिया था, किसी ने उसकी मदद नहीं की। पुलिस भी काफी देर में मौके पर पहुंची।