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महिला और पुरूष मरीज को एक ही बेड पर चढ़ाया जा रहा ग्लूकोज

Sun, 25 Sep 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 25 Sep 2016 12:02 AM IST
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Female and male patient being plated on a bed of glucose
अस्पताल में मरीज - फोटो : अमर उजाला

साइबर सिटी में बुखार का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आलम ये है कि  अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं ऐसे में एक बेड पर तीन मरीजों को लिटाकर उनका इजाज किया जा रहा है।

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एक ही बेड पर महिला और पुरुष मरीज को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1000 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसके लिए खास तौर पर तीन-तीन फीवर क्लिनिक की ओपीडी चलाई जा रही है।
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शिशु वार्ड में बच्चे भी संदिग्ध डेंगू व वायरल से पीड़ित है। संभावित डेंगू के मरीजों को सिविल अस्पताल का आइसोलेशन वार्ड में रखा जा रहा है। मेडिकल वार्ड तक फुल हो गया है। 
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निजी अस्पतालों का भी यही हाल है। वायरल बुखार, मलेरिया व संभावित डेंगू के मरीजों से बेड फुल हो चुके हैं। अधिक मरीजों के कारण निजी अस्पतालों में मरीजों को वेटिंग लिस्ट में रखा जा रहा है। 

कुछ मरीजों को इमरजेंसी में ही इलाज देकर लौटा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी मौजूदा हालत पर चिंतित है। लोगों में भय का माहौल है। मरीजों को बुखार आने के साथ प्लेटलेट्स में कमी की शिकायत मिल रही है।

निजी अस्पताल मरीजों को लौटा रहे
डेंगू के खौफ से पॉश इलाके के लोग निजी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। लेकिन अस्पतालों में बेड फुल हैं। निजी अस्पतालों में मेडिकल वार्ड से लेकर इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग से बेड लगाए जा रहे हैं। 

इसके बावजूद मरीजों की संख्या के आगे बेड कम पड़ रहे हैं। कई अस्पतालों ने मरीजों को लेने से ही मना कर दिया है। केवल इमरजेंसी में ही देखकर मरीजों को भेज दिया जा रहा है। वहीं, ओपीडी में एक-एक डॉक्टर औसतन 50 से अधिक मरीज देख रहे हैं।

वायरल का इलाज
सिविल अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशयन डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं कि वैसे तो वायरल बुखार शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के अनुकूल 3-4 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है, परंतु बुखार तेज हो तो उसे कम करने की दवाएं जैसा पैरासिटामोल दी जाती है। इसमें 500 एमजी पैरासिटामोल ले सकते हैं। इसके आलवा रोगी  अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने के साथ भाप लेना और गर्म नमक के पानी के गरारे करे। वायरल फीवर में खुद से एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। 

क्या हैं इसके लक्षण
अचानक बुखार आना, सिर दर्द, बदन दर्द, गले में खराश, नाक में खुजली होना, पानी आना आदि वायरल के सामान्य लक्षण हैं। यह जरूरी नहीं है कि सभी में वायरल के एक जैसे लक्षण ही दिखाई दें। कुछ मामलों में उन्हें अजीब तरह की बेचैनी महसूस होती है या उनकी भूख खत्म हो जाती है।


खुद क्या करें
बुखार अगर 102 डिग्री तक है, लेकिन कोई और परेशानी नहीं हैं तो मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं। बुखार 3 दिन से अधिक समय तक है तो डॉक्टर से परामर्श लें।

इन बातों का ध्यान रखें
-साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें। मरीज को वायरल है तो उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें 
-बीमार व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें इस्तेमाल न करें
-छींकने से पहले नाक और मुंह पर रूमाल या टिश्यू पेपर रखें
-बुखार आता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

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