भय, लापरवाही और सरकार की रणनीतिक खामी ने बना दिया पूरी दिल्ली को हॉटस्पॉट
- पैरासिटामोल और दूसरी गोलियां खाकर जांच कराने से भागते रहे लोग
- दिल्ली में बने 100 हॉटस्पॉट, संक्रमित हुए 3314 लोग
- रैपिड टेस्ट किट, पीपीई किट, संसाधनों की कमी का भी लगा झटका
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दिल्ली के 11 जिलों में 100 हॉटस्पॉट बन गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन ने भी इसे लेकर चिंता जताई है। यह हालत तब हैं जब देश की राजधानी दिल्ली को कोविड-19 संक्रमण से मुक्त करने के लिए न केवल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बल्कि केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्रतिबद्ध हैं।
बताते हैं दिल्ली के इस हालात के लिए लोगों के भीतर समाया डर, लापरवाही और कोविड-19 से निबटने की रणनीतिक तैयारी जिम्मेदार है। वैशाली, मैक्स के चिकित्सक डा.अश्विन चौबे तो एक वजह और भी बताते हैं।
डा. चौबे के अनुसार लोगों ने मेडिकल स्टोर से पैरासीटामॉल समेत अन्य दवाइयां लेकर खाईं और काफी देर बाद जांच के लिए आगे आए। डा. चौबे के अनुसार लोगों के खुद डाक्टर बन जाने के कारण जहां यह संक्रमण कुछ और लोगों में फैल गया, वहीं उनकी लापरवाही के कारण कुछ डा. भी संक्रमित हुए।
उनका कहना है कि ऐसा ही एक मरीज उनके डा. बिनोद बिहारी चौबे के पास आ गया था। लिहाजा डा. बिनोद बिहारी को 14 दिन क्वारंटीन में रहना पड़ा।
11 जिलों की दिल्ली का यह है हाल
सेंट्रल दिल्ली में कोविड-19 के 184, पूर्वी में 38, नई दिल्ली में 37, उत्तरी में 60, उत्तरपूर्वी में 25, उत्तर पश्चिमी में 32, शहादरा में 48, दक्षिणी दिल्ली 170, दक्षिण पूर्वी में 130, दक्षिण पश्चिमी में 43, पश्चिमी में 122 लोग संक्रमित हैं।
1080 लोग क्वारंटीन हैं और अन्य 213 संक्रमित हैं। 1078 लोगों को ठीक करके घर भेजा जा चुका है, कोविड संक्रमण से 54 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और कुल 3314 संक्रमित हैं।
दिल्ली में एक और भयावह तस्वीर है। मैक्स पटपड़गंज, राजीव गांधी, लोकनायक जय प्रकाश समेत अस्पतालों के डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ भी कोविड-19 के संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। नीति आयोग के निदेशक स्तर के अधिकारी, राष्ट्रपति भवन का स्टाफ तक कोविड-19 की चपेट में आ चुका है।
गाड़ी देखकर लोग घरों में घुस जाते हैं और फिर बाहर
पूर्वी दिल्ली के पुलिस इंस्पेक्टर की सुनिए। बताते हैं कि वेस्ट विनोद नगर, मंडावली, नालंदा चौंक समेत तमाम घने इलाके हैं। संकरी गलियां हैं। सूत्र का कहना है कि यहां लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन कराना काफी मुश्किल है। लोग पुलिस की गाड़ी देखकर घरों में घुस जाते हैं।
हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार का भी कहना है कि पुलिस की गाड़ी ओझल होते ही सड़कों पर कहीं बच्चे खेल रहे हैं, तो कहीं लोग टहलते दिखाई दे देते हैं। इनकम टैक्स के रिटायर असिस्टेंट कमिश्नर डीके कपूर के मुताबिक दिल्ली में छोटे-छोटे घरों में और एक कमरे के मकान में छह से आठ लोग तक रहते हैं।
इसलिए व्यवहारिक रूप से चाहकर भी लॉकडाउन का पालन आसान नहीं है। कपूर का कहना है कि छोटी सी दिल्ली की डेढ़ करोड़ की आबादी हैं। जरा घनत्व तो देखिए। फिर यहां सर्विस क्लास से जुड़े लोगों की संख्या ज्यादा है। पता नहीं कौन कहां से संक्रमण लेकर सोसाइटी में रह रहा है।
मुख्यमंत्री ने भी जताई चिंता
दिल्ली के एक जिलाधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ प्रमुख अधिकारियों की बैठक हुई। सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का ढंग से पालन न हो पाने का मुद्दा उठा।
मुख्यमंत्री ने हर हाल में इस स्थिति पर लगाम लगाने को कहा है। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराने के लिए कुछ क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी मंगलवार को दिल्ली के अधिकारियों के साथ बैठक में सोशल डिस्टेंसिंग के लागू न कर पाने पर गंभीर चिंता जताई थी।
दिल्ली में कोविड-19 का संक्रमण बढ़ने का एक कारण एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने बताया है। डा. गुलेरिया के बयान से डा. प्रखर कात्यायन भी सहमत हैं। डा. प्रखर का कहना है कि दिल्ली में लोगों में डर कुछ ज्यादा जगह बना लेता है। आमतौर पर अनाधिकृत कालोनियों में लोग जांच कराने से कतराते हैं।
अपार्टमेंट आदि में भी लोगों के भीतर कोविड-19 को लेकर मानसिक डर ज्यादा है, लेकिन समय पर जांच कराने से लोग पीछे हट जाते हैं। जब मामला गंभीर होने लगता है तभी लोग सामने आते हैं।
एलएनजेपी के पूर्व एमएस किशोर सिंह ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न कर पाना संक्रमण के फैलने का प्रमुख कारण है। डा. किशोर सिंह कहते हैं कि लोगों ने लापरवाही बरती और अब इसका नतीजा संक्रमितों की बढ़ी हुई संख्या के रूप में सामने आ रहा है।
टेस्टिंग, सरकार की रणनीतिक तैयारी भी बन रही है वजह
दिल्ली सरकार के एक अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट का कहना है कि रणनीतिक तैयारी में ही खामी रही। कोविड-19 के मैसेंजर आरएनए आधारित पीसीआर टेस्ट की सुविधा जहां सीमित थी, वहीं रैपिड टेस्ट किट आने में समय लगा।
चीन से जो टेस्ट किट आई, उससे खुद आईसीएमआर ने ही जांच पर रोक लगा दी। बताते हैं इसके अलावा जिस तरह से स्क्रीनिंग की रणनीति बननी चाहिए थी, वह काफी देर बाद बन पाई। दिल्ली के कई अस्पतालों में पीपीई किट, डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ को समय पर सुरक्षा के संसाधन नहीं मिल पाए।
नार्थ दिल्ली के एक अस्पताल में आए दिन कई बार इसे लेकर खूब हंगामा हुआ। बताते हैं नर्सों, पैरा स्टाफ के क्वंरंटीन की व्यवस्था या ड्यूटी के बाद रहने के इंतजाम को लेकर भी अस्पतालों में में काफी टकराव की स्थिति बनी रही।
बताते हैं चिकित्सकों, नर्सों में कोविड-19 पॉजिटिव मिलने से भी हड़कंप मचने जैसी स्थिति पैदा हो गई। इसके कारण भी काफी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दिल्ली में यहां है कोरोना टेस्टिंग की सुविधा
- एम्स अस्पताल
- सफदरजंग अस्पताल
- आरएमएल अस्पताल, कनाट प्लेस
- आर्मी आर एंड आर अस्पताल, धौलाकुंआ
- मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज
- लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
- डॉक्टर लाल पैथ लैब्स
- आईएलबीएस अस्पताल, बसंतकुंज
- सिटी एक्सरे एंड स्कैनिंग क्लीनिक, तिलक नगर
- सर गंगाराम अस्पताल, ओल्ड राजिंदर नगर
- ऑन्क्वेस्ट लैबोरेटरीज, सफदरजंग
- डॉ. डैंग्स लैब, सफदरजंग
- इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, सरिता विहार
- बीएलके सुपरस्पेशलिटी अस्पताल
- प्रोग्नोसिस लैबोरेटरीज, द्वारका