फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Farmers Protest: Farmers are asking these questions, Agriculture become curse for us, are our children born for wages

किसानी हमारे लिए बनी अभिशाप, क्या हमारे बच्चे मजदूरी के लिए ही पैदा हुए हैं? किसान पूछ रहे ये सवाल

Wed, 02 Dec 2020 05:23 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 02 Dec 2020 05:23 PM IST
सार

किसानों ने कहा- सालभर की खेती के बाद भी बच्चों को महंगे स्कूलों, प्राइवेट कोचिंग में पढ़ाने में सक्षम नहीं, सरकार किसानों के बच्चों की शिक्षा पूर्णतया करे मुफ्त...

विज्ञापन
Farmers Protest: Farmers are asking these questions, Agriculture become curse for us, are our children born for wages
आंदोलन में शामिल किसान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

विज्ञापन

पैंतीस वर्षीय आस मुहम्मद एक किसान हैं। वे बुढ़ाना तहसील के दबेड़ी गांव से किसान आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए यूपी गेट पहुंचे हैं। आस मुहम्मद बताते हैं कि उनके पास 20 एकड़ जमीन है। उनके पास दो ट्रैक्टर और चार ट्यूबवेल भी हैं। आसपास के लोग उन्हें संपन्न किसान समझते हैं। लेकिन उनकी सच्चाई यह है कि वे अपने तीन बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला तक नहीं दिला पाते। बिजली के महंगे बिल और ट्रैक्टर के लोन चुकाने के बाद उनके पास इतना भी पैसा नहीं बचता है कि उससे एक अच्छे स्कूल की फीस चुका सकें। लिहाजा उन्होंने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूल में करा दिया है।

लेकिन आस मुहम्मद को यह बात अच्छी तरह मालूम है कि अच्छी शिक्षा के बिना बच्चों का कहीं सफल होना संभव नहीं है। ऐसे में शायद उनके बच्चों के पास भी पिता की राह पर चलने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। वे मासूमियत के साथ सवाल पूछते हैं क्या किसानी ही उनके लिए अभिशाप बन गई है? क्या उनके बच्चे किसान-मजदूर ही बनने के लिए पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की हालत का गंभीरता के साथ अध्ययन कर इसका हल निकालना चाहिए।

विज्ञापन


आस मुहम्मद ने अमर उजाला को बताया कि खेती के लिए ट्यूबवेल चाहिए। लेकिन एक-एक ट्यूबवेल का बिजली का बिल प्रति वर्ष 25 हजार रुपये तक होता है। इस प्रकार हर साल एक लाख रुपये तक बिजली का बिल उन्हें चुकाना पड़ता है। दो ट्रैक्टरों का लोन समय पर चुकाने की बाध्यता रहती है। समय पर लोन न चुका पाने पर कंपनी लोन राशि पर ब्याज बढ़ा देती है। वहीं खुद उन्हें पिछले वर्ष के गन्ने के दाम अब तक नहीं मिले हैं। ऐसे में कोई किसान बिजली के बिलों और अपने कर्जों का समय पर भुगतान कैसे करे। यह उनके जैसे करोड़ों किसानों के लिए बड़ा सवाल है।

विज्ञापन
विज्ञापन






 

हमारे बच्चे मजदूर ही बनेंगे?

धर्मेंद्र सिंह अमरोहा के किसान हैं। उनके पास भी अच्छी खेती है, लेकिन वे भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। उनके तीन बच्चे भी नजदीक के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी स्कूलों में कोई पढ़ाई नहीं होती। वहां के टीचर समय पर स्कूल नहीं आते और आने के बाद भी बच्चों पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है उनके बच्चों के पास भी मजदूर बनने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा।

भाई की कमाई से चलता है घर-खर्च

उत्तराखंड के किसान चंदन बिष्ट बताते हैं कि उनका छोटा भाई सेना में है। घर में पांच एकड़ से ज्यादा किसानी है, लेकिन पहाड़ों में कम उत्पादन होने के कारण उससे परिवार के सालभर की अनाज की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं। भाई की तनख्वाह से घर का खर्च तो चल जाता है, लेकिन इससे केवल घर की सामान्य जरूरतें ही पूरी हो पाती हैं। उनके और उनके भाई को मिलाकर कुल पांच बच्चे घर में हैं। उन सबकी अच्छे स्कूलों में पढ़ाई का खर्च इतना ज्यादा होता है कि पूरी परिवार की आर्थिक क्षमता बच्चों की शिक्षा पर ही खर्च हो जाती है।

चंदन सिंह बताते हैं कि उनका बड़ा बेटा इस वर्ष बारहवीं की परीक्षा पास कर मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रहा है। लेकिन उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वे बच्चे की इच्छा पूरी कर पाएं और महंगी कोचिंग का खर्च उठा पाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना पड़ेगा कि वह जिसकी हिमायती होने का दावा करती है उसकी जमीनी स्थिति क्या है। उसे कम से कम हमारे बच्चों की शिक्षा पूर्णतया मुफ्त कर देनी चाहिए। आखिर इस महंगी शिक्षा का खर्च कोई किसान परिवार कैसे उठा पाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed