किसान आंदोलन स्थगित: दिल्ली की तीनों सीमाओं पर रहने वालों ने ली राहत की सांस, कहा- समय की होगी बचत
बीते वर्ष 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की सीमाओं को घेरा था। इसको देखते हुए पुलिस और अर्द्धसैनिक बल ने दिल्ली आने वाले सभी रास्तों को कंक्रीट व कांटे वाली तारों समेत बैरिकेडिंग से बंद कर दिया था। साथ ही कच्चे रास्तों को भी खोदकर अवरोध पैदे कर दिए गए थे।
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एक साल से भी लंबे चले आंदोलन के बाद किसानों के घर वापसी के फैसले के पर दिल्ली की तीनों सीमाओं के आसपास रहने वाले लोगों ने राहत की सांसें ली हैं। किसानों का आंदोलन खत्म होने से अब सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पूरी तरह से जाम मुक्त हो जाएंगे। ऐसे में अब घंटों का सफर सिर्फ मिनटों में तय हो सकेगा।
बीते वर्ष 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की सीमाओं को घेरा था। इसको देखते हुए पुलिस और अर्द्धसैनिक बल ने दिल्ली आने वाले सभी रास्तों को कंक्रीट व कांटे वाली तारों समेत बैरिकेडिंग से बंद कर दिया था। साथ ही कच्चे रास्तों को भी खोदकर अवरोध पैदे कर दिए गए थे। इस वजह से आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई थीं।
कुछ समय बाद स्थानीय लोगों को आंदोलन के बीच से गुजरने का रास्ता दिया गया था। लेकिन, रोजाना लगने वाले जाम की वजह से मजबूरन लोगों को मिनटों का सफर घंटों में तय करना पड़ता था।
जाम से मिलेगी मुक्ति
सिंघु गांव निवासी विनोद सहरावत कहते हैं कि आंदोलन में उतार-चढ़ाव के साथ गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती थीं। गांव के लोग बंदिशों में रहने के लिए मजबूर हो गए थे। अपने ही गांव में आने के लिए पुलिस को पहचान पत्र दिखाकर आना पड़ता था। इस वजह से रिश्तेदारों को आने में अधिक परेशानी होती थी। कुछ मिनटों का सफर मजबूरन घंटों में तय करना पड़ता था। अब आंदोलन वापसी होने से किसानों के साथ-साथ हमें भी राहत मिलेगी।वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पार कर झज्जर जाने वाले आशीष ने कहा कि उन्हें काम के सिलसिले में झज्जर जाने के लिए गाजीपुर और टीकरी बॉर्डर से निकलने से परेशानी का सामना करना पड़ता था। गाजियाबाद से प्रतिदिन आईटीओ स्थित अपनी दुकान पर आने वाले प्रवीण मिश्रा ने कहा कि उनकी आईटीओ पर स्टेशनरी की दुकान है। ऐसे में प्रतिदिन गाजीपुर बॉर्डर को पार कर आना पड़ता था। रास्ता बंद होने की वजह से सुबह-शाम जाम में फंसना पड़ता था।
दूसरी ओर सिंघु बॉर्डर निवासी मनकीत आंदोलन समाप्त होने से खुश नहीं हैं। वह कहते हैं कि आंदोलन में वह अक्सर सेवा करने के लिए जाया करते थे। कई लोगों से अच्छे संबंध बन गए थे। अब आंदोलन समाप्त होने से मन में खालीपन रहेगा।
अपने ही गांव में कैदियों की तरह रह रहे थे। अब कुछ राहत मिलने के आसार हैं। कुछ किसानों ने जाना शुरू भी कर दिया है।
-विनोद, सिंघु बॉर्डर निवासी
गांव से आने-जाने पर महिलाओं को भी विशेष परेशानी होती थी। गांव में बेटी-बहू को आने जाने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता था।
-शीला, सिंघु बॉर्डर निवासी
एक बार माताजी की तबितय बिगड़ गई थी। गांव का रास्ता बंद होने की वजह से काफी परेशानी हुई थी। रास्ता खुलना से अब राहत मिलने की उम्मीद है।
-कृष्णा, सिंधु बॉर्डर
गाजीपुर और टीकरी दोनों ही बॉर्डरों को पार कर झज्जर जाना होता था। आने- जाने में समय की बहुत खपत हो जाती थी। इस वजह से कई बार समय पर नहीं पहुंच पाता था।
-आशीष कुमार, वैशाली
आईटीओ स्थित अपनी दुकान पर प्रतिदिन गाजीपुर बॉर्डर को पार कर आता हूं। रोजाना घंटों जाम से जूझना पड़ता है। इस वजह से समय और गाड़ी के ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। रास्ता खुलने से दोनों की बचत होगी।
-प्रवीण मिश्रा, खोड़ा, गाजियाबाद
गाजियाबाद के पटेल नगर से दिल्ली के आजादपुर जाना होता है। इस वजह से गाजीपुर बॉर्डर पर जूझना पड़ता था। हालांकि, एक तरफ का रास्ता खुलने से थोड़ी राहत मिली थी।
-नवेंद्र चौधरी, पटेल नगर, गाजियाबाद