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दिल्ली में किसानों की महापंचायत: शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, इन रास्तों पर जाने से बचें
Tue, 21 Jul 2026 08:21 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Tue, 21 Jul 2026 08:21 AM IST
सार
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के बाद किसान संगठनों की आमद प्रशासन की परेशानियों को बढ़ा सकती है। इस विरोध प्रदर्शन और रैली को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करवाने समेत किसानों की मांगो को लेकर विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा। इसमें 550 किसान संघ और सिविल सोसाइटी के लोग शामिल होंगे। इस विरोध प्रदर्शन और रैली को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है।
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एडवाइजरी के मुताबिक, सुबह 8:30 बजे से आवश्यकतानुसार यातायात प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन लागू किए जा सकते हैं। पुलिस ने यात्रियों को सत्याग्रह मार्ग, वेलोड्रोम रोड और राजघाट डीटीसी डिपो रोड के आसपास के प्रभावित रास्तों से बचने की सलाह दी है। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को समय से पहले यात्रा की योजना बनाने का अनुरोध किया गया है।
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के बाद किसान संगठनों की आमद प्रशासन की परेशानियों को बढ़ा सकती है। यह बात और है कि युवा आंदोलन की पृष्ठभूमि में किसान संगठन इसे किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का नाम दे रहे थे, पर इसके प्रमुख घटक दल के नेता गुरनाम सिंह चढूनी की गिरफ्तारी और कॉकरोच पार्टी के आंदोलन का कितना प्रभाव होगा यह देखना होगा।
वैसे, किसान नेताओं का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार संधि लागू होने से गेहूं, धान, डेयरी और सब्जी उत्पादक किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। सस्ते आयात से मंडियों में दाम गिरेंगे और छोटे किसानों की जमीनें कॉरपोरेट के हाथों में जाएंगी। सरकार से मांग है कि समझौते को तुरंत रद्द किया जाए और एमएसपी को कानूनी गारंटी दी जाए।
वैसे, किसान नेताओं का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार संधि लागू होने से गेहूं, धान, डेयरी और सब्जी उत्पादक किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। सस्ते आयात से मंडियों में दाम गिरेंगे और छोटे किसानों की जमीनें कॉरपोरेट के हाथों में जाएंगी। सरकार से मांग है कि समझौते को तुरंत रद्द किया जाए और एमएसपी को कानूनी गारंटी दी जाए।