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Faridabad News: लावारिस कुत्ते के काटने के दो सप्ताह बाद कार चलाते हुए बिगड़ी युवक की तबीयत
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बल्लभगढ़ आदर्श कॉलोनी के अनिल भाटी को एक सप्ताह कुत्ते ने काटा था तो उसकी सोमवार शाम को अचानक त
- फोटो : मृतका सृष्टि का फाइल फोटो। स्त्रोत: परिजन
रेबीज के लक्षण दिखने पर दिल्ली किया रेफर, समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन न लगवाने से बढ़ी गंभीरता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। लावारिस कुत्ते के काटने के करीब दो सप्ताह बाद 30 वर्षीय युवक की कार चलाते समय अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे उसकी कार सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसा सोमवार रात एनआईटी-3 क्षेत्र में हुआ। आसपास मौजूद लोगों ने युवक को तत्काल बीके सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के दौरान उसमें रेबीज के संभावित लक्षण मिलने पर उसे गंभीर अवस्था में दिल्ली के उच्च केंद्र रेफर कर दिया।
जानकारी के अनुसार आदर्श नगर निवासी मोनू एक निजी कंपनी में कार्यरत है। करीब दो सप्ताह पहले उसे एक लावारिस कुत्ते ने काट लिया था। शुरुआती दिनों में उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सोमवार रात वह कार से जा रहा था, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और वाहन अनियंत्रित होकर खंभे से टकरा गया। हालांकि हादसे में उसे गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने युवक की जांच की और उसकी हालत चिंताजनक मिलने पर बिना समय गंवाए दिल्ली रेफर कर दिया।
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हाथ-पैर बांधकर अस्पताल लाना पड़ा, पानी देखकर घबराया युवक
युवक की हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उसे हाथ-पैर बांधकर बीके सिविल अस्पताल लाना पड़ा। आसपास मौजूद लोगों से दूर रहने की कोशिश कर रहा था और बेहद चिड़चिड़ा व्यवहार कर रहा था। चिकित्सकों ने इसे रेबीज के संभावित लक्षणों से जोड़कर देखा। बाद में उसे गंभीर हालत में दिल्ली रेफर किया गया। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाना जानलेवा साबित हो सकता है, जबकि शहर में पिछले तीन वर्षों में 81 हजार से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं।
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पानी देखकर घबराहट
अस्पताल पहुंचने पर युवक में पानी देखकर घबराने (हाइड्रोफोबिया), लोगों से दूर रहने की कोशिश, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और असामान्य व्यवहार करने लगा। ये रेबीज के गंभीर लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे मरीजों में तेज बेचैनी, घबराहट और मानसिक असंतुलन भी देखा जाता है।
दो दिन देरी से लगा था पहला एंटी रेबीज इंजेक्शन
परिजनों के अनुसार यह भी सामने आया कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन समय पर नहीं लग पाया और पहली खुराक करीब दो दिन की देरी से लगी थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामलों में उपचार में किसी भी प्रकार की देरी जोखिम बढ़ा सकती है।
कई बार एंबुलेंस से उतरने व भागने की कोशिश
दिल्ली रेफर किए जाने के दौरान भी युवक का व्यवहार असामान्य बना रहा। बताया गया कि वह अपने साथ एंबुलेंस में किसी भी परिजन को बैठने नहीं देना चाहता था। उसे लोगों से डर महसूस हो रहा था और रास्ते में कई बार एंबुलेंस से उतरने तथा भागने की कोशिश भी की। स्वास्थ्यकर्मियों और परिजनों ने काफी मशक्कत के बाद उसे संभालकर दिल्ली के अस्पताल पहुंचाया।
समय पर इलाज ही बचाव, घरेलू नुस्खों से बचें : डॉ. मोहित अग्रवाल
बीके अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद एंटीसेप्टिक लगाकर 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन की पहली खुराक अवश्य लेनी चाहिए व पूरा कोर्स पूरा करना चाहिए। गहरे घाव होने पर डॉक्टर की सलाह से रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन भी लगवाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मिर्च, हल्दी या अन्य घरेलू नुस्खे नुकसानदायक हो सकते हैं। रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद बीमारी का इलाज लगभग संभव नहीं होता, इसलिए समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। लावारिस कुत्ते के काटने के करीब दो सप्ताह बाद 30 वर्षीय युवक की कार चलाते समय अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे उसकी कार सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसा सोमवार रात एनआईटी-3 क्षेत्र में हुआ। आसपास मौजूद लोगों ने युवक को तत्काल बीके सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के दौरान उसमें रेबीज के संभावित लक्षण मिलने पर उसे गंभीर अवस्था में दिल्ली के उच्च केंद्र रेफर कर दिया।
जानकारी के अनुसार आदर्श नगर निवासी मोनू एक निजी कंपनी में कार्यरत है। करीब दो सप्ताह पहले उसे एक लावारिस कुत्ते ने काट लिया था। शुरुआती दिनों में उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सोमवार रात वह कार से जा रहा था, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और वाहन अनियंत्रित होकर खंभे से टकरा गया। हालांकि हादसे में उसे गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने युवक की जांच की और उसकी हालत चिंताजनक मिलने पर बिना समय गंवाए दिल्ली रेफर कर दिया।
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हाथ-पैर बांधकर अस्पताल लाना पड़ा, पानी देखकर घबराया युवक
युवक की हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उसे हाथ-पैर बांधकर बीके सिविल अस्पताल लाना पड़ा। आसपास मौजूद लोगों से दूर रहने की कोशिश कर रहा था और बेहद चिड़चिड़ा व्यवहार कर रहा था। चिकित्सकों ने इसे रेबीज के संभावित लक्षणों से जोड़कर देखा। बाद में उसे गंभीर हालत में दिल्ली रेफर किया गया। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाना जानलेवा साबित हो सकता है, जबकि शहर में पिछले तीन वर्षों में 81 हजार से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं।
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पानी देखकर घबराहट
अस्पताल पहुंचने पर युवक में पानी देखकर घबराने (हाइड्रोफोबिया), लोगों से दूर रहने की कोशिश, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और असामान्य व्यवहार करने लगा। ये रेबीज के गंभीर लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे मरीजों में तेज बेचैनी, घबराहट और मानसिक असंतुलन भी देखा जाता है।
दो दिन देरी से लगा था पहला एंटी रेबीज इंजेक्शन
परिजनों के अनुसार यह भी सामने आया कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन समय पर नहीं लग पाया और पहली खुराक करीब दो दिन की देरी से लगी थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामलों में उपचार में किसी भी प्रकार की देरी जोखिम बढ़ा सकती है।
कई बार एंबुलेंस से उतरने व भागने की कोशिश
दिल्ली रेफर किए जाने के दौरान भी युवक का व्यवहार असामान्य बना रहा। बताया गया कि वह अपने साथ एंबुलेंस में किसी भी परिजन को बैठने नहीं देना चाहता था। उसे लोगों से डर महसूस हो रहा था और रास्ते में कई बार एंबुलेंस से उतरने तथा भागने की कोशिश भी की। स्वास्थ्यकर्मियों और परिजनों ने काफी मशक्कत के बाद उसे संभालकर दिल्ली के अस्पताल पहुंचाया।
समय पर इलाज ही बचाव, घरेलू नुस्खों से बचें : डॉ. मोहित अग्रवाल
बीके अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद एंटीसेप्टिक लगाकर 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन की पहली खुराक अवश्य लेनी चाहिए व पूरा कोर्स पूरा करना चाहिए। गहरे घाव होने पर डॉक्टर की सलाह से रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन भी लगवाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मिर्च, हल्दी या अन्य घरेलू नुस्खे नुकसानदायक हो सकते हैं। रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद बीमारी का इलाज लगभग संभव नहीं होता, इसलिए समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव है।