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Faridabad News: आज से बढ़ सकता है यमुना का जलस्तर, बाढ़ से पहले अधूरी तैयारियों ने बढ़ाई चिंता
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हथनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 50 हजार क्यूसिक पानी, महावतपुर, शाहजहांपुर व छांयसा के पैंटून पुल हटाए
महावतपुर का पैंटून पुल हटाए जाने के दौरान बहकर गांव मंझावली पहुंच गया
27 तटीय क्षेत्रों में पिछले साल भारी तबाही मची थी
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बाद यमुना नगर स्थित हथनीकुंड बैराज से शुक्रवार को 50 हजार क्यूसिक पानी छोड़े जाने के बाद फरीदाबाद में यमुना के जलस्तर को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के अनुसार, यह पानी सोमवार शाम तक फरीदाबाद पहुंचने की संभावना है। हालांकि विभाग का दावा है कि फिलहाल फरीदाबाद में इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन मानसून के दस्तक देने से पहले बाढ़ सुरक्षा कार्य अधूरे होने के कारण यमुना किनारे बसे गांवों के लोगों और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
लोक निर्माण विभाग ने एहतियात के तौर पर महावतपुर, शाहजहांपुर और छांयसा के पैंटून पुलों को हटा दिया है, क्योंकि जलस्तर बढ़ने पर इनके बहने का खतरा रहता है। विभाग की ओर से गांव महावतपुर का पैंटून पुल को हटाया जा रहा था लेकिन जलस्तर ज्यादा होने की वजह से पुल बहकर गांव मंझावली पहुंच गया।
टीम ने गांव मंझावली में जाकर पुल को पकड़ लिया। वहीं पैंटून पुल हटने की वजह से यमुना नदी के उस पार खेतों में सिचाई करने के लिए किसानों को अब यमुना पार जाने के लिए मोहना पुल का सहारा लेना होगा। खरीफ सीजन में धान रोपाई, ज्वार, बाजरा, मक्का तथा दलहन-तिलहन की बुआई के लिए बड़ी संख्या में किसान यमुना पार उत्तर प्रदेश की सीमा में अपने खेतों पर आते व जाते हैं। अगर आने वाले दिनों में यदि जलस्तर तेजी से बढ़ा, तो उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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पिछले वर्ष 500 परिवार बेघर हो गए थे
पिछले वर्ष आई बाढ़ की तबाही अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। यमुना के बढ़े जलस्तर से 27 तटवर्ती इलाके प्रभावित हुए थे। बसंतपुर गांव में सैकड़ों घर जलमग्न हो गए थे। प्रशासन ने 14 गांवों को संवेदनशील घोषित किया था। करीब 500 परिवार बेघर हो गए थे और तीन हजार से अधिक मकानों को खाली कराना पड़ा था। एक लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई थी, उनका अभी तक सरकार की ओर से मुआवजा नहीं मिला है।
पत्थरों के कटाव बनकर तैयार, 10 प्रतिशत काम बाकी
बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन ने करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा दीवार, बड़ा तालाब, पत्थरों की ठोकर और अन्य स्थायी इंतजाम करने का दावा किया था, लेकिन अधिकांश कार्य अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। अलीपुर तिलौरी, किदावली, मोहना और छांयसा के पास यमुना किनारे कटाव रोकने के लिए मई में पत्थरों की ठोकर बनाने का काम शुरू हुआ था। इन कार्यों को 30 जून तक पूरा किया जाना था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी निर्माण जारी है। विभाग का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम एक सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा।
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता गौरव लांबा के अनुसार, हथनीकुंड से छोड़े गए 50 हजार क्यूसिक पानी का फरीदाबाद में विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि यहां प्रभाव तब दिखाई देता है जब एक लाख क्यूसिक या उससे अधिक पानी छोड़ा जाता है। फिलहाल यमुना का बहाव क्षेत्र खाली है और अधिकांश पानी उसी में समा जाएगा।
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाश लाल का कहना है कि ओखला बैराज से भी करीब 25 से 30 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। आने वाले दिनों में बरसात होने की वजह से यमुना का जलस्तर बढ़ जाएगा। इस वजह से उनकी टीम की ओर से पहले ही पैंटून पुल को हटा लिया गया है।
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महावतपुर का पैंटून पुल हटाए जाने के दौरान बहकर गांव मंझावली पहुंच गया
27 तटीय क्षेत्रों में पिछले साल भारी तबाही मची थी
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बाद यमुना नगर स्थित हथनीकुंड बैराज से शुक्रवार को 50 हजार क्यूसिक पानी छोड़े जाने के बाद फरीदाबाद में यमुना के जलस्तर को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के अनुसार, यह पानी सोमवार शाम तक फरीदाबाद पहुंचने की संभावना है। हालांकि विभाग का दावा है कि फिलहाल फरीदाबाद में इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन मानसून के दस्तक देने से पहले बाढ़ सुरक्षा कार्य अधूरे होने के कारण यमुना किनारे बसे गांवों के लोगों और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
लोक निर्माण विभाग ने एहतियात के तौर पर महावतपुर, शाहजहांपुर और छांयसा के पैंटून पुलों को हटा दिया है, क्योंकि जलस्तर बढ़ने पर इनके बहने का खतरा रहता है। विभाग की ओर से गांव महावतपुर का पैंटून पुल को हटाया जा रहा था लेकिन जलस्तर ज्यादा होने की वजह से पुल बहकर गांव मंझावली पहुंच गया।
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टीम ने गांव मंझावली में जाकर पुल को पकड़ लिया। वहीं पैंटून पुल हटने की वजह से यमुना नदी के उस पार खेतों में सिचाई करने के लिए किसानों को अब यमुना पार जाने के लिए मोहना पुल का सहारा लेना होगा। खरीफ सीजन में धान रोपाई, ज्वार, बाजरा, मक्का तथा दलहन-तिलहन की बुआई के लिए बड़ी संख्या में किसान यमुना पार उत्तर प्रदेश की सीमा में अपने खेतों पर आते व जाते हैं। अगर आने वाले दिनों में यदि जलस्तर तेजी से बढ़ा, तो उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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पिछले वर्ष 500 परिवार बेघर हो गए थे
पिछले वर्ष आई बाढ़ की तबाही अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। यमुना के बढ़े जलस्तर से 27 तटवर्ती इलाके प्रभावित हुए थे। बसंतपुर गांव में सैकड़ों घर जलमग्न हो गए थे। प्रशासन ने 14 गांवों को संवेदनशील घोषित किया था। करीब 500 परिवार बेघर हो गए थे और तीन हजार से अधिक मकानों को खाली कराना पड़ा था। एक लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई थी, उनका अभी तक सरकार की ओर से मुआवजा नहीं मिला है।
पत्थरों के कटाव बनकर तैयार, 10 प्रतिशत काम बाकी
बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन ने करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा दीवार, बड़ा तालाब, पत्थरों की ठोकर और अन्य स्थायी इंतजाम करने का दावा किया था, लेकिन अधिकांश कार्य अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। अलीपुर तिलौरी, किदावली, मोहना और छांयसा के पास यमुना किनारे कटाव रोकने के लिए मई में पत्थरों की ठोकर बनाने का काम शुरू हुआ था। इन कार्यों को 30 जून तक पूरा किया जाना था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी निर्माण जारी है। विभाग का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम एक सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा।
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता गौरव लांबा के अनुसार, हथनीकुंड से छोड़े गए 50 हजार क्यूसिक पानी का फरीदाबाद में विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि यहां प्रभाव तब दिखाई देता है जब एक लाख क्यूसिक या उससे अधिक पानी छोड़ा जाता है। फिलहाल यमुना का बहाव क्षेत्र खाली है और अधिकांश पानी उसी में समा जाएगा।
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाश लाल का कहना है कि ओखला बैराज से भी करीब 25 से 30 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। आने वाले दिनों में बरसात होने की वजह से यमुना का जलस्तर बढ़ जाएगा। इस वजह से उनकी टीम की ओर से पहले ही पैंटून पुल को हटा लिया गया है।