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Faridabad News: सुबह रेहड़ी पर काम, फिर स्कूल की पढ़ाई, हासिल किए 94 फीसदी
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-वाणिज्य संकाय में 500 में से 471 अंक प्राप्त कर रहे स्कूल में प्रथम
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हर रोज सुबह-शाम पिता के साथ रेहड़ी लगाकर हाथ बंटाने वाले विद्यार्थी ने सफलता के शिखर को छुआ है। मॉडर्न पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी गगन ने 12वीं कक्षा में वाणिज्य संकाय में 500 में से 471 अंक प्राप्त कर अपने स्कूल में प्रथम स्थान हासिल कर माता-पिता व स्कूल का नाम रोशन किया है। हर दिन सुबह पिता के साथ रेहड़ी लगाता है और उसके बाद स्कूल जाकर पढ़ाई करता था।
शाम को भी पिता के साथ रेहड़ी लगाता है। इसके बावजूद रोजाना पांच से आठ घंटे पढ़ाई करके गगन ने सफलता हासिल की है। इस मेधावी छात्र को स्कूल प्रबंधन की ओर फीस में विशेष छूट दी जाती थी। इसके साथ ही उन्हें एक निजी कोचिंग संस्थान की ओर से मुफ्त शिक्षण दिया जा रहा था। वह अपने मेहनत के बल पर सीए की पढ़ाई करना चाहते हैं। वह इस सफलता के पीछे अपने माता-पिता का हाथ मानते हैं। उनका कहना है कि अब वह दिल्ली विश्वविद्यालय के बेहतरीन कॉलेज में दाखिला लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं।
गगन का कहना है कि वह सुबह आठ बजे रेहड़ी लेकर दुकान पर चला जाता है। इसके बाद वह दुकान लगाने के बाद स्कूल चला जाता था। स्कूल से करीब तीन बजे वापस आने के बाद कुछ देर दुकान पर बैठकर घर जाता था। इसके बाद वह दोबारा शाम पांच बजे आता था। करीब एक घंटे पिता का हाथ बंटाने के बाद वह वापस घर लौट आता है।
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कुल अंक
500/ 471
अर्थशास्त्र : 94
बिजनेस : 96
एकाउंट्स : 95
गणित : 93
अग्रेजी : 93
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हर रोज सुबह-शाम पिता के साथ रेहड़ी लगाकर हाथ बंटाने वाले विद्यार्थी ने सफलता के शिखर को छुआ है। मॉडर्न पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी गगन ने 12वीं कक्षा में वाणिज्य संकाय में 500 में से 471 अंक प्राप्त कर अपने स्कूल में प्रथम स्थान हासिल कर माता-पिता व स्कूल का नाम रोशन किया है। हर दिन सुबह पिता के साथ रेहड़ी लगाता है और उसके बाद स्कूल जाकर पढ़ाई करता था।
शाम को भी पिता के साथ रेहड़ी लगाता है। इसके बावजूद रोजाना पांच से आठ घंटे पढ़ाई करके गगन ने सफलता हासिल की है। इस मेधावी छात्र को स्कूल प्रबंधन की ओर फीस में विशेष छूट दी जाती थी। इसके साथ ही उन्हें एक निजी कोचिंग संस्थान की ओर से मुफ्त शिक्षण दिया जा रहा था। वह अपने मेहनत के बल पर सीए की पढ़ाई करना चाहते हैं। वह इस सफलता के पीछे अपने माता-पिता का हाथ मानते हैं। उनका कहना है कि अब वह दिल्ली विश्वविद्यालय के बेहतरीन कॉलेज में दाखिला लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं।
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गगन का कहना है कि वह सुबह आठ बजे रेहड़ी लेकर दुकान पर चला जाता है। इसके बाद वह दुकान लगाने के बाद स्कूल चला जाता था। स्कूल से करीब तीन बजे वापस आने के बाद कुछ देर दुकान पर बैठकर घर जाता था। इसके बाद वह दोबारा शाम पांच बजे आता था। करीब एक घंटे पिता का हाथ बंटाने के बाद वह वापस घर लौट आता है।
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कुल अंक
500/ 471
अर्थशास्त्र : 94
बिजनेस : 96
एकाउंट्स : 95
गणित : 93
अग्रेजी : 93