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Faridabad News: परिवार की जिम्मेदारी उठा रहीं महिलाएं

Sun, 01 Mar 2026 11:23 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:23 PM IST
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Women taking responsibility for the family
संवाद न्यूज एजेंसी
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बल्लभगढ़। जब कमाने वाला एक मात्र व्यक्ति पूरे परिवार को छोड़ कर चला जाता है तो किसी न किसी को जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। ऐसा ही हैं 21 साल की सोनाली जो कोरोना में पिता की मौत के बाद अपनी मां और बहनों की जिम्मेदारी ऑटो चलाकर उठा रही हैं । वहीं 37 साल की दिव्यांग महिला सोनिया ई रिक्शा चलाकर अपने पति की मदद कर बेटी को अच्छी शिक्षा देने की कोशिश कर रही हैं।




बीच में पढ़ाई छोड़ ऑटो चलाकर उठाई जिम्मेदारी

सेक्टर-22 की शिव कॉलोनी में रहने वाली 22 वर्षीय सोनाली की उम्र जब 18 साल की थी तो उनके सिर से पिता का साया उठ गया। पिता के जाने के बाद बड़ी बेटी होने के चलते उनके ऊपर तीन बहनों के साथ मां की देखभाल की जिम्मेदारी आ गई। सोनाली ने बताया कि उनके पिता ऑटो चलाते थे। वह भी अपने पिता के ऑटो को लेकर सड़कों पर उतर गई । उनकी मां पुष्पा रानी घर पर सिलाई का काम करती हैं। इस दौरान उन्हें परेशानियां भी बहुत आती थीं। शुरुआत में कई बार रोड पर उन्हें अभद्र टिप्पणियां भी सुनने को मिलीं लेकिन उसने हार नहीं मानी और वह आज बल्लभगढ़ से एनआईटी क्षेत्र में ऑटो चलाती हैं।
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बेटी को देना चाहती हैं अच्छी शिक्षा
हरकेश नगर कॉलोनी की रहने वाली 37 साल की सोनिया ने बताया कि वह दिव्यांग हैं लेकिन मजबूरी और हालातों से लड़ते हुए आज पुरुषों की तरह फरीदाबाद की सड़कों पर ई-रिक्शा चला रही हैं। एक पैर से दिव्यांग सोनिया के लिए खड़ा होना और चलना तक आसान नहीं, लेकिन हिम्मत और हौसले के दम पर वो दिन-रात रिक्शा चलाकर अपने परिवार का गुजारा कर रही हैं और अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रही हैं। सोनिया ने बताया कि करीब 15 साल पहले उनकी शादी अनिल से हुई थी। शुरू में सब कुछ ठीक चला लेकिन वक्त के साथ जिम्मेदारियां बढ़ीं और खर्चा भी। सोनिया की 13 साल की बेटी है जो इस वक्त आठवीं कक्षा में पढ़ रही है। पति अनपढ़ हैं और साफ-सफाई का काम करते हैं। 8 से 9 हजार रुपये महीने की कमाई में घर चलना मुश्किल हो गया। उन्होंने एक हैंडीकैप्ड स्कूटी के सहारे ई-रिक्शा चलाना सीखा और फाइनेंस पर एक रिक्शा ले लिया। पिछले दो साल से सोनिया लगातार रिक्शा चला रही हैं।
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