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Faridabad News: 9.6 किलो का ट्यूमर निकाल महिला की बचाई जान
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पेट में बढ़ती गांठ से परेशान थी महिला
फोटो - ट्यूमर को निकालने वाले डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ की टीम।
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए महिला के पेट से 9 किलो 600 ग्राम वजनी ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाई। ऑपरेशन के बाद मरीज सुरक्षित है और स्वस्थ हो रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, महिला लंबे समय से पेट में बढ़ती गांठ से परेशान थी, लेकिन शुरुआत में उसने इसे नजरअंदाज किया और देसी इलाज करवाती रही। हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।
डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि ट्यूमर के कारण मरीज को गंभीर दिक्कतें हो रही थीं और सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। समय पर इलाज नहीं मिलता तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी। अस्पताल प्रशासन ने इसे टीमवर्क और आधुनिक सुविधाओं की सफलता बताया है।
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सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने किया। उनके साथ डॉ. शिप्रा मिश्रा, डॉ. विशाल शर्मा और डॉ. संदीप सहित विशेषज्ञों की टीम मौजूद रही। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अमित चौधरी, डॉ. सुमित धांडा, डॉ. रीना और डॉ. प्रभजोत ने अहम भूमिका निभाई।
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फोटो - ट्यूमर को निकालने वाले डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ की टीम।
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए महिला के पेट से 9 किलो 600 ग्राम वजनी ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाई। ऑपरेशन के बाद मरीज सुरक्षित है और स्वस्थ हो रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, महिला लंबे समय से पेट में बढ़ती गांठ से परेशान थी, लेकिन शुरुआत में उसने इसे नजरअंदाज किया और देसी इलाज करवाती रही। हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।
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डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि ट्यूमर के कारण मरीज को गंभीर दिक्कतें हो रही थीं और सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। समय पर इलाज नहीं मिलता तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी। अस्पताल प्रशासन ने इसे टीमवर्क और आधुनिक सुविधाओं की सफलता बताया है।
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सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने किया। उनके साथ डॉ. शिप्रा मिश्रा, डॉ. विशाल शर्मा और डॉ. संदीप सहित विशेषज्ञों की टीम मौजूद रही। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अमित चौधरी, डॉ. सुमित धांडा, डॉ. रीना और डॉ. प्रभजोत ने अहम भूमिका निभाई।