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Faridabad News: विभाग प्रमुख के हस्ताक्षर के बिना मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाले छात्रों को नहीं मिलेगी पुरानी बीमारी की दवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी तीन नंबर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और प्रशिक्षण करने वाले डॉक्टरों को अगर पुरानी बीमारी की दवा लेनी है, तो वह अपने विभाग के प्रमुख से हस्ताक्षर करवा कर लाएंगे। अगर एचओडी के हस्ताक्षर नहीं होते हैं तो उनको मेडिकल कॉलेज से दवा नहीं मिलेगी। इसको लेकर अधिकारियों की ओर से दवा काउंटर पर नोटिस लगा दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज में करीब 2000 से अधिक विद्यार्थी और डॉक्टर प्रशिक्षण कर रहे हैं। वैसे तो उनकाे मेडिकल कॉलेज से उपचार मिल जाता है, लेकिन कई बार उनकी कोई पुरानी बीमारी होती है। जिसका वह बाहर किसी अन्य डॉक्टर से उपचार ले रहे होते हैं। वह उपचार लेने के बाद मेडिकल स्लिप पर दवा लिखवाकर मेडिकल कॉलेज से ले लेते थे। पहले उनको आसानी से यह दवा मिल जाती थी, लेकिन अब विद्यार्थियों व प्रशिक्षण करने वाले डॉक्टरों को अपने विभाग के प्रमुख यानी एचओडी से उस मेडिकल स्लिप पर हस्ताक्षर व मोहर लगवानी होगी। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनको मेडिकल कॉलेज से दवा नहीं मिलेगी। क्योंकि कई बार विद्यार्थी और इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टर मेडिकल कॉलेज से मिलने वाली दवा का मिस यूज करते हैं।
उसी को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया है। इसको लेकर स्टाफ काउंटर पर उनकी ओर से नोटिस भी लगा दिया गया है, ताकि कोई भी कर्मचारी किसी भी विद्यार्थी व प्रशिक्षण करने वाले डॉक्टर को बिना मोहर के कोई दवा ना दे सके। डीन डॉ. एके पांडे ने बताया कि इससे मेडिकल कॉलेज की दवा का जो भी व्यक्ति मिस यूज कर रहा है उस पर रोक लगाई जा सकती है।
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फरीदाबाद। एनआईटी तीन नंबर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और प्रशिक्षण करने वाले डॉक्टरों को अगर पुरानी बीमारी की दवा लेनी है, तो वह अपने विभाग के प्रमुख से हस्ताक्षर करवा कर लाएंगे। अगर एचओडी के हस्ताक्षर नहीं होते हैं तो उनको मेडिकल कॉलेज से दवा नहीं मिलेगी। इसको लेकर अधिकारियों की ओर से दवा काउंटर पर नोटिस लगा दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज में करीब 2000 से अधिक विद्यार्थी और डॉक्टर प्रशिक्षण कर रहे हैं। वैसे तो उनकाे मेडिकल कॉलेज से उपचार मिल जाता है, लेकिन कई बार उनकी कोई पुरानी बीमारी होती है। जिसका वह बाहर किसी अन्य डॉक्टर से उपचार ले रहे होते हैं। वह उपचार लेने के बाद मेडिकल स्लिप पर दवा लिखवाकर मेडिकल कॉलेज से ले लेते थे। पहले उनको आसानी से यह दवा मिल जाती थी, लेकिन अब विद्यार्थियों व प्रशिक्षण करने वाले डॉक्टरों को अपने विभाग के प्रमुख यानी एचओडी से उस मेडिकल स्लिप पर हस्ताक्षर व मोहर लगवानी होगी। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनको मेडिकल कॉलेज से दवा नहीं मिलेगी। क्योंकि कई बार विद्यार्थी और इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टर मेडिकल कॉलेज से मिलने वाली दवा का मिस यूज करते हैं।
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उसी को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया है। इसको लेकर स्टाफ काउंटर पर उनकी ओर से नोटिस भी लगा दिया गया है, ताकि कोई भी कर्मचारी किसी भी विद्यार्थी व प्रशिक्षण करने वाले डॉक्टर को बिना मोहर के कोई दवा ना दे सके। डीन डॉ. एके पांडे ने बताया कि इससे मेडिकल कॉलेज की दवा का जो भी व्यक्ति मिस यूज कर रहा है उस पर रोक लगाई जा सकती है।
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