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डायरी लिखकर बच्चों को बताएंगे तीसरे विश्व युद्ध का मंजर
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फरीदाबाद। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए कई छात्र-छात्राएं रविवार को सुरक्षित अपने घर पहुंच गए। जिले की बिटिया अकक्षिता, अभिषेक, खुशी और सदफ विमान से उतरे तो परिजन झूम उठे। परिजन बोले कि एक दिन पहले तक यह नहीं पता चल रहा था कि बच्चे सही सलामत हैं कि नहीं, वापस आ पाएंगे कि नहीं। यूक्रेन में तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात में फंसे भारतीय छात्र राजधानी कीव पर हुए हमले के बाद सहम गए थे। वहां रात को आपात सायरन, हॉस्टल की छत के ऊपर से उड़ते हुए लड़ाकू विमान देख डर गए, लेकिन घर लौटकर ज्यादातर छात्र अपने इस अनुभव को डायरी में लिखकर अपने बच्चों को बताना चाहते हैं। वह कहते हैं कि इतिहास के खौफनाक मंजर के बीच से वह बचकर निकले हैं। इसे अपनी यादों में समेट कर रखेंगे। वह भारतीय दूतावास को बार-बार धन्यवाद कर रहे हैं।
एमबीबीएस की महंगी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सके तो गए थे यूक्रेन
यूक्रेन के उजगोरोढ़ राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (विवि) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे पहले वर्ष के छात्रों ने बताया कि वे समर इन टेक व विंटर इन टेक के छात्र हैं। नीट काउंसलिंग के बाद दाखिले से वंचित छात्रों को यूक्रेन के उजगोरोढ़ राष्ट्रीय विवि में पढ़ाई गर्मी व सर्दी दो सत्र में दाखिले का मौका मिलता है। एक छात्र समर इन-टेक में दाखिले के लिए वहां पहुंचा। अन्य विंटर इन-टेक में यूक्रेन गए। यूक्रेन से लौटे छात्र अभिषेक ने बताया कि मुश्किल से कुछ सप्ताह ही वहां रहे और युद्ध की स्थिति ने सपनों पर पानी फेर दिया। घर वापसी से पहले उसने पापा को मैसेज लिखा कि अब हम अपने देश में होंगे। पापा मैं घर आ रहा हूं। अभिषेक ने बताया कि भारत के निजी विवि व मेडिकल कॉलेज से पांच से छह वर्षीय एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च एक करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाता है। ऐसे में बेहतर है कि वह विदेश में 35 से 40 लाख में पढ़ाई कर लें।
भारतीय दूतावास ने संपर्क किया तो जान में जान आई
बीते दो सप्ताह से घर में कोतूहल था। परिजन हर दस मिनट में फोन करते। पूछते सब ठीक है न। अंतरराष्ट्रीय स्तर की खबरें देख वह परेशान थे। तीन दिन पहले यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला हुआ। सोशल मीडिया यूक्रेन की राजधानी व रिहायशी क्षेत्र पर हुए हमले की जानकारी से भर गया। डर लगने लगा कि अब क्या होगा। मार्च में घर आने की तैयारी थी। हमले के बीच एयरपोर्ट बंद कर दिया गया। टिकट रद्द कर दी गई। सेक्टर-18 निवासी 19 वर्षीय अभिषेक वर्मा ने बताया कि भारतीय दूतावास ने संपर्क किया तो जान में जान आई। मैंने पापा को मैसेज लिखा, हम शायद हंगरी में लगे कैंप में ठहरेंगे। कल हम अपने देश में होंगे। वह यह सब अपनी डायरी में लिखने की तैयारी में है।
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तबाही के मंजर से निकल कर सुबह घर पहुंची खुशी
शहर की बिटिया खुशी दो माह पहले दिसंबर में यूक्रेन गई थी। खुशी ने बताया कि वहां सिर के ऊपर से लड़ाकू विमान गुजर रहे थे। नजदीकी शहर इवानो में कोतुहल था। लोग बॉर्डर की ओर निकल रहे थे। परिवार घर छोड़-छोड़कर जा रहे थे। वहीं, आम नागरिकों को प्रशासन प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दे रहे थे। सूचना मिली कि दूतावास की मदद से हम भारत लौटेंगे। हंगरी और जुहानी बॉर्डर के जरिए निकलेंगे। दूतावास ने विवि में पांच बस भेजी। एक सूची आई। इसमें 250 छात्रों के नाम थे। एक बस में 50 छात्र बिठाए गए। बस से सीधे बुडापेस्ट एयरपोर्ट पहुंचे। सुबह 9:30 बजे फ्लाइट भारत में उतरी। पिता संजय और मां प्रिंसी वहां इंतजार करते मिले। उनकी आंखों में आंसू थे।
घर आया तो चैन से सो गया सदफ
सेक्टर-37 निवासी सदफ एमबीबीएस करने यूक्रेन गया था। परिजन हर दस मिनट में उसका हालचाल ले रहे थे। पूर्व पंचायत समिति के चेयरमैन मोहम्मद खलील आजाद के बेटे सदफ के घर आने पर राजनीतिक गलियारे के लोग भी बधाई देने पहुंचे। इस बीच घर वापस लौटा सदफ कुछ लोगों से मिला और फिर चैन से सो गया। इससे पहले निर्मोही अ्खाड़ा अध्यक्ष सर्वेश्वर दास ने सदफ को मिठाई खिलाई। उसके ताऊ श्योकत आजाद ने बताया कि शनिवार रात दो बजे उसकी वापसी की सूचना मिली। हिसार के प्रोफेसर छत्रपाल कुंडू ने हर पाल सदफ की जानकारी ली। वहीं स्थानीय स्तर पर मंत्री व विधायक ने आश्वासन दिया कि मदद होगी, बेफिक्र रहो।
युद्ध के हूटर ने उड़ा दी थी नींद
ग्रेटर फरीदाबाद की वीआईपी सोसाइटी निवासी अकक्षिता डावला बताती हैं कि युद्ध घोषणा के लिए हूटर बज रहे थे। यूक्रेन की राजधानी कीव में जिस क्षेत्र पर हमला हुआ वह हॉस्टल से 800 किलोमीटर दूर था। घोषणा होने लगी सब अंदर रहें सब अंदर रहें। घर पर बात हुई तो परिजनों को सब बताया। पिता सुरेंद्र डावला और मां सुधा डावला तनाव में थे। हालांकि मैंने बताया कि हम पश्चिम में सबसे अंतिम छोर पर हैं। हमले पूर्व में हुए हैं। इस दौरान मन ही मन आवाज गूंज रही थी कि अब क्या होगा। रविवार को घर आए तो शांति मिली। डायरी लिखती हूं। अपने बच्चों को बताऊंगी कैसे घर लौटे।
यूक्रेन से भारत लौटने वाले बच्चों को हरियाणा में उनके घर तक सकुशल पहुंचाने के लिए एयरपोर्ट पर खास व्यवस्था की गई है। छात्रों के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। जिन बच्चों के परिजन उन्हें लेने एयरपोर्ट नहीं पहुंच पाए, उन्हें सुरक्षा कर्मियों की मदद से घर तक पहुंचाया जा रहा है।
- जितेंद्र कुमार, ओएसडी-2, डिवीजन कमिश्नर हरियाणा
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एमबीबीएस की महंगी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सके तो गए थे यूक्रेन
यूक्रेन के उजगोरोढ़ राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (विवि) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे पहले वर्ष के छात्रों ने बताया कि वे समर इन टेक व विंटर इन टेक के छात्र हैं। नीट काउंसलिंग के बाद दाखिले से वंचित छात्रों को यूक्रेन के उजगोरोढ़ राष्ट्रीय विवि में पढ़ाई गर्मी व सर्दी दो सत्र में दाखिले का मौका मिलता है। एक छात्र समर इन-टेक में दाखिले के लिए वहां पहुंचा। अन्य विंटर इन-टेक में यूक्रेन गए। यूक्रेन से लौटे छात्र अभिषेक ने बताया कि मुश्किल से कुछ सप्ताह ही वहां रहे और युद्ध की स्थिति ने सपनों पर पानी फेर दिया। घर वापसी से पहले उसने पापा को मैसेज लिखा कि अब हम अपने देश में होंगे। पापा मैं घर आ रहा हूं। अभिषेक ने बताया कि भारत के निजी विवि व मेडिकल कॉलेज से पांच से छह वर्षीय एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च एक करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाता है। ऐसे में बेहतर है कि वह विदेश में 35 से 40 लाख में पढ़ाई कर लें।
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भारतीय दूतावास ने संपर्क किया तो जान में जान आई
बीते दो सप्ताह से घर में कोतूहल था। परिजन हर दस मिनट में फोन करते। पूछते सब ठीक है न। अंतरराष्ट्रीय स्तर की खबरें देख वह परेशान थे। तीन दिन पहले यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला हुआ। सोशल मीडिया यूक्रेन की राजधानी व रिहायशी क्षेत्र पर हुए हमले की जानकारी से भर गया। डर लगने लगा कि अब क्या होगा। मार्च में घर आने की तैयारी थी। हमले के बीच एयरपोर्ट बंद कर दिया गया। टिकट रद्द कर दी गई। सेक्टर-18 निवासी 19 वर्षीय अभिषेक वर्मा ने बताया कि भारतीय दूतावास ने संपर्क किया तो जान में जान आई। मैंने पापा को मैसेज लिखा, हम शायद हंगरी में लगे कैंप में ठहरेंगे। कल हम अपने देश में होंगे। वह यह सब अपनी डायरी में लिखने की तैयारी में है।
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तबाही के मंजर से निकल कर सुबह घर पहुंची खुशी
शहर की बिटिया खुशी दो माह पहले दिसंबर में यूक्रेन गई थी। खुशी ने बताया कि वहां सिर के ऊपर से लड़ाकू विमान गुजर रहे थे। नजदीकी शहर इवानो में कोतुहल था। लोग बॉर्डर की ओर निकल रहे थे। परिवार घर छोड़-छोड़कर जा रहे थे। वहीं, आम नागरिकों को प्रशासन प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दे रहे थे। सूचना मिली कि दूतावास की मदद से हम भारत लौटेंगे। हंगरी और जुहानी बॉर्डर के जरिए निकलेंगे। दूतावास ने विवि में पांच बस भेजी। एक सूची आई। इसमें 250 छात्रों के नाम थे। एक बस में 50 छात्र बिठाए गए। बस से सीधे बुडापेस्ट एयरपोर्ट पहुंचे। सुबह 9:30 बजे फ्लाइट भारत में उतरी। पिता संजय और मां प्रिंसी वहां इंतजार करते मिले। उनकी आंखों में आंसू थे।
घर आया तो चैन से सो गया सदफ
सेक्टर-37 निवासी सदफ एमबीबीएस करने यूक्रेन गया था। परिजन हर दस मिनट में उसका हालचाल ले रहे थे। पूर्व पंचायत समिति के चेयरमैन मोहम्मद खलील आजाद के बेटे सदफ के घर आने पर राजनीतिक गलियारे के लोग भी बधाई देने पहुंचे। इस बीच घर वापस लौटा सदफ कुछ लोगों से मिला और फिर चैन से सो गया। इससे पहले निर्मोही अ्खाड़ा अध्यक्ष सर्वेश्वर दास ने सदफ को मिठाई खिलाई। उसके ताऊ श्योकत आजाद ने बताया कि शनिवार रात दो बजे उसकी वापसी की सूचना मिली। हिसार के प्रोफेसर छत्रपाल कुंडू ने हर पाल सदफ की जानकारी ली। वहीं स्थानीय स्तर पर मंत्री व विधायक ने आश्वासन दिया कि मदद होगी, बेफिक्र रहो।
युद्ध के हूटर ने उड़ा दी थी नींद
ग्रेटर फरीदाबाद की वीआईपी सोसाइटी निवासी अकक्षिता डावला बताती हैं कि युद्ध घोषणा के लिए हूटर बज रहे थे। यूक्रेन की राजधानी कीव में जिस क्षेत्र पर हमला हुआ वह हॉस्टल से 800 किलोमीटर दूर था। घोषणा होने लगी सब अंदर रहें सब अंदर रहें। घर पर बात हुई तो परिजनों को सब बताया। पिता सुरेंद्र डावला और मां सुधा डावला तनाव में थे। हालांकि मैंने बताया कि हम पश्चिम में सबसे अंतिम छोर पर हैं। हमले पूर्व में हुए हैं। इस दौरान मन ही मन आवाज गूंज रही थी कि अब क्या होगा। रविवार को घर आए तो शांति मिली। डायरी लिखती हूं। अपने बच्चों को बताऊंगी कैसे घर लौटे।
यूक्रेन से भारत लौटने वाले बच्चों को हरियाणा में उनके घर तक सकुशल पहुंचाने के लिए एयरपोर्ट पर खास व्यवस्था की गई है। छात्रों के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। जिन बच्चों के परिजन उन्हें लेने एयरपोर्ट नहीं पहुंच पाए, उन्हें सुरक्षा कर्मियों की मदद से घर तक पहुंचाया जा रहा है।
- जितेंद्र कुमार, ओएसडी-2, डिवीजन कमिश्नर हरियाणा