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Faridabad News: सीईटीपी बनने से साफ होकर निकलेगा उद्योगों का पानी

Sat, 14 Mar 2026 12:55 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 12:55 AM IST
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Water from industries is purified from the formation of CETP
यमुना और बुढ़िया नाले में नहीं जाएगा गंदा पानी, प्रदूषण का स्तर घटेगा
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलकर यमुना, बुढ़िया नाला और अन्य ड्रेनों में जाने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित तीन आधुनिक साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (सीईटीपी) को शहर के लिए बड़ा पर्यावरणीय समाधान माना जा रहा है। 926.96 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लागू होने के बाद बिना उपचार के औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नालों में जाने की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

फरीदाबाद में वर्षों से उद्योगों से निकलने वाला रसायनयुक्त पानी बुढ़िया नाला, स्थानीय ड्रेनों और अंततः यमुना नदी तक पहुंचता रहा है। कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्टों में भी बिना ट्रीटमेंट के छोड़े गए पानी को लेकर चिंता जताई गई है। ऐसे में सरकार द्वारा बादशाहपुर, प्रतापगढ़ और मिर्जापुर में तीन आधुनिक सीईटीपी स्थापित करने का निर्णय प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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नालों में जाने से पहले होगा पानी का उपचार

योजना के अनुसार बादशाहपुर में 15 एमएलडी क्षमता का सीईटीपी सेक्टर 27ए से 27-डी, 31, 32, 35, 36, 38 और 45 के उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार करेगा। प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी क्षमता का सबसे बड़ा प्लांट सेक्टर 24, 25, 52ए, 56 से 59, 147, 148, 150 से 153 और 155 के उद्योगों का गंदा पानी साफ करेगा।
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इसी तरह मिर्जापुर में 25 एमएलडी क्षमता का संयंत्र सेक्टर 4, 5, 6, 71 और 74 के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले पानी को ट्रीट करेगा। इन संयंत्रों के शुरू होने के बाद उद्योगों से निकलने वाला पानी सीधे ड्रेनों या नालों में नहीं जाएगा, बल्कि पहले शोधन संयंत्र में साफ होने के बाद ही छोड़ा जाएगा।

यमुना और बुढ़िया नाला को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

शहर के पर्यावरण से जुड़े जानकारों के अनुसार फरीदाबाद के कई औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा पानी बुढ़िया नाले के जरिए आगे जाकर यमुना में मिलता है। इस कारण नाले में बदबू, झाग और काले पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

सीईटीपी चालू होने के बाद रसायनयुक्त पानी की मात्रा कम होगी, जिससे नाले और नदी में प्रदूषण का स्तर घटेगा। इससे पर्यावरण को फायदा होने के साथ नाले के आसपास रहने वाले लोगों को भी बदबू और गंदगी से राहत मिलने की उम्मीद है।

भूजल प्रदूषण भी होगा कम

विशेषज्ञों का मानना है कि कई स्थानों पर बिना ट्रीटमेंट का पानी जमीन में रिसने से भूजल भी प्रभावित होता है। इससे हैंडपंप और ट्यूबवेल का पानी खराब होने की शिकायतें मिलती रही हैं। साझा शोधन संयंत्र बनने से औद्योगिक अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार होगा जिससे जमीन और पानी दोनों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

उद्योगों को भी मिलेगा स्थायी समाधान

कई छोटे और मध्यम उद्योगों के पास अलग से शोधन संयंत्र लगाने की सुविधा नहीं होती जिसके कारण वे साझा ड्रेनों में पानी छोड़ते हैं। सीईटीपी बनने के बाद उद्योगों को एक केंद्रीकृत व्यवस्था मिलेगी जिससे पर्यावरण नियमों का पालन करना आसान होगा। अधिकारियों के अनुसार इससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ उद्योगों को बंद होने या जुर्माने जैसी कार्रवाई से भी राहत मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियां बिना बाधा जारी रह सकेंगी।

साझा खर्च से बनेगी परियोजना

परियोजना की कुल लागत 926.96 करोड़ रुपये आंकी गई है। पूंजीगत व्यय का 50 प्रतिशत नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग वहन करेगा जबकि शेष 50 प्रतिशत हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण 25-25 प्रतिशत के अनुपात में देंगे।
संचालन खर्च शुरुआती चरण में एचएसआईआईडीसी द्वारा वहन किया जाएगा और बाद में नगर निगम फरीदाबाद, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण, एचएसआईआईडीसी और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा बराबर हिस्सेदारी में दिया जाएगा।

संतुलित विकास की दिशा में अहम कदम

तेजी से बढ़ते औद्योगिक शहर फरीदाबाद में लंबे समय से प्रदूषण बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में तीन आधुनिक सीईटीपी स्थापित होने से पहली बार बड़े स्तर पर उद्योगों के गंदे पानी को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनेगी।

यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो यमुना, बुढ़िया नाला और शहर के ड्रेनों में जाने वाला प्रदूषण कम होगा और इसका सीधा फायदा पर्यावरण के साथ-साथ लाखों लोगों की सेहत पर भी पड़ेगा।



मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वित्तीय प्रावधानों की समीक्षा की गई है। बैठक में तय किया गया कि पूंजीगत व्यय का वहन संयुक्त रूप से होगा। वहीं निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा के अनुसार पानी को रिसाइकिल करने के लिए पहले से कई स्तरों पर तेजी से काम किया जा रहा है। पानी के लिए निगम अपने स्तर पर भी कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
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