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Faridabad News: स्टाफ न होने के कारण धूल फांक रहे वेंटिलेटर
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जिला अस्पताल में नहीं चल रहा आईसीयू वार्ड, मरीज किए जा दिल्ली रेफर
प्रशांत चौहान
फरीदाबाद। कोरोना महामारी में लोगों की जान बचाने के लिए पूरे प्रदेश में वेंटिलेटर की खरीद हुई। जिसमें 38 वेंटिलेटर बीके अस्पताल को मिले थे, लेकिन शहर के बीके अस्पताल में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे ही चल रहा है। अस्पताल से मरीजों को दिल्ली रेफर करने का सिलसिला जारी है। वहीं, बीके अस्पताल के आईसीयू विभाग में स्टाफ न होने के कारण गंभीर रोगियों को सांस देने वाले वेंटिलेटर अस्पताल में पडे़-पडे़ खुद ही सांस लेने के लिए परेशान हैं। कोरोना काल में पीएम केयर फंड से आए वेंटिलेटर करीब 16 आईसीयू वार्ड में बेड के साथ जुड़े हैं और बाकी के अस्पताल के पीछे बने कंटेनर वार्ड में बने स्टोर रूम में रखे हैं। आईसीयू वार्ड न चलने के कारण अस्पताल में आए गंभीर मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
बीके अस्पताल में कोरोना काल में पीएम केयर फंड से 38 वेंटिलेटर आए थे। इन वेंटिलेटर की औसत उम्र पांच वर्ष थी। आईसीयू न चलने के कारण वेंटिलेटर पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। शहर का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बाद भी यहां वेंटिलेटर की संख्या काफी कम है, लेकिन अस्पताल में आईसीयू के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर व सहायक स्टाफ न होने के कारण इनका इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन कई मरीज गंभीर अवस्था में आते हैं। आईसीयू न चलने के कारण मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। प्रतिदिन करीब छह से सात मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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आईसीयू के लिए सिर्फ दो डॉक्टर उपलब्ध
अस्पताल में बनने वाले आईसीयू वार्ड को चलाने के लिए करीब छह डॉक्टर, आईसीयू ऑपरेटर, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय सहित करीब 25 स्टाफ की जरूरत है। जबकि बीके अस्पताल में दो डॉक्टर ही आईसीयू के लिए उपलब्ध हैं। वार्ड का समान स्टोर रूम में धूल फांक रहा है। बीके अस्पताल के पास कुल 38 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं।
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आईसीयू न चलने के कारण कई मरीजों की हो चुकी है मौत
कुछ दिन पहले अस्पताल में दो जुड़वा नवजात बच्चों को लाया गया था। डॉक्टर ने अस्पताल में व्यवस्था न होने के कारण उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया था। जिसके बाद दिल्ली ले जाते हुए उनमें से एक की मौत हो गई थी। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। जिनको रेफर करने के बाद रास्ते में उनकी मौत हो गई।
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वर्जन
आईसीयू वार्ड को शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर स्टाफ देने की मांग की गई है। इस वार्ड के लिए अलग टीम की जरूरत है। वार्ड में सभी सामान मौजूद है, स्टाफ की कमी पूरी होने पर वार्ड को शुरू किया जाएगा। - सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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प्रशांत चौहान
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प्रशांत चौहान
फरीदाबाद। कोरोना महामारी में लोगों की जान बचाने के लिए पूरे प्रदेश में वेंटिलेटर की खरीद हुई। जिसमें 38 वेंटिलेटर बीके अस्पताल को मिले थे, लेकिन शहर के बीके अस्पताल में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे ही चल रहा है। अस्पताल से मरीजों को दिल्ली रेफर करने का सिलसिला जारी है। वहीं, बीके अस्पताल के आईसीयू विभाग में स्टाफ न होने के कारण गंभीर रोगियों को सांस देने वाले वेंटिलेटर अस्पताल में पडे़-पडे़ खुद ही सांस लेने के लिए परेशान हैं। कोरोना काल में पीएम केयर फंड से आए वेंटिलेटर करीब 16 आईसीयू वार्ड में बेड के साथ जुड़े हैं और बाकी के अस्पताल के पीछे बने कंटेनर वार्ड में बने स्टोर रूम में रखे हैं। आईसीयू वार्ड न चलने के कारण अस्पताल में आए गंभीर मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
बीके अस्पताल में कोरोना काल में पीएम केयर फंड से 38 वेंटिलेटर आए थे। इन वेंटिलेटर की औसत उम्र पांच वर्ष थी। आईसीयू न चलने के कारण वेंटिलेटर पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। शहर का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बाद भी यहां वेंटिलेटर की संख्या काफी कम है, लेकिन अस्पताल में आईसीयू के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर व सहायक स्टाफ न होने के कारण इनका इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन कई मरीज गंभीर अवस्था में आते हैं। आईसीयू न चलने के कारण मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। प्रतिदिन करीब छह से सात मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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आईसीयू के लिए सिर्फ दो डॉक्टर उपलब्ध
अस्पताल में बनने वाले आईसीयू वार्ड को चलाने के लिए करीब छह डॉक्टर, आईसीयू ऑपरेटर, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय सहित करीब 25 स्टाफ की जरूरत है। जबकि बीके अस्पताल में दो डॉक्टर ही आईसीयू के लिए उपलब्ध हैं। वार्ड का समान स्टोर रूम में धूल फांक रहा है। बीके अस्पताल के पास कुल 38 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं।
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आईसीयू न चलने के कारण कई मरीजों की हो चुकी है मौत
कुछ दिन पहले अस्पताल में दो जुड़वा नवजात बच्चों को लाया गया था। डॉक्टर ने अस्पताल में व्यवस्था न होने के कारण उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया था। जिसके बाद दिल्ली ले जाते हुए उनमें से एक की मौत हो गई थी। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। जिनको रेफर करने के बाद रास्ते में उनकी मौत हो गई।
वर्जन
आईसीयू वार्ड को शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर स्टाफ देने की मांग की गई है। इस वार्ड के लिए अलग टीम की जरूरत है। वार्ड में सभी सामान मौजूद है, स्टाफ की कमी पूरी होने पर वार्ड को शुरू किया जाएगा। - सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
प्रशांत चौहान