अपनी सुरक्षा खुद करें!: नजर हटी तो बाइक गायब, कार चोर हो चुके हाइटेक; साल भर में 20 करोड़ से अधिक के वाहन चोरी
पुलिस द्वारा पकड़े जाने वाले आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि कुछ आरोपी मजबूरी वश या किसी के बहकावे में आकर वाहन चोरी की वारदात करते हैं, लेकिन कुछ अपराधी आदतन इस काम को करने में लगे हैं।
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फरीदाबाद शहर में वाहन चोरों पर अंकुश लगाना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है। 32 थाना, 31 पुलिस चौकी और ग्यारह क्राइम ब्रांच के बावजूद साल 2023 में जनवरी से अब तक चोर करीब 20 करोड़ से ज्यादा कीमत के फॉरच्यूनर, इनोवा समेत दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर हाथ साफ कर चुके हैं। वाहन चोरों को पकड़ने की बात करें तो पुलिस ने इस साल कुल 501 वाहन चोरों को पकड़कर 375 चोरी के मामले सुलझाने के दावा किया है, लेकिन वाहन बरामदगी की दर काफी कम है।
शहर में वाहन चोरों के गिरोह इस कदर सक्रिय हैं कि जरा सी नजर हटते ही बाइक गायब कर देते हैं। कार चोरी करने वाले गिरोह इतने हाइटेक हो चुके हैं कि हूबहू दूसरी चाबी बनाकर लग्जरी कार तक को चुराकर ले जाते हैं। हाल ही में पुलिस ने एक वाहन चोर गिरोह को पकड़कर स्कॉर्पियो कार बरामद की थी। इसमें चोरों ने बताया उन्होंने यू ट्यूब से नकली चाबी बनाना सीखा था। साल 2022 में 1653 वाहन चोरी के केस दर्ज किए गए थे जो इस साल बढ़कर 1699 हो चुके हैं जबकि साल खत्म होने में अब भी 25 दिन बचे हैं। लगातार अभियान का दावा करने के बाद भी पुलिस वाहन चोरी की वारदात पर अंकुश लगाने में कामयाब नहीं हो पाई है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक शहर में हर चार घंटे में एक वाहन चोरी हो जाता है। पुलिस वाहन चोरों को पकड़कर जेल भेज देती है जो जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा से चोरी करने लग जाते हैं।
बीमा वाले वाहन मालिकों को केवल अनट्रेस रिपोर्ट से मतलब
वाहन चोरी के बाद बीमाकृत वाहन मालिकों को वाहन की रिकवरी से ज्यादा अनट्रेस रिपोर्ट से मतलब होता है क्यूंकि उसी के आधार पर कंपनी क्लेम राशि खाते में भेजती है। न्यूनतम तीन माह में आने वाली इस रिपोर्ट की अवधि कम कराने के लिए लोग थानों में सिफारिशें करते भी नजर आते हैं। बीमा राशि मिलने के बाद गाड़ी मालिक को वाहन रिकवरी और चोर के पकड़े जाने से कोई मतलब नहीं रह जाता।
बिना बीमा का वाहन चोरी का केस दर्ज कराना बन जाता है मुसीबत
जिन वाहनों का बीमा नहीं होता उनकी चोरी हो जाने पर केस दर्ज करने वाला अदालत के चक्कर लगाता रहता है। ऐसे में वाहन नहीं मिलने पर भी लोग वाहन चोरी की रिपोर्ट लिखाना पसंद नहीं करते हैं। दरअसल वाहन का बीमा नहीं होने क कारण क्लेम के नाम पर कुछ मिलने की उम्मीद ही नहीं है। चोर वाहन को चोरी करने के कुछ घंटों के भीतर ही आगे बेचने या स्पेयर पार्ट निकालने में जुट जाते हैं। ऐसे में वाहन रिकवरी की बात भी बेमानी सी हो जाती है। वाहन पीरे मिलने के बावजूद अदालत से शिकायतकर्ता के पास केस को लेकर समन आने शुरू हो जाते हैं। केस को बंद कराने के लिए भी शिकायतकर्ता को 150 से 200 रुपये का एफिडेविट बनवाकर अदालत में जाना होता है। अदालत के चक्कर लगाने के बाद शिकायतकर्ता वाहन न मिलने के बाद भी पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट होने की बात कहकर अपना केस बंद करा देते हैं।
आदतन अपराधियों पर लगे लगाम तो कम हो सकता है आंकड़ा
पुलिस द्वारा पकड़े जाने वाले आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि कुछ आरोपी मजबूरी वश या किसी के बहकावे में आकर वाहन चोरी की वारदात करते हैं, लेकिन कुछ अपराधी आदतन इस काम को करने में लगे हैं। उनके सामने कई ऐसे मामले भी आए हैं जिसमें एक ही आरोपी ने 50 से ज्यादा वारदातों को अंजाम दिया है। ऐसे लोगों पर पुलिस विशेष तरीके से काम करे तो चोरी की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
लोग खुद भी बरतें सावधानी तो बने बात: पुलिस आयुक्त
क्राइम ब्रांच व थाना पुलिस टीम ने जनवरी से अब तक 501 वाहन चोरों को गिरफ्तार कर 375 मामले सुलझाए हैं। पुलिस आयुक्त राकेश आर्य ने क्राइम रिव्यू मीटिंग में सभी थाना, चौकी प्रभारी व क्राइम ब्रांच प्रभारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वाहन चालकों से भी अपील की है कि वह बाजार में व अन्य स्थानों पर जाते समय वाहन को सीसीटीवी की हद या चौकीदार की निगरानी वाली जगह पर खड़ा करने का प्रयास करें। पार्किंग की सुविधा वाली जगह पर मामूली शुल्क बचाने की कोशिश न करें। व्हीकल अलार्म सिस्टम जैसे उपकरणों का भी प्रयोग करना चाहिए।