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15 हजार की रिश्वत लेते जेई सहित दो गिरफ्तार
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फरीदाबाद। राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) ने जीवन नगर क्षेत्र में मीटर लगाने के नाम पर 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते बिजली निगम के जेई ताहिर और एजेंट अजय को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। देर शाम तक टीम की आरोपी से पूछताछ जारी रही।
जीवन नगर निवासी त्रिलोक चंद ने बताया कि 12 मार्च को भाई के नाम पर बिजली मीटर लगवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के तीन दिन बाद सेक्टर-58 स्थित बिजली निगम कार्यालय गए। अधिकारियों को बताया कि तीन पहले आवेदन किया था अब तक मीटर नहीं लगा। आरोप है कि इसके बाद कनिष्ठ अभियंता (जेई) ताहिर उन्हें जल्द मीटर लगाने का आश्वासन देकर चक्कर कटवाता रहा है। एक माह बाद भी जब मीटर नहीं लगा तो बुधवार को एक बार फिर बिजली दफ्तर गए। वहां जेई ताहिर ने बताया कि 30 किलोवाट लोड का कनेक्शन लेने के लिए करीब 30 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे। लंबी बातचीत के बाद 15 हजार रुपये में जेई मान गया।
त्रिलोक ने बताया कि तीन साल पहले भी जेई ने उन्हें गलत बिल भेजा था, समय पर भुगतान न करने पर मीटर उखाड़ ले गया था। इस दौरान करीब डेढ़ माह अंधेरे में रहना पड़ा था। इस बार जेई मीटर कनेक्शन के नाम पर फिर परेशान कर पैसे मांग रहा था। जेई से मीटर लगाने के नाम पर 15 हजार रुपये में समझौता होने के बाद उन्हें इसकी सूचना राज सतर्कता ब्यूरो को दी। बृहस्पतिवार को जेई ताहिर ने उन्हें सोहना मोड़ पर पैसे देने के लिए बुलाया। वह एक घंटा पहले ही टीम के साथ जेई के बुलाए स्थान पर पहुंच गए। टीम के साथ होने का जेई को शक हुआ तो उसने स्थान बदल दिया। इस बार त्रिलोक को सेक्टर-25 में एक जगह बुलाया। यहां भी वह नहीं मिला। अंत में जेई ने गांव प्रतापगढ़ के पास बनाए अपने निजी कार्यालय पर बुलाया। जहां एजेंट अजय पहले से मौजूद थे। त्रिलोक ने जैसे ही उन्हें पैसे दिए टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी पटवारी को भेजा जेल
फरीदाबाद। नगर निगम के जमीन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को पटवारी को बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया गया है। जबकि पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। लक्कड़पुर क्षेत्र में नगर निगम की करीब एक एकड़ जमीन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में मंगलवार रात पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा एनआईटी की टीम ने जींद निवासी प्रतीक को गिरफ्तार किया था। साथ ही पूछताछ के लिए अदालत से उसे एक दिन की रिमांड पर लिया गया था। इसके खिलाफ निगम की शिकायत पर साल-2019 में ही सूरजकुंड थाना में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तार पटवारी पर आरोप है कि उसने मौजा लक्कड़पुर में नगर निगम की करीब एक एकड़ जमीन को कब्जाधारियों के साथ मिलीभगत करके गलत तरीके से इंद्राज की थी, जिसके आधार पर अवैध कब्जा धारी उक्त जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।
ऑडिट शाखा के दो वरिष्ठ अधिकारी निलंबित
फरीदाबाद। नगर निगम के 200 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में ऑडिट शाखा के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें शाखा के एक संयुक्त निदेशक विनोद बिश्नोई और एक उप निदेशक राजीव शर्मा का नाम शामिल है। निलंबन संबंधी आदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त विभाग की ओर से जारी किया गया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 से 2019 में नगर निगम की लेखा शाखा में बिना काम भुगतान का मामला सामने आया था। निवर्तमान पार्षदों ने लेखा शाखा से अलग-अलग वार्डों में किए गए विकास कार्यों का ब्योरा मांगा था। इसके बाद पता चला कि कई वार्डों में बिना काम के भुगतान कर दिया गया है। कई वार्डों में फाइलों को संसोधित करके अधिक भुगतान किया गया। ठेकेदारों को भुगतान करने से पहले इंजीनियरिंग शाखा की ओर से बिल की जांच के बाद ऑडिट शाखा भी बिलों की जांच करती है। बिलों में कोई कमी न होने पर ठेकेदार को भुगतान किया जाता है। अब क्योंकि ठेकेदार को कई बिलों का भुगतान किया गया है। इसमें ऑडिट की भी मिलीभगत की आशंका है।
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जीवन नगर निवासी त्रिलोक चंद ने बताया कि 12 मार्च को भाई के नाम पर बिजली मीटर लगवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के तीन दिन बाद सेक्टर-58 स्थित बिजली निगम कार्यालय गए। अधिकारियों को बताया कि तीन पहले आवेदन किया था अब तक मीटर नहीं लगा। आरोप है कि इसके बाद कनिष्ठ अभियंता (जेई) ताहिर उन्हें जल्द मीटर लगाने का आश्वासन देकर चक्कर कटवाता रहा है। एक माह बाद भी जब मीटर नहीं लगा तो बुधवार को एक बार फिर बिजली दफ्तर गए। वहां जेई ताहिर ने बताया कि 30 किलोवाट लोड का कनेक्शन लेने के लिए करीब 30 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे। लंबी बातचीत के बाद 15 हजार रुपये में जेई मान गया।
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त्रिलोक ने बताया कि तीन साल पहले भी जेई ने उन्हें गलत बिल भेजा था, समय पर भुगतान न करने पर मीटर उखाड़ ले गया था। इस दौरान करीब डेढ़ माह अंधेरे में रहना पड़ा था। इस बार जेई मीटर कनेक्शन के नाम पर फिर परेशान कर पैसे मांग रहा था। जेई से मीटर लगाने के नाम पर 15 हजार रुपये में समझौता होने के बाद उन्हें इसकी सूचना राज सतर्कता ब्यूरो को दी। बृहस्पतिवार को जेई ताहिर ने उन्हें सोहना मोड़ पर पैसे देने के लिए बुलाया। वह एक घंटा पहले ही टीम के साथ जेई के बुलाए स्थान पर पहुंच गए। टीम के साथ होने का जेई को शक हुआ तो उसने स्थान बदल दिया। इस बार त्रिलोक को सेक्टर-25 में एक जगह बुलाया। यहां भी वह नहीं मिला। अंत में जेई ने गांव प्रतापगढ़ के पास बनाए अपने निजी कार्यालय पर बुलाया। जहां एजेंट अजय पहले से मौजूद थे। त्रिलोक ने जैसे ही उन्हें पैसे दिए टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी पटवारी को भेजा जेल
फरीदाबाद। नगर निगम के जमीन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को पटवारी को बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया गया है। जबकि पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। लक्कड़पुर क्षेत्र में नगर निगम की करीब एक एकड़ जमीन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में मंगलवार रात पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा एनआईटी की टीम ने जींद निवासी प्रतीक को गिरफ्तार किया था। साथ ही पूछताछ के लिए अदालत से उसे एक दिन की रिमांड पर लिया गया था। इसके खिलाफ निगम की शिकायत पर साल-2019 में ही सूरजकुंड थाना में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तार पटवारी पर आरोप है कि उसने मौजा लक्कड़पुर में नगर निगम की करीब एक एकड़ जमीन को कब्जाधारियों के साथ मिलीभगत करके गलत तरीके से इंद्राज की थी, जिसके आधार पर अवैध कब्जा धारी उक्त जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।
ऑडिट शाखा के दो वरिष्ठ अधिकारी निलंबित
फरीदाबाद। नगर निगम के 200 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में ऑडिट शाखा के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें शाखा के एक संयुक्त निदेशक विनोद बिश्नोई और एक उप निदेशक राजीव शर्मा का नाम शामिल है। निलंबन संबंधी आदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त विभाग की ओर से जारी किया गया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 से 2019 में नगर निगम की लेखा शाखा में बिना काम भुगतान का मामला सामने आया था। निवर्तमान पार्षदों ने लेखा शाखा से अलग-अलग वार्डों में किए गए विकास कार्यों का ब्योरा मांगा था। इसके बाद पता चला कि कई वार्डों में बिना काम के भुगतान कर दिया गया है। कई वार्डों में फाइलों को संसोधित करके अधिक भुगतान किया गया। ठेकेदारों को भुगतान करने से पहले इंजीनियरिंग शाखा की ओर से बिल की जांच के बाद ऑडिट शाखा भी बिलों की जांच करती है। बिलों में कोई कमी न होने पर ठेकेदार को भुगतान किया जाता है। अब क्योंकि ठेकेदार को कई बिलों का भुगतान किया गया है। इसमें ऑडिट की भी मिलीभगत की आशंका है।