Tokyo Paralympic: फरीदाबाद के लाल सिंहराज ने शूटिंग में जीता कांस्य पदक, भतीजे को मैदान छोड़ते-छोड़ते बन गए पैरालंपिक मेडल विजेता
फरीदाबाद के शूटर सिंह राज ने पैरालंपिक मेडलिस्ट बनने के लिए कड़ा संघर्ष किया है और इसमें उनकी पत्नी ने भी उनका भरपूर साथ दिया है।
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फरीदाबाद। टोक्यो पैरालंपिक में भारत के सिंहराज अधाना ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा एसएच-1 के फाइनल मुकाबले में कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने यह पदक 216.8 अंकों के साथ जीता। जन्म से पोलियो ग्रस्त अधाना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुश्किलों को पार कर इतिहास रचने के लिए बधाई दी है।
अधाना मूलरूप से फरीदाबाद के तिगांव निवासी हैं। मौजूदा समय में उनका संयुक्त परिवार बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में रहता है। पैरालंपिक में जाने से पहले सिंह राज ने पीएम मोदी को पदक जीतने का आश्वासन दिया था।
परिवार ने आर्थिक व सामाजिक मुश्किलों का समाना कर अधाना को इस मुकाम तक पहुंचाया है। इस बात का जिक्र खुद अधाना प्रधानमंत्री मोदी से हुए संवाद में कर चुके हैं। अधाना के मुताबिक वह ओलंपिक जीतने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे।
ऐसे में वह उस समय भी तैयारियों में जुटे रहे जब कोरोना की दूसरी लहर के कारण दुनिया थम गई थी। अधाना ने उस माहौल की मायूसी से निकलने के लिए घर में ही शूटिंग रेंज तैयार कर ली। अभ्यास जारी रखा। इससे उनका हौसला बना रहा। तैयारी कर जीत की जिद का जुनून उन्होंने बनाए रखा।
पीएम मोदी से कहा था सरकारी मदद से बढ़ते हैं हौसले
पीएम मोदी ने पैरालंपिक खेलों में जाने से पहले कुल दस खिलाड़ियों से बात कर सभी प्रतिभागियों की हौंसला अफजाई की थी। ऑनलाइन संवाद में सिंह राज अधाना से पीएम ने करीब छह मिनट तक बात की थी। इस दौरान पीएम ने खेल की चुनौती, सरकारी प्रोत्साहन और प्रेरणा पर बात की।
सिंहराज ने पूरे परिवार के सहयोग से खेल में बने रहने की बात कही। शूटिंग खेल के अभ्यास में आने वाली समस्याओं में खर्च को बड़ा मसला बताया। सिंह राज ने बताया कि एक समय ऐसा आया कि पत्नी कविता ने अपने आभूषण गिरवी रख कर उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में अभ्यास पूरी तरह बंद हो गया था। वह अपने विदेशी खिलाड़ी दोस्तों से अभ्यास का तरीक पूछते थे। विदेशी दोस्त लगातार खेल अभ्यास कर रहे थे जबकि स्थानीय स्तर पर खेल अभ्यास की छूट नहीं थी। ऐसे में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होते ही उन्होंने सबसे पहले 10 मीटर और 50 मीटर का शूटिंग रेंज बनवाया।
इसके लिए वर्ष 2018 में एशियन गेम्स में प्रदेश सरकार से मिली ईनामी राशि काम आई। ओलंपिक में इस्तेमाल होने वाले एमीनेशन से ही पैरालंपिक की तैयारी की। इससे हाल ही में यूएई में हुए विश्वकप में पदक हासिल किया था। इसके अलावा नेशनल राइफल शूटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से खेल को बल मिला।