{"_id":"6a89f0988a70e338c1012ff6","slug":"three-youths-acquitted-in-attempted-murder-case-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-78082-2026-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: जानलेवा हमले में तीनों युवक दोषमुक्त करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: जानलेवा हमले में तीनों युवक दोषमुक्त करार
विज्ञापन
झूठी गवाही देने पर कोर्ट ने पीड़ित व शिकायतकर्ता भाई को भेजा नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जानलेवा हमले के सात साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.पी. सिंह की अदालत ने तीनों युवकों को दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा।
वहीं, अदालत में झूठी गवाही देने और पहले दिए बयानों से मुकरने पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने 20 अगस्त को पीड़ित और उसके शिकायतकर्ता भाई को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। मामला 23 जुलाई 2019 की रात करीब 10 बजे का है। शिकायतकर्ता सुरेंद्र सिंह ने थाना शहर बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी कि तिगांव रोड पर 3-4 लोगों ने उसके भाई उदय सिंह पर लाठी-डंडों, लातों और घूंसे से हमला कर दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आशीष, आकाश उर्फ भूरी और सोनू कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में चोटों की गंभीरता और डॉक्टर की राय के आधार पर मामले में धारा 325 और 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ी गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान जब पीड़ित उदय सिंह और उसका भाई सुरेंद्र सिंह अदालत में गवाही देने पहुंचे, तो दोनों ही अपने बयानों से पलट गए और आरोपियों को पहचानने से इन्कार कर दिया। पीड़ित ने कोर्ट में कहा कि जिन लड़कों ने उस पर हमला किया था, ये आरोपी वे नहीं हैं। यही बात उसके शिकायतकर्ता भाई ने भी दोहराई। सरकारी वकील के अनुरोध पर अदालत ने दोनों गवाहों को होस्टाइल (पक्षद्रोही) घोषित कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मुख्य और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों द्वारा आरोपियों की पहचान न किए जाने और अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन न करने के कारण तीनों युवकों पर कोई जुर्म साबित नहीं होता है। अदालत ने तीनों आशीष, सोनू और आकाश उर्फ भूरी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जानलेवा हमले के सात साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.पी. सिंह की अदालत ने तीनों युवकों को दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा।
वहीं, अदालत में झूठी गवाही देने और पहले दिए बयानों से मुकरने पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने 20 अगस्त को पीड़ित और उसके शिकायतकर्ता भाई को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। मामला 23 जुलाई 2019 की रात करीब 10 बजे का है। शिकायतकर्ता सुरेंद्र सिंह ने थाना शहर बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी कि तिगांव रोड पर 3-4 लोगों ने उसके भाई उदय सिंह पर लाठी-डंडों, लातों और घूंसे से हमला कर दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आशीष, आकाश उर्फ भूरी और सोनू कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में चोटों की गंभीरता और डॉक्टर की राय के आधार पर मामले में धारा 325 और 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ी गई थी।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई के दौरान जब पीड़ित उदय सिंह और उसका भाई सुरेंद्र सिंह अदालत में गवाही देने पहुंचे, तो दोनों ही अपने बयानों से पलट गए और आरोपियों को पहचानने से इन्कार कर दिया। पीड़ित ने कोर्ट में कहा कि जिन लड़कों ने उस पर हमला किया था, ये आरोपी वे नहीं हैं। यही बात उसके शिकायतकर्ता भाई ने भी दोहराई। सरकारी वकील के अनुरोध पर अदालत ने दोनों गवाहों को होस्टाइल (पक्षद्रोही) घोषित कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मुख्य और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों द्वारा आरोपियों की पहचान न किए जाने और अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन न करने के कारण तीनों युवकों पर कोई जुर्म साबित नहीं होता है। अदालत ने तीनों आशीष, सोनू और आकाश उर्फ भूरी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
विज्ञापन