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Faridabad News: पैरालंपिक में रजत जीतने पर मनीष के घर जश्न का माहौल
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- पिता के मोबाइल पर देर रात तक बधाई के लिए बजती रहीं घंटी, 10 मीटर एयर पिस्टल में मनीष ने जीता रजत
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पेरिस पैरालंपिक में मनीष नरवाल के रजत जीतने की सूचना मिलते ही परिवार और रिश्तेदारों ने जश्न शुरू कर दिया। परिजन, पड़ोसी और रिश्तेदार खुशी में ढोल की थाप पर झूमने लगे। पैरालंपिक के दूसरे दिन जिले के मनीष नरवाल ने 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पर निशाना लगाया। उनके पिता दिलबाग के मोबाइल पर देर रात लोगों के बधाइयों के संदेश आते रहे। इस दौरान उनके घर भी लोग बधाई देने पहुंचने लगे। उनके पिता का कहना था कि बेटे ने देश के लिए दूसरी बार पैरालंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह मेरे और परिवार के लिए गर्व की बात है। मनीष के लौटकर वापस आने के बाद जोरदार स्वागत किया जाएगा।
बल्लभगढ़ के सेक्टर-65 निवासी मनीष नरवाल पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में भारत के लिए रजत पदक जीता है। उन्होंने अपने लगातार दूसरे पैरालंपिक में पदक पर निशाना साधा है। इससे पहले भी टोक्यो पैरालंपिक में मनीष ने 50 मीटर पिस्टल एसएच1 मिश्रित स्पर्धा में भी स्वर्ण जीता था। उनके पिता का कहना है कि वह पदक जीतने के लिए रोजाना आठ से 10 घंटे तक मेहनत करते हैं। जिससे की मैच में किसी प्रकार की चूक नहीं रह जाए। वह अभी तक भारतीय पैरा एथलीट 4 पदक जीत चुके हैं।
मनीष नरवाल ने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर पहले तो उनके माता-पिता बहुत भावुक हो गए। उसके बाद मनीष की मां संतोष देवी ने गर्व से कहा कि, ‘बेटा देश के लिए मेडल लेकर आया है, जो हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। हम बहुत खुश हैं, खुशी से हमारे आंसू नहीं रुक रहे हैं।’ इससे पहले वह 2020 में पैरालंपिक में भी 50 मीटर फ्री स्टाइल पिस्टल में स्वर्ण पर निशाना लगा चुके हैं। इसके साथ ही वह पैरा एशियाई में कांस्य व 2018 में स्वर्ण व रजत जीत चुके हैं।
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पेरु में पैरा शूटिंग में स्वर्ण जीतने के बाद मिला था ओलंपिक कोटा
पेरू के लीमा में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण जीतने के बाद मनीष को पैरालंपिक के लिए कोटा मिला था। 21 वर्षीय मनीष पिछले कई सालों से शूटिंग कर रहे हैं और वह 2021 में हुए पैरालंपिक में भी गोल्ड जीत चुके हैं। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
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मनीष को मिल चुका है अर्जुन अवार्डमनीष के घर के हालात ऐसे थे उनके पिता उन्हें पिस्टल नहीं दिला सकते थे। जिसके चलते उन्हें साल 2015 में अपना मकान बेचना पड़ा। उस वक्त उनके लिए यह फैसला काफी कड़ा था, लेकिन मनीष ने दो साल के अंदर ही 2017 में ही जूनियर विश्व कीर्तिमान रचकर विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बीते वर्ष अर्जुन अवार्ड दिया गया था।
मकान बेचकर खरीदी थी पिस्टल
अंतरराष्ट्रीय शूटर मनीष नरवाल के पिता दिलबाग के पास उन्हें पिस्टल दिलाने के लिए भी पैसे नहीं थे। उनके पिता ने घर बेचकर उन्हें पिस्तौल दिलाई थी। मनीष पहले फुटबॉल खेलते थे लेकिन एक बार चोट लग जाने के बाद माता-पिता ने यह खेल छुड़ा दिया। मनीष का दायां हाथ बचपन से ही काम नहीं करता था। घर वालों ने डॉक्टर, अस्पताल से लेकर मंदिरों तक में मत्था टेका, लेकिन उन्हें मनीष का हाथ ठीक करने में सफलता नहीं मिली। मनीष जब बड़े हुए तो फुटबॉल उनका पसंदीदा खेल बन गया, लेकिन एक दिन फुटबॉल खेलने के दौरान उनके दाएं हाथ में उन्हें चोट लग गई। माता-पिता ने हाथ से खून बहता देखा तो उन्हें इसके बारे में पता लगा। माता-पिता ने उसी दिन उनकी फुटबॉल खेल छुड़वा दिया। पिता के दिलबाग ने एक दोस्त के कहने पर मनीष को शूटिंग शुरू कराई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पेरिस पैरालंपिक में मनीष नरवाल के रजत जीतने की सूचना मिलते ही परिवार और रिश्तेदारों ने जश्न शुरू कर दिया। परिजन, पड़ोसी और रिश्तेदार खुशी में ढोल की थाप पर झूमने लगे। पैरालंपिक के दूसरे दिन जिले के मनीष नरवाल ने 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पर निशाना लगाया। उनके पिता दिलबाग के मोबाइल पर देर रात लोगों के बधाइयों के संदेश आते रहे। इस दौरान उनके घर भी लोग बधाई देने पहुंचने लगे। उनके पिता का कहना था कि बेटे ने देश के लिए दूसरी बार पैरालंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह मेरे और परिवार के लिए गर्व की बात है। मनीष के लौटकर वापस आने के बाद जोरदार स्वागत किया जाएगा।
बल्लभगढ़ के सेक्टर-65 निवासी मनीष नरवाल पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में भारत के लिए रजत पदक जीता है। उन्होंने अपने लगातार दूसरे पैरालंपिक में पदक पर निशाना साधा है। इससे पहले भी टोक्यो पैरालंपिक में मनीष ने 50 मीटर पिस्टल एसएच1 मिश्रित स्पर्धा में भी स्वर्ण जीता था। उनके पिता का कहना है कि वह पदक जीतने के लिए रोजाना आठ से 10 घंटे तक मेहनत करते हैं। जिससे की मैच में किसी प्रकार की चूक नहीं रह जाए। वह अभी तक भारतीय पैरा एथलीट 4 पदक जीत चुके हैं।
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मनीष नरवाल ने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर पहले तो उनके माता-पिता बहुत भावुक हो गए। उसके बाद मनीष की मां संतोष देवी ने गर्व से कहा कि, ‘बेटा देश के लिए मेडल लेकर आया है, जो हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। हम बहुत खुश हैं, खुशी से हमारे आंसू नहीं रुक रहे हैं।’ इससे पहले वह 2020 में पैरालंपिक में भी 50 मीटर फ्री स्टाइल पिस्टल में स्वर्ण पर निशाना लगा चुके हैं। इसके साथ ही वह पैरा एशियाई में कांस्य व 2018 में स्वर्ण व रजत जीत चुके हैं।
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पेरु में पैरा शूटिंग में स्वर्ण जीतने के बाद मिला था ओलंपिक कोटा
पेरू के लीमा में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण जीतने के बाद मनीष को पैरालंपिक के लिए कोटा मिला था। 21 वर्षीय मनीष पिछले कई सालों से शूटिंग कर रहे हैं और वह 2021 में हुए पैरालंपिक में भी गोल्ड जीत चुके हैं। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
मनीष को मिल चुका है अर्जुन अवार्डमनीष के घर के हालात ऐसे थे उनके पिता उन्हें पिस्टल नहीं दिला सकते थे। जिसके चलते उन्हें साल 2015 में अपना मकान बेचना पड़ा। उस वक्त उनके लिए यह फैसला काफी कड़ा था, लेकिन मनीष ने दो साल के अंदर ही 2017 में ही जूनियर विश्व कीर्तिमान रचकर विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बीते वर्ष अर्जुन अवार्ड दिया गया था।
मकान बेचकर खरीदी थी पिस्टल
अंतरराष्ट्रीय शूटर मनीष नरवाल के पिता दिलबाग के पास उन्हें पिस्टल दिलाने के लिए भी पैसे नहीं थे। उनके पिता ने घर बेचकर उन्हें पिस्तौल दिलाई थी। मनीष पहले फुटबॉल खेलते थे लेकिन एक बार चोट लग जाने के बाद माता-पिता ने यह खेल छुड़ा दिया। मनीष का दायां हाथ बचपन से ही काम नहीं करता था। घर वालों ने डॉक्टर, अस्पताल से लेकर मंदिरों तक में मत्था टेका, लेकिन उन्हें मनीष का हाथ ठीक करने में सफलता नहीं मिली। मनीष जब बड़े हुए तो फुटबॉल उनका पसंदीदा खेल बन गया, लेकिन एक दिन फुटबॉल खेलने के दौरान उनके दाएं हाथ में उन्हें चोट लग गई। माता-पिता ने हाथ से खून बहता देखा तो उन्हें इसके बारे में पता लगा। माता-पिता ने उसी दिन उनकी फुटबॉल खेल छुड़वा दिया। पिता के दिलबाग ने एक दोस्त के कहने पर मनीष को शूटिंग शुरू कराई गई।
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