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Faridabad News: अस्पताल में नहीं ट्रामा सेंटर, रोजाना मरीज किए जाते रेफर

Mon, 16 Oct 2023 11:07 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 16 Oct 2023 11:07 PM IST
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There is no trauma center in the hospital, patients are referred daily
हेमलता रावत
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फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में ट्रामा सेंटर नहीं होने की वजह से हर साल सड़क हादसे में घायल करीब 30 प्रतिशत लोगों की जान चली जाती है। ट्रामा सेंटर को लेकर कई बार स्वास्थ्य विभाग की ओर से नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से बात की गई, लेकिन गाइडलाइंस के तहत अनुमति नहीं होने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके कारण बीके अस्पताल से हर रोज करीब 25 मरीजों को दिल्ली व रोहतक रेफर किया जाता है। इनमें ट्रामा सेंटर के करीब 15 मरीज होते हैं। बीके अस्पताल में हर रोज हजारों की संख्या में मरीज ओपीडी में उपचार करवाने के लिए आते हैं। वहीं, इमरजेंसी में हर रोज 100 से ज्यादा मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। इनमें आईसीयू और ट्रामा सेंटर की सुविधा नहीं होने की वजह से 25 मरीजों को रेफर किया जाता है। मैनेजर हरकेश डागर ने बताया कि बीके अस्पताल से हर रोज करीब 25 मरीजों को दिल्ली व रोहतक रेफर किया जाता है। कई बार मरीजों की हालत गंभीर होने की वजह से रास्ते में ही मृत्यु हो जाती है।







10 साल से सिरे नहीं चढ़ी योजना

साल 2013 में स्वास्थ्य विभाग ने इस बात को मानते हुए विशेष केस में जिले में ट्रॉमा सेंटर बनवाने के लिए कोशिश थी। लेकिन एनएचएआई की गाइड लाइंस फरीदाबाद में ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने के अनुमति नहीं देती हैं। बावजूद इसके ट्रामा केंद्र की जरूरत को देखते हुए विभाग ने एक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज और जिला उपायुक्त को भेजी थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने खुद जिला स्वास्थ्य विभाग से व्यवहार्यता रिपोर्ट मांगी, ताकि एनएचएआई से इस सेंटर को विशेष मामले में पास करवाया जा सके। जिसमें उन्होंने साफ किया कि फरीदाबाद में ट्रॉमा सेंटर बनाया जाना बहुत जरूरी है। यही नहीं यहां ट्रॉमा सेंटर बन जाने से अन्य जिलों के लोगों को भी सहूलियत होगी। रिपोर्ट में यह भी शामिल था कि एनएचएआई के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर हाइवे पर 100 किमी की दूरी पर होना चाहिए। इसके अलावा मरीजों को 50 किमी के अंदर इसकी सुविधा मिलनी चाहिए। फरीदाबाद का बीके अस्पताल एम्स अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर से 35 किमी की दूरी पर है। जिला स्वास्थ्य विभाग का एरिया होडल तक को कवर करता है। ऐसे में वहां के मरीजों को सड़क दुर्घटनाओं के बाद एम्स के ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचने में 50 किमी से ज्यादा की दूरी तय करनी पड़ती है।
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सड़क हादसों में घायल की जरूरत है ट्रामा सेंटर

पुलिस से मिले आकड़ों के अनुसार साल 2021 तक में जिले में 505 सड़क हादसों में 211 लोगों की मौत और 423 लोग घायल हुए थे। वहीं, साल 2022 में 589 सड़क हादसों में 253 लोगों की मौत और 452 लोग घायल हुए। इस साल सितंबर तक 447 सड़क हादसों में 191 लोगों की मौत और 423 लोग घायल हुए। इन घायलों में कुछ ऐसे मरीज भी थे जिनको समय पर ट्रामा सेंटर की सुविधा नहीं मिलने से उनकी मृत्यु हो गई। डीजी को लिखा पत्र
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रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन के वाइस प्रेसिडेंट एस के शर्मा ने बताया कि जिले में ट्रामा सेंटर नहीं होने की वजह से सड़क हादसों में मृत्यु के आकड़े बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने डीजी को पत्र लिखा है कि जिले के जितने भी निजी अस्पताल हैं उनमें सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को फ्री में उपचार दिया जाए। ताकि सड़क हादसों में मृत्यु की संख्या में कमी लाई जाए। संवाद
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