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Faridabad News: जन्माष्टमी के बाद फतेहपुर बिल्लौच में पंखा झांकी मेला की है पुरानी परंपरा

Wed, 02 Sep 2026 12:19 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 12:19 AM IST
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There is a long-standing tradition of the 'Pankha Jhanki Mela' in Fatehpur Billauch following Janmashtami.
देवी-देवताओं के साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और राष्ट्रीय झांकियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र, नौटंकी और दंगल भी होगा आयोजन
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हेमलता
फरीदाबाद। जन्माष्टमी के अवसर पर शहर के मंदिरों में जहां राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं, वहीं फरीदाबाद के पुराने कस्बों और गांवों में आज भी पारंपरिक आयोजनों की अलग पहचान बनी हुई है। फतेहपुर बिल्लौच में जन्माष्टमी के बाद नवमी के अवसर पर आयोजित होने वाला पंखा झांकी मेला इसी पुरानी परंपरा का हिस्सा है। करीब छह-सात दशक से चली आ रही यह परंपरा आज भी ग्रामीणों के लिए आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल का बड़ा अवसर है।


पर्व के दौरान मंदिरों को सजाया जाता है और भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी तरह फतेहपुर बिल्लौच में नवमी की शाम गांव के मुख्य दुर्गा मंदिर से पंखा झांकी मेले का शुभारंभ किया जाता है। इसके बाद विभिन्न झांकियां पूरे बाजार से होती हुई जवां रोड स्थित दाऊजी मंदिर तक पहुंचती हैं। शाम करीब पांच बजे शुरू होने वाले इस आयोजन में गांव के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
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मेले में देवी-देवताओं की झांकियों के साथ ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक संदेश और राष्ट्रीय भावना से जुड़ी झांकियां भी शामिल की जाती हैं। गांव में रहने वाले अलग-अलग वर्गों के लोग मिलकर इस आयोजन में अपनी भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि यह मेला धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सौहार्द की मिसाल भी बना हुआ है। कई बार मेले में विशेष आकर्षण के लिए जेवर शहर से बैंड भी बुलाया जाता है।
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नौटंकी और दंगल भी रहेंगे आकर्षण

नवमी की रात और अगले दिन दशमी की रात लोकनाट्य परंपरा से जुड़ी नौटंकी का आयोजन किया जाता है। इसमें अमर सिंह राठौड़, इंदल हरण और हरिश्चंद्र-तारामती जैसे सांग प्रस्तुत किए जाते हैं। प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने के लिए हजारों लोग जुटते हैं। दशमी के दिन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान में दंगल आयोजित होता है, जिसमें युवा पहलवान कुश्ती के दांव-पेच दिखाते हैं। इस तरह फतेहपुर बिल्लौच का यह आयोजन धर्म, लोककला, खेल और सामाजिक एकता को एक साथ जोड़ने वाली पुरानी परंपरा को आज भी जीवंत रखे हुए है।
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