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देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में मजदूरों ने निकाला जुलूस
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फ ीदाबाद में 26 नवंर को देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में मजदूरों ने जलूस निकाला ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। ज्वाइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल फरीदाबाद के तत्वावधान में 26 नवंबर की देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में मजदूरों ने बृहस्पतिवार को जुलूस निकाला। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सभी गुडईयर चौक पर इकट्ठे हुए। कर्मचारी नारे लगाते हुए पटेल नगर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व एटक के प्रधान आरएन सिंह, सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल एवं आईसीटी यूके कामरेड जवाहरलाल ने संयुक्त रूप से किया, जबकि संचालन कन्वीनर लालबाबू शर्मा ने किया। प्रदर्शनकारी केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर रोक लगाओ, श्रम कानूनों में किए गए संशोधन को वापस लो के नारे लगा रहे थे। आरएन सिंह और वीरेंद्र सिंह डंगवाल राज्य और केंद्र सरकार पर मजदूरों के लिए बनाए गए श्रम कानूनों में संशोधन करने का आरोप लगाया।
उन्होंने बताया कि पहले बने हुए कानूनों को पुराने कानून बताकर केंद्र सरकार मजदूरों के अधिकारों को छीन रही है। मालिकों को मजदूरों का शोषण करने के लिए और ताकतवर बना रही है। पहले न्यूनतम वेतन का कानून औद्योगिक विवाद अधिनियम सुरक्षा और मुआवजे का और बोनस के भुगतान के लिए कानून बनाए गए थे। अब इनकी जगह पर चार वेज कोड बनाकर मजदूरों के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी के विरोध और देश के अन्नदाता किसानों के विरुद्ध लाए गए तीन अध्यादेश के खिलाफ पूरे प्रदेश का मजदूर कर्मचारी वर्ग 26 नवंबर को सड़कों पर उतरेगा। इस दौरान सभी सेवाएं ठप रहेंगी।
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सभी गुडईयर चौक पर इकट्ठे हुए। कर्मचारी नारे लगाते हुए पटेल नगर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व एटक के प्रधान आरएन सिंह, सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल एवं आईसीटी यूके कामरेड जवाहरलाल ने संयुक्त रूप से किया, जबकि संचालन कन्वीनर लालबाबू शर्मा ने किया। प्रदर्शनकारी केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर रोक लगाओ, श्रम कानूनों में किए गए संशोधन को वापस लो के नारे लगा रहे थे। आरएन सिंह और वीरेंद्र सिंह डंगवाल राज्य और केंद्र सरकार पर मजदूरों के लिए बनाए गए श्रम कानूनों में संशोधन करने का आरोप लगाया।
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उन्होंने बताया कि पहले बने हुए कानूनों को पुराने कानून बताकर केंद्र सरकार मजदूरों के अधिकारों को छीन रही है। मालिकों को मजदूरों का शोषण करने के लिए और ताकतवर बना रही है। पहले न्यूनतम वेतन का कानून औद्योगिक विवाद अधिनियम सुरक्षा और मुआवजे का और बोनस के भुगतान के लिए कानून बनाए गए थे। अब इनकी जगह पर चार वेज कोड बनाकर मजदूरों के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी के विरोध और देश के अन्नदाता किसानों के विरुद्ध लाए गए तीन अध्यादेश के खिलाफ पूरे प्रदेश का मजदूर कर्मचारी वर्ग 26 नवंबर को सड़कों पर उतरेगा। इस दौरान सभी सेवाएं ठप रहेंगी।
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