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Faridabad News: पटरी पर लौट रहे औद्योगिक नगरी के हालात
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कच्चे माल की कीमतों में गिरावट शुरू, गैस की उपलब्धता हो रही सुनिश्चित
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध में सीजफायर लगने के बाद अब औद्योगिक नगरी में हालात बेहतर होने लगे हैं। बीते कई हफ्तों से कच्चे माल की कीमतों में जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है। सबसे ज्यादा राहत प्लास्टिक उद्योग को मिली है, जहां कच्चे माल की बढ़ती कीमतों पर ब्रेक लग गया है।
युद्ध के दौरान प्लास्टिक दाने की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई थी। उद्यमियों के अनुसार, उस दौरान प्लास्टिक दाने के दाम रोजाना 4 से 5 रुपये प्रति किलो की दर से बढ़ रहे थे। आलम यह था कि जो दाना युद्ध से पहले 90 से 100 रुपये के बीच उपलब्ध था, वह संकट के समय 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था।
अब वैश्विक स्थितियों में सुधार के साथ इसके दाम गिरने शुरू हो गए हैं। वर्तमान में प्लास्टिक दाना 155 से 156 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गया है। बता दें कि पॉलीथिन टैरीपिथालेट नाम के इस दाने का उपयोग मुख्य रूप से प्लास्टिक की बोतलें, जार और पैकेजिंग सामग्री बनाने के लिए किया जाता है। कीमतों में कमी आने से उत्पादन लागत में गिरावट आएगी, जिससे बाजार में प्लास्टिक उत्पादों के दाम भी स्थिर होने की उम्मीद है।
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कच्चे माल के साथ-साथ उद्यमियों के लिए ऊर्जा के स्रोत भी बड़ी चिंता का विषय थे। हालांकि प्राकृतिक गैस के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन उद्यमियों का कहना है कि अब कम से कम आपूर्ति सुनिश्चित हो पा रही है। पहले मांग के मुकाबले उपलब्धता काफी कम थी, जिससे उत्पादन ठप होने की कगार पर पहुंच गया था।
बातचीत
पिछले कुछ दिनों से बाजार में सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। विशेष रूप से प्लास्टिक दाने, जिसके दाम आसमान छू रहे थे, अब कुछ कम हुए हैं। इससे ऑर्डर पूरे करने में आसानी होगी।- हेमंत शर्मा, उद्यमी
स्थिति पहले के मुकाबले काफी बेहतर है। चाहे प्लास्टिक दाने का सस्ता होना हो या गैस की उपलब्धता, दोनों मोर्चों पर सुधार है। हालांकि गैस महंगी हुई है, पर कम से कम सप्लाई तो मिल रही है।-सुशील, उद्यमी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध में सीजफायर लगने के बाद अब औद्योगिक नगरी में हालात बेहतर होने लगे हैं। बीते कई हफ्तों से कच्चे माल की कीमतों में जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है। सबसे ज्यादा राहत प्लास्टिक उद्योग को मिली है, जहां कच्चे माल की बढ़ती कीमतों पर ब्रेक लग गया है।
युद्ध के दौरान प्लास्टिक दाने की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई थी। उद्यमियों के अनुसार, उस दौरान प्लास्टिक दाने के दाम रोजाना 4 से 5 रुपये प्रति किलो की दर से बढ़ रहे थे। आलम यह था कि जो दाना युद्ध से पहले 90 से 100 रुपये के बीच उपलब्ध था, वह संकट के समय 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था।
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अब वैश्विक स्थितियों में सुधार के साथ इसके दाम गिरने शुरू हो गए हैं। वर्तमान में प्लास्टिक दाना 155 से 156 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गया है। बता दें कि पॉलीथिन टैरीपिथालेट नाम के इस दाने का उपयोग मुख्य रूप से प्लास्टिक की बोतलें, जार और पैकेजिंग सामग्री बनाने के लिए किया जाता है। कीमतों में कमी आने से उत्पादन लागत में गिरावट आएगी, जिससे बाजार में प्लास्टिक उत्पादों के दाम भी स्थिर होने की उम्मीद है।
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कच्चे माल के साथ-साथ उद्यमियों के लिए ऊर्जा के स्रोत भी बड़ी चिंता का विषय थे। हालांकि प्राकृतिक गैस के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन उद्यमियों का कहना है कि अब कम से कम आपूर्ति सुनिश्चित हो पा रही है। पहले मांग के मुकाबले उपलब्धता काफी कम थी, जिससे उत्पादन ठप होने की कगार पर पहुंच गया था।
बातचीत
पिछले कुछ दिनों से बाजार में सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। विशेष रूप से प्लास्टिक दाने, जिसके दाम आसमान छू रहे थे, अब कुछ कम हुए हैं। इससे ऑर्डर पूरे करने में आसानी होगी।- हेमंत शर्मा, उद्यमी
स्थिति पहले के मुकाबले काफी बेहतर है। चाहे प्लास्टिक दाने का सस्ता होना हो या गैस की उपलब्धता, दोनों मोर्चों पर सुधार है। हालांकि गैस महंगी हुई है, पर कम से कम सप्लाई तो मिल रही है।-सुशील, उद्यमी