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Faridabad News: लॉरेंस गैंग की धमकी के बाद स्कॉर्पियो को करवाया जा रहा था बुलेटप्रूफ

Wed, 07 Oct 2026 12:39 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 12:39 AM IST
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The Scorpio was being made bulletproof following a threat from the Lawrence gang.
अदालत ने आरोपी वर्कशॉप मालिक की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज
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सचिन कुमार
फरीदाबाद। तिगांव थाना क्षेत्र में बिना अनुमति और लाइसेंस के गाड़ियों को बुलेटप्रूफ बनाने वाली वर्कशॉप पर सीएम फ्लाइंग के छापे के मामले में नया खुलासा हुआ है। वर्कशॉप से बरामद स्कॉर्पियो को किसी आम शौक के लिए नहीं, बल्कि लॉरेंस गैंग से मिली जान से मारने की धमकी के बाद बुलेटप्रूफ कराया जा रहा था।
स्कॉर्पियो मालिक को लॉरेंस गैंग से जान से मारने की धमकी मिली थी। यह जानकारी इस मामले की अदालत ने दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने अवैध रूप से बुलेटप्रूफ वाहन बनाने के आरोपी वर्कशॉप मालिक प्रमोद कुमार तुलसी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर को सीएम फ्लाइंग के निरीक्षक भगत सिंह और स्थानीय पुलिस ने एस्सार पेट्रोल पंप के पास चल रही वर्कशॉप पर छापेमारी की थी। मौके से दो स्कॉर्पियो और दो फॉर्च्यूनर गाड़ियां, आठ बड़ी व तीन छोटी स्टील/बुलेटप्रूफ शीट बरामद हुई थीं। मौके पर एक स्कॉर्पियो में लोहे की शीट चढ़ाने का काम चल रहा था। पुलिस जांच में शामिल हुए स्कॉर्पियो गाड़ी के पंजीकृत मालिक हरेंद्र भाटी ने बताया कि कुछ महीने पहले उन्हें लॉरेंस गैंग से जान से मारने की धमकी मिली थी। इस संबंध में उन्होंने एनआईटी फरीदाबाद थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। जान का खतरा देखते हुए उन्हाेंने अपनी गाड़ी को बुलेटप्रूफ कराने के लिए बाकायदा सरकार के पास आवेदन किया था।
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केरल निवासी से पांच लाख में हुआ था सौदा

स्कॉर्पियो मालिक हरेंद्र भाटी के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली कि प्रमोद कुमार तुलसी निवासी केरल, हाल निवासी बल्लभगढ़ गाड़ियों को बुलेटप्रूफ बनाने का काम करता है। संपर्क करने पर प्रमोद ने दावा किया कि उसके पास वाहनों को बुलेटप्रूफ बनाने का वैध सरकारी लाइसेंस है। उसने काम के बदले पांच लाख रुपये मांगे, जिस पर हरेंद्र ने 80 हजार रुपये आरटीजीएस के जरिए और बीस हजार रुपये नकद (कुल 1 लाख रुपये) एडवांस दे दिए। बाद में पता चला कि आरोपी के पास कोई लाइसेंस नहीं है। अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जीएसटी पंजीकरण और स्ट्रेट सेफ्टी सॉल्यूशंस के नाम से कारोबार का हवाला देते हुए कहा कि उनका मुवक्किल वाहनों की मरम्मत का काम करता है। वहीं, लोक अभियोजक ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जीएसटी प्रमाणपत्र में वाहनों को बुलेटप्रूफ बनाने की कोई अनुमति या लाइसेंस नहीं है।
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