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Faridabad News: सुख हो या दुख हो, भगवान से कहो
Fri, 01 Aug 2025 11:13 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:13 PM IST
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श्री सनातन धर्म मंदिर में छह अगस्त तक होगा कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-9 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में 30 जुलाई से 6 अगस्त तक धार्मिक सेवा मंडली की ओर से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। शुक्रवार को तीसरे दिन भागवत व्यास आचार्य मुकेश शुक्ला ने भक्तों से कहा कि परमात्मा का नाम सदा जपते रहो सुख हो या दुख हो सब बात भगवान से कहो। उन्होंने कहा कि जब जब भक्त भगवान को पुकारते है तो भगवान उनको दर्शन जरूर देते हैं।
पशु भी जब दुख में उनको पुकारते है जैसे कि हाथी ने अपने जीवन की रक्षा के लिए भगवान को पुकारा तो भगवान ने उसकी जान बचाई और मगरमच्छ का भी उद्धार किया। आगे कथा कहते हुए व्यास ने भक्त अजामल की कथा सुनाई। जिसे सुनकर सभी श्राेता भक्ति में लीन हो गए। श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से भागवत व्यास ने पहले धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार हुआ है।
प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब धरा पर मथुरा के राजा कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए, तब धरती की करुण पुकार सुनकर देवकी माता के अष्टम पुत्र के रूप में हरि विष्णु ने भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लिया। कथा व्यास ने बताया 28 प्रकार के नरक होते हैं। शिशुपाल ने भगवान कृष्ण का अनादर किया उनका अपमान किया, लेकिन भगवान ने उन्हें भी मौका दिया कि वह शरण में आ जाए, लेकिन पापों से घिरा होने के कारण उसका अंत हो गया।
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फरीदाबाद। सेक्टर-9 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में 30 जुलाई से 6 अगस्त तक धार्मिक सेवा मंडली की ओर से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। शुक्रवार को तीसरे दिन भागवत व्यास आचार्य मुकेश शुक्ला ने भक्तों से कहा कि परमात्मा का नाम सदा जपते रहो सुख हो या दुख हो सब बात भगवान से कहो। उन्होंने कहा कि जब जब भक्त भगवान को पुकारते है तो भगवान उनको दर्शन जरूर देते हैं।
पशु भी जब दुख में उनको पुकारते है जैसे कि हाथी ने अपने जीवन की रक्षा के लिए भगवान को पुकारा तो भगवान ने उसकी जान बचाई और मगरमच्छ का भी उद्धार किया। आगे कथा कहते हुए व्यास ने भक्त अजामल की कथा सुनाई। जिसे सुनकर सभी श्राेता भक्ति में लीन हो गए। श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से भागवत व्यास ने पहले धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार हुआ है।
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प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब धरा पर मथुरा के राजा कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए, तब धरती की करुण पुकार सुनकर देवकी माता के अष्टम पुत्र के रूप में हरि विष्णु ने भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लिया। कथा व्यास ने बताया 28 प्रकार के नरक होते हैं। शिशुपाल ने भगवान कृष्ण का अनादर किया उनका अपमान किया, लेकिन भगवान ने उन्हें भी मौका दिया कि वह शरण में आ जाए, लेकिन पापों से घिरा होने के कारण उसका अंत हो गया।
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