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प्ले स्कूल में नशीले पदार्थ का खेल! स्कूल से आने के बाद गुमशुम और बेसुध रहते बच्चे, निरीक्षण के बाद लगा ताला

Sat, 19 Apr 2025 01:04 AM IST
नोएडा ब्यूरो प्रशांत चौहान, अमर उजाला, फरीदाबाद
प्रशांत चौहान, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Sat, 19 Apr 2025 01:04 AM IST
सार

स्कूल को सील कर दिया गया है। इसके अलावा सीपी को पत्र लिखकर इसकी सीबीआई जांच की मांग की गई। इसके अलावा अस्पताल से बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है।

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The kids are sleeping in the afternoon, come to pick them up after 5pm.
बेसुध बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'बच्चा अभी दोपहर में सो रहा है, शाम पांच या छह बजे आना, तब घर भेजेंगे।' पल्ला स्थित प्ले स्कूल में अपने बच्चों को लेने गई दादी सोनामती को स्कूल के कर्मियों ने धमकाकर वापस भेज दिया। सोनामती कहती हैं कि लगभग सितंबर 2024 में स्कूल जाने लगे उनके पोते और पोती की सेहत भी काफी गिर गई है। स्कूल में एक बच्चे की मौत की बात सुनकर इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक दहशत में हैं। 
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पल्ला स्थित प्ले स्कूल में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और पुलिस के औचक निरीक्षण के बाद शुक्रवार को ताला लटका हुआ था। स्कूल में आने वाले अधिकतर बच्चे पल्ला क्षेत्र में आसपास के मोहल्लों में ही रहते हैं। स्कूल में एक बच्चे की मौत की बात पर अभिभावक सकते में हैं। अभिभावक विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि बच्चों को सुलाने के लिए स्कूल प्रबंधन कुछ नशीला पदार्थ खिलाता था।
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स्कूल से आने के बाद बच्चे गुमसुम और बेसुध रहते थे
अमर उजाला की टीम से बातचीत में अभिभावकों ने माना कि स्कूल से आने के बाद बच्चे कुछ देर गुमसुम और बेसुध रहते थे। अभिभावकों का कहना है उनके बच्चों की सेहत में भी असर पड़ रहा था, लेकिन वह इस बात को बहुत ध्यान नहीं दे पाए। अब लग रहा है कि दोपहर में बच्चों को सुलाने के लिए जरूर कोई न कोई नशीला पदार्थ खिलाया जाता था। यदि अभिभावक पहुंच जाते थे तो उनको उल्टे पांव ही वापस कर दिया जाता था। सुबह आने के बाद शाम पांच बजे के बाद ही बच्चों को भेजा जाता था। अभिभावकों के अनुसार स्कूल से वापस आने के बाद भी बच्चे बेसुध रहते थे।
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छह माह में बच्चों की सेहत हो गई आधी
'मेरा बेटा और बहू नौकरी करते हैं और उनके बच्चे इसी स्कूल में जाते हैं। शुक्रवार को स्कूल पर छापा पड़ने के बाद पता चला कि यहां बच्चों को नशीला पदार्थ देकर सुलाया जाता है। हमारे बच्चे अक्सर स्कूल से आने के बाद बेसुध रहते थे और घर आकर भी सो जाते थे। सितंबर 2024 में बच्चों ने स्कूल जाना शुरू किया था, तब से अब तक सभी बच्चों की सेहत बहुत गिर गई है।' -सोनामती, अभिभावक
 
बेटी से करते थे मारपीट
'मैं और मेरे पति नौकरी करते हैं। मेरे तीन बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते थे। यहां तीन बच्चों के लिए चार हजार रुपये लगते थे। हमारे बजट में उनका रहना और पढ़ना था, इसलिए हम इस स्कूल में बच्चों को भेजकर सुकून से नौकरी करते थे। मैं सुबह आठ बजे ही बच्चों को स्कूल में छोड़कर चली जाती और शाम को पांच बजे के बाद उनको स्कूल से लाती थी। स्कूल में पांच वर्ष की बड़ी बेटी ने कई बार मारपीट करने की बात बताई थी। इसे लेकर मैंने स्कूल में बात की थी तो टाल दिया गया।' - पूनम यादव, अभिभावक
 
दूसरे स्कूलों की तरह नहीं सुनाई देता था बच्चों का शोर
'अधिकतर समय स्कूल के दरवाजे बंद ही रहते थे। सामान्य स्कूल के जैसे बच्चों का शोर नहीं आता था। स्कूल में 100 से अधिक बच्चे पढ़ते और रहते हैं। कभी-कभी लगता था कि यह कैसा स्कूल है जहां बच्चे शोर भी नहीं करते। सिर्फ स्कूल गेट पर बच्चे बस तभी दिखाई देते थे जब उनको लेने शाम को अभिभावक आते थे।' - राजू, पड़ोस में कंपनी कर्मी


'स्कूल को सील कर दिया गया है। इसके अलावा सीपी को पत्र लिखकर इसकी सीबीआई जांच की मांग की गई। इसके अलावा अस्पताल से बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है।' - सुनील यादव, सीडब्ल्यूसी सदस्य
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