फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   The girls did not miss in the fork collision

कांटे की टक्कर में छोरियां चूकी नहीं

Fri, 06 Aug 2021 11:07 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:07 PM IST
विज्ञापन
The girls did not miss in the fork collision
फरीदाबाद के सेक्टर 12 खेल परिसर में हॉकी खेल का अभ्यास करते खिलाड़ी । - फोटो : Faridabad
फोटो- 31, 32, 33, 34
विज्ञापन

कांटे की टक्कर में छोरियां चूकी नहीं
- ओलंपिक से बाहर होने के बाद भी महिला हॉकी टीम से बेटियों की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ओलंपिक में इस बार यादगार प्रदर्शन करने वाली पुरुष-महिला हॉकी टीम को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को राजीव गांधी खेल पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानंद के नाम पर कर दिया। इस बार ओलंपिक में पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीता तो शुक्रवार को ग्रेट ब्रिटेन को कड़ी चुनौती देते हुए महिला टीम मैच हार गई लेकिन कांटे की टक्कर में छोरियां बिलकुल चूकीं नहीं। हालांकि, इस बार हार-जीत से परे हॉकी ने एक बार फिर देश की नजरों में एक अलग पहचान और नाम कमाया है।
इससे स्थानीय खिलाड़ी हॉकी में संभावनाएं तलाशने के लिए उत्साहित हैं। वह चाहते हैं कि ओलंपिक में जो कसर रह गई है, उसे वह जल्द से जल्द अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ पूरा करें। स्थानीय स्तर पर जिला हॉकी कोच निरेश यादव ने बताया कि इस बार की महिला खिलाड़ी युवा हैं। इसमें से नौ हरियाणा मूल की हैं। वहीं, पुरुष हॉकी ने भी 41 साल बाद ओलंपिक फाइनल में जगह बनाई थी। स्थानीय स्तर पर हॉकी सीख रहीं बेटियों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राष्ट्रीय खेल हॉकी की पहचान बनाए रखने का अलग चाव पैदा हुआ है। इस बात से उत्साहित स्थानीय हॉकी खिलाड़ियों और महिला कोच की उम्मीद और उत्साह का ठिकाना नहीं है।
विज्ञापन

गोल कीपर सविता हरियाणा के हिसार से हैं। इसी तरह रानी और नवजोत कौर और नवनीत कौर के अलावा शर्मिला देवी, निशा भी हरियाणा मूल की हैं। वहीं, जिले में बीते छह वर्ष से हॉकी कोच के रूप में तैनात महिला कोच निरेश यादव भी हरियाणा के सोनीपत जिले से हैं। वह उत्साहित हैं कि उनके प्रदेश और देश की बेटियों ने महिला हॉकी का इतिहास बदला। यह अलग बात है कि वह पदक हासिल नहीं कर सकी। फिर भी यह साबित कर दिखाया कि हॉकी में भी खिलाड़ी और दर्शकों का रोमांच है। इस खेल में संभावनाएं और पदक दोनों की दावेदारी की गुंजाइश है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बेटियां बदलेंगी हर क्षेत्र का इतिहास
ओलंपिक तक पहुंची महिला पुरुष टीम का प्रदर्शन इस बार उत्साहित करने वाला रहा। सेमीफाइनल से दोनों टीमें बेशक बाहर हुईं लेकिन विश्वस्तरीय प्रदर्शन से खिलाड़ियों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। इससे स्थानीय खिलाड़ी उत्साहित हैं। फिलहाल 25 बेटियों को ट्रेनिंग दे रही हूं। पुरुष खिलाड़ी भी उत्साहित हैं। बेटियां हर क्षेत्र का इतिहास बदल दें, खेल का उत्साह बढ़े। यही प्रयास है।
- निरेश यादव, जिला हॉकी कोच
पुरुष महिला दोनों का मैच तीसरे-चौथे स्थान के लिए कड़ी टक्कर का रहा। पुरुषों ने पदक झटका महिलाएं हार गईं लेकिन कांटे की टक्कर में छोरियां बिलकुल नहीं चूकीं। इससे 2024 के खेल में ओलंपिक गोल्ड की उम्मीद कई गुना बढ़ी है।

- स्नेहा, खिलाड़ी
ओलंपिक में बेस्ट 12 टीम पहुंचती हैं। टॉप थ्री टीम ही नाम कमाती हैं। गर्व है कि महिला इंडियन टीम ने पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई, यह ऐतिहासिक बात रही। आगे पदक की दावेदारी के लिए हम भी कमर कसेंगे।
- अंशु, खिलाड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed