{"_id":"6a076daf2bdb5776bb0ee16d","slug":"the-city-will-be-free-from-plastic-waste-two-hi-tech-plants-will-be-installed-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-70039-2026-05-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: प्लास्टिक कचरे से मुक्त होगा शहर, दो 2 हाईटेक प्लांट लगेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: प्लास्टिक कचरे से मुक्त होगा शहर, दो 2 हाईटेक प्लांट लगेंगे
विज्ञापन
तिगांव, दयालपुर, मोहना, पाली और आसपास के गांवों की आबादी को मिलेगा सीधा लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर के रूप में पहचान रखने वाले फरीदाबाद जिले के दो ब्लॉकों में अब प्लास्टिक कचरे के खिलाफ तकनीकी स्तर पर बड़ी लड़ाई शुरू होने जा रही है। तिगांव के साथ दयालपुर में भी हाईटेक प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्लांट लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अगले हफ्ते कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। जिला परिषद द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू की जा रही परियोजना को इलाके की सफाई के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है।
दोनों प्लांट स्थापित होने के बाद तिगांव, दयालपुर, मोहना, पाली और आसपास के दर्जनों गांवों की करीब दो लाख लोगों की आबादी को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले समय में पूरे जिले में ब्लॉक स्तर पर इस तरह के प्लांट लगाए जाएंगे।
आधुनिक मशीनों से बदलेगी व्यवस्था
परियोजना के तहत प्लास्टिक श्रेडर, बेलिंग मशीन, डस्ट रिमूवर और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इन मशीनों की मदद से गांवों से एकत्र प्लास्टिक कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर रिसाइकिल योग्य सामग्री में बदला जाएगा। इन क्षेत्रों में अभी तक प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश कचरा खाली प्लॉटों, नालियों या खेतों के किनारे फेंका जाता रहा है। कई जगह लोग इसे जलाने पर मजबूर हैं जिससे जहरीला धुआं निकलता है और वायु प्रदूषण बढ़ता है।
विज्ञापन
तेजी से बढ़ती आबादी ने बढ़ाई समस्या
फरीदाबाद जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। तिगांव और दयालपुर क्षेत्र में नई कॉलोनियों और आबादी के विस्तार के साथ प्लास्टिक कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। बाजारों, डेयरियों और घरेलू उपयोग से निकलने वाला प्लास्टिक अक्सर नालियों में फंसकर जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित करता है। बरसात के दिनों में यही समस्या जलभराव का बड़ा कारण बनती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां हल्की बारिश के बाद भी गलियों में पानी भर जाता है जिससे आवागमन प्रभावित होता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है।
30 दिन में संचालन शुरू करने का लक्ष्य
परियोजना को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए जिला परिषद ने सख्त समय सीमा तय की है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले सोमवार को बैठक करके कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। काम शुरू होने के 30 दिन के अंदर प्लांट काम करना शुरू कर देगा। शुरुआती चरण में स्थानीय कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को मशीन संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि लंबे समय तक व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
प्लास्टिक सामग्री का उपयोग कई कार्यों में होगा, अतिरिक्त आय मिलेगी
इस परियोजना का सबसे अहम पहलू यह है कि प्लास्टिक कचरे को अब बोझ नहीं बल्कि संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। श्रेडिंग के बाद तैयार प्लास्टिक सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा। इससे प्रशासन को अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था मजबूत हुई तो यह मॉडल स्वच्छता के साथ रोजगार और आय सृजन का भी माध्यम बन सकता है।
जिले के अन्य ब्लॉकों तक पहुंचेगा मॉडल
तिगांव और दयालपुर को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यहां आबादी और कचरे का दबाव सबसे तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन का मानना है कि इन दोनों प्लांटों के सफल संचालन के बाद बल्लभगढ़ और अन्य इलाकों में भी इसी तरह की यूनिट स्थापित की जा सकती हैं।
जमीनी स्तर पर लोगों को मिलेगा लाभ
लोगों को इसका सबसे बड़ा फायदा साफ-सुथरा वातावरण, जाम मुक्त नालियां और प्रदूषण में कमी के रूप में दिखाई देगा। साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य और खेती की जमीन पर प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभाव भी कम होंगे। जिले के ग्रामीण इलाकों में इसे स्वच्छता और पर्यावरण सुधार की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है।
दो स्थानों पर यह प्लांट स्थापित किए जाएंगे इससे स्वच्छता बढ़ने के साथ प्रदूषण में भी काफी कमी आएगी। लोगों को इस परियोजना से काफी लाभ मिलेगा।
- विजय लोहिया, चेयरमेन जिला परिषद
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर के रूप में पहचान रखने वाले फरीदाबाद जिले के दो ब्लॉकों में अब प्लास्टिक कचरे के खिलाफ तकनीकी स्तर पर बड़ी लड़ाई शुरू होने जा रही है। तिगांव के साथ दयालपुर में भी हाईटेक प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्लांट लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अगले हफ्ते कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। जिला परिषद द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू की जा रही परियोजना को इलाके की सफाई के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है।
दोनों प्लांट स्थापित होने के बाद तिगांव, दयालपुर, मोहना, पाली और आसपास के दर्जनों गांवों की करीब दो लाख लोगों की आबादी को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले समय में पूरे जिले में ब्लॉक स्तर पर इस तरह के प्लांट लगाए जाएंगे।
विज्ञापन
आधुनिक मशीनों से बदलेगी व्यवस्था
परियोजना के तहत प्लास्टिक श्रेडर, बेलिंग मशीन, डस्ट रिमूवर और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इन मशीनों की मदद से गांवों से एकत्र प्लास्टिक कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर रिसाइकिल योग्य सामग्री में बदला जाएगा। इन क्षेत्रों में अभी तक प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश कचरा खाली प्लॉटों, नालियों या खेतों के किनारे फेंका जाता रहा है। कई जगह लोग इसे जलाने पर मजबूर हैं जिससे जहरीला धुआं निकलता है और वायु प्रदूषण बढ़ता है।
विज्ञापन
तेजी से बढ़ती आबादी ने बढ़ाई समस्या
फरीदाबाद जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। तिगांव और दयालपुर क्षेत्र में नई कॉलोनियों और आबादी के विस्तार के साथ प्लास्टिक कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। बाजारों, डेयरियों और घरेलू उपयोग से निकलने वाला प्लास्टिक अक्सर नालियों में फंसकर जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित करता है। बरसात के दिनों में यही समस्या जलभराव का बड़ा कारण बनती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां हल्की बारिश के बाद भी गलियों में पानी भर जाता है जिससे आवागमन प्रभावित होता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है।
30 दिन में संचालन शुरू करने का लक्ष्य
परियोजना को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए जिला परिषद ने सख्त समय सीमा तय की है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले सोमवार को बैठक करके कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। काम शुरू होने के 30 दिन के अंदर प्लांट काम करना शुरू कर देगा। शुरुआती चरण में स्थानीय कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को मशीन संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि लंबे समय तक व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
प्लास्टिक सामग्री का उपयोग कई कार्यों में होगा, अतिरिक्त आय मिलेगी
इस परियोजना का सबसे अहम पहलू यह है कि प्लास्टिक कचरे को अब बोझ नहीं बल्कि संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। श्रेडिंग के बाद तैयार प्लास्टिक सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा। इससे प्रशासन को अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था मजबूत हुई तो यह मॉडल स्वच्छता के साथ रोजगार और आय सृजन का भी माध्यम बन सकता है।
जिले के अन्य ब्लॉकों तक पहुंचेगा मॉडल
तिगांव और दयालपुर को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यहां आबादी और कचरे का दबाव सबसे तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन का मानना है कि इन दोनों प्लांटों के सफल संचालन के बाद बल्लभगढ़ और अन्य इलाकों में भी इसी तरह की यूनिट स्थापित की जा सकती हैं।
जमीनी स्तर पर लोगों को मिलेगा लाभ
लोगों को इसका सबसे बड़ा फायदा साफ-सुथरा वातावरण, जाम मुक्त नालियां और प्रदूषण में कमी के रूप में दिखाई देगा। साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य और खेती की जमीन पर प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभाव भी कम होंगे। जिले के ग्रामीण इलाकों में इसे स्वच्छता और पर्यावरण सुधार की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है।
दो स्थानों पर यह प्लांट स्थापित किए जाएंगे इससे स्वच्छता बढ़ने के साथ प्रदूषण में भी काफी कमी आएगी। लोगों को इस परियोजना से काफी लाभ मिलेगा।
- विजय लोहिया, चेयरमेन जिला परिषद